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हूतियों के खिलाफ मोर्चे की तैयारी? सऊदी में JF-17 फाइटर जेट ड्रोन और 15 हजार पाकिस्तानी जवानों की हुई तैनाती

हूतियों के खिलाफ मोर्चे की तैयारी? सऊदी में JF-17 फाइटर जेट ड्रोन और 15 हजार पाकिस्तानी जवानों की हुई तैनाती

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपनी सैन्य मौजूदगी की पुष्टि की है। पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि पाकिस्तानी सैन्यकर्मी पहले से ही सऊदी अरब में तैनात हैं और वहां कई क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

अहमद शरीफ चौधरी ने एक इंटरव्यू में कहा कि सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। उनके मुताबिक, पाकिस्तानी सैनिक वहां कई दशकों से मौजूद हैं और अलग-अलग सैन्य क्षमताओं के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच बना मक्का रक्षा समझौता लंबे समय से चले आ रहे सैन्य और रणनीतिक संबंधों का विस्तार है।

क्या है मक्का पैक्ट ?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक, तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। पाकिस्तान ने इस समझौते को रक्षात्मक प्रकृति का बताया है।

5 अक्टूबर को रियाद में इस समझौते के तहत हुई आपात बैठक में तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा व्यवस्था को जमीन पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई। बैठक में जरूरत के मुताबिक सैन्य बल और क्षमताएं सऊदी अरब में तेजी से तैनात करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का फैसला किया गया।

सऊदी में कितने पाकिस्तानी सैनिक हैं?
इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी अरब में 15,000 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मौजूद हैं। रिपोर्ट में छह इन्फैंट्री और आर्टिलरी ब्रिगेड के साथ वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की तैनाती का भी दावा किया गया है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से अभी तक सऊदी अरब में मौजूद सैनिकों की इतनी बड़ी संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तानी हथियारों और जेट विमानों की सऊदी अरब में मौजूदगी का भी दावा किया गया है। ऐसे दावों को आधिकारिक पुष्टि से अलग रखकर देखना जरूरी है।

हूती हमलों के बीच बढ़ी सऊदी की सुरक्षा चिंता
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष बढ़ने के बाद सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। हाल के दिनों में सऊदी शहरों और महत्वपूर्ण ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में मक्का रक्षा समझौते को लागू करने की दिशा में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच सैन्य सहयोग तेज हुआ है।

मक्का समझौते के तहत तीनों देशों ने सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही है। हालांकि, इसका वास्तविक सैन्य स्वरूप और अलग-अलग देशों की सेनाओं की भूमिका आने वाले समय में होने वाली तैनाती और आधिकारिक फैसलों से और स्पष्ट होगी।

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