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फैजुल्लागंज में बाढ़ से बेहाल जिंदगी, सरकारी नाव का इंतजार; ड्रम के सहारे आवाजाही को मजबूर लोग

फैजुल्लागंज में बाढ़ से बेहाल जिंदगी, सरकारी नाव का इंतजार; ड्रम के सहारे आवाजाही को मजबूर लोग

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके की गणेश विहार और अन्नपूर्णा नगर कॉलोनियों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई इलाकों में पानी भरा होने के कारण लोगों के सामने घर से बाहर निकलने और जरूरी सामान सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से राहत और बचाव के इंतजाम जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहे हैं।

ड्रम और जुगाड़ के सहारे निकल रहे लोग
बाढ़ के पानी के बीच आवाजाही के लिए स्थानीय लोग अपने स्तर पर इंतजाम करने को मजबूर हैं। कुछ लोग ड्रम और दूसरे सामान को जोड़कर अस्थायी नाव तैयार कर रहे हैं, जबकि कई लोग पानी के बीच से पैदल ही निकलने की कोशिश कर रहे हैं। घरों में फंसे सामान को बाहर निकालने के लिए निजी ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों का सहारा लिया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन निजी साधनों के लिए उनसे मनमाना किराया लिया जा रहा है। ऐसे में पहले से परेशानी झेल रहे परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।

राहत सामग्री और पीने के पानी का इंतजार
जलभराव के बावजूद प्रभावित कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें अब तक पर्याप्त राहत सामग्री नहीं मिली है। लोगों के मुताबिक खाने-पीने की चीजें तो दूर, कई स्थानों पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं हो सकी है। पानी में जहरीले जीव-जंतुओं के आने की आशंका के चलते लोग बाहर निकलने में भी डर रहे हैं।

नाव चलाने के दावों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने प्रशासन के नावों से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों की ओर से नाव उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन मौके पर उन्हें नाव दिखाई नहीं दे रही है। लोगों का आरोप है कि राहत व्यवस्था कागजों तक सीमित है और मौके पर हालात अलग हैं।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि बारिश थमने के बावजूद जलभराव कम नहीं हो रहा है। पानी कब तक रहेगा, इसे लेकर भी लोगों में असमंजस है। प्रभावित परिवार अब प्रशासन से तत्काल नाव, पेयजल, खाद्य सामग्री और राहत व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

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