यह कहानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़ी है, जहां देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ एक ऐतिहासिक आंदोलन खड़ा हुआ।
आइए इसे शुरुआत से समझते हैं:
1. पृष्ठभूमि:
सोशल मीडिया के व्यंग्य से जन-आंदोलन तककहानी की शुरुआत देश में लगातार हो रहे पेपर लीक (विशेषकर NEET-UG परीक्षा) और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित घोटालों के आक्रोश से होती है। बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र और युवा नेता अभिजीत दीपके ने छात्रों के गुस्से को एक अनोखी आवाज देने के लिए सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक (Satire) नाम से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का गठन किया।यह नाम एक तंज था कि कैसे आम जनता और छात्रों को व्यवस्था की कमियों के बीच ‘कॉकरोच’ की तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। देखते ही देखते, यह सोशल मीडिया व्यंग्य देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में बदल गया। 20 जून को CJP के बैनर तले युवाओं ने जंतर-मंतर पर डेरा डाल दिया और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी।
2. सोनम वांगचुक का आंदोलन में शामिल होना:
आंदोलन को असली धार तब मिली जब 28 जून को लद्दाख के मशहूर पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पहुंचे। सोनम वांगचुक (जिनके जीवन से प्रेरित होकर ‘3 इडियट्स’ फिल्म का फुंगसुख वांगडू किरदार बना) ने युवाओं के इस दर्द को समझा।उन्होंने देश के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाते हुए जंतर-मंतर के मंच पर ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। वांगचुक का कहना था कि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित किए बिना एक मजबूत राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती।
3. 21 दिनों का कड़ा अनशन और गिरता स्वास्थ्य
सोनम वांगचुक का अनशन दिन-ब-दिन कड़ा होता गया। उन्होंने ग्लूकोज, ड्रिप या कोई भी दवा लेने से साफ मना कर दिया। 20 दिनों के भीतर उनका वजन लगभग 9.5 किलोग्राम कम हो गया। उनके शरीर में पानी की गंभीर कमी (Dehydration) होने लगी। शारीरिक रूप से बेहद कमजोर होने के बावजूद, वांगचुक ने भीड़ से कहा, “मैं बाहर से कमजोर हुआ हूं, लेकिन भीतर से बहुत मजबूत हूं। “आंदोलनकारियों ने 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च निकालने का ऐलान कर दिया था और वांगचुक ने कमजोर हालत में भी इस मार्च में पैदल चलने की जिद ठान रखी थी।
4. पुलिस का ‘सीक्रेट ऑपरेशन’ और हाई वोल्टेज ड्रामा:
जैसे-जैसे वांगचुक की हालत बिगड़ी, मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा, जिसने सरकार को उनके स्वास्थ्य की निगरानी करने का आदेश दिया।18 जुलाई (अनशन के 21वें दिन) की सुबह दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा एक्शन लिया। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में (Plainclothes) डॉक्टर बनकर मंच पर आए और सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गए। CJP ने इसे “बलपूर्वक किया गया अपहरण” करार दिया।जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और छात्रों को वहां से खदेड़ा जाने लगा। वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि ने अस्पताल से बयान जारी किया कि उनकी सहमति के बिना वांगचुक को कोई भी दवा या इंजेक्शन न दिया जाए।
5. कहानी का नया मोड़: दीपके का अनशन और स्याही कांड:
सोनम वांगचुक को हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें हिरासत में लिया।रिहा होने के तुरंत बाद दीपके वापस जंतर-मंतर पहुंचे और एक बड़ा ऐलान किया:
(1) मांगों का दायरा बढ़ा: दीपके ने कहा कि अब लड़ाई सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नहीं, बल्कि इस तानाशाही के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की है।
(2) खुद बैठे अनशन पर: वांगचुक की मशाल को आगे बढ़ाते हुए अभिजीत दीपके ने खुद आमरण अनशन शुरू कर दिया।
(3)स्याही हमला: जब दीपके मीडिया और छात्रों को संबोधित कर रहे थे, तभी भीड़ से निकलकर एक अज्ञात महिला ने उन पर स्याही फेंक दी। इस हमले के बाद दीपके ने पीछे हटने से मना करते हुए कहा, “यह स्याही मेरे लिए गर्व का प्रतीक है, मैं डरने वाला नहीं हूं।”
वर्तमान स्थिति जंतर-मंतर पर तनाव बरकरार है। सोनम वांगचुक अस्पताल के बेड से आंदोलन पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि अभिजीत दीपके और अन्य छात्र संगठनों के नेता (जैसे AISA के छात्र) भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। देश भर के विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया है। पुलिस की तमाम पाबंदियों के बावजूद, आंदोलनकारी छात्रों का दावा है कि उनका 20 जुलाई का संसद मार्च हर हाल में होकर रहेगा।

