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इजराइल चुनाव में नेतन्याहू की वापसी के संकेत! रुझानों में गठबंधन आगे, ट्रम्प ने लिया जीत का श्रेय

इजराइल चुनाव में नेतन्याहू की वापसी के संकेत! रुझानों में गठबंधन आगे, ट्रम्प ने लिया जीत का श्रेय

इजराइल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। चुनाव से पहले जिन सर्वे में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ने और उनकी हार की आशंका जताई जा रही थी, अब शुरुआती रुझानों में उनका गठबंधन बढ़त बनाता दिखाई दे रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी नेतन्याहू के पक्ष में माहौल बदलने का दावा किया है। हालांकि, अंतिम नतीजों और सरकार गठन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है।

शुरुआती रुझानों में नेतन्याहू गठबंधन को बढ़त
वोटों की गिनती से जुड़े दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 66.2 प्रतिशत मतों की गणना के बाद नेतन्याहू के गठबंधन को 56 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। अरब दलों की जॉइंट लिस्ट और राअम पार्टी को मिलाकर 16 सीटों का अनुमान जताया गया है।

इजराइल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में 56 सीटों के साथ आगे होने के बावजूद नेतन्याहू गठबंधन को बहुमत तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ सकता है। यही वजह है कि चुनावी बढ़त के साथ-साथ सहयोगी दलों की भूमिका भी बेहद अहम हो गई है।

ट्रम्प बोले- मेरे समर्थन से बदला चुनावी माहौल
चुनावी मुकाबले के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नेतन्याहू की बढ़त पर प्रतिक्रिया देते हुए इसका श्रेय अपने समर्थन को दिया। ट्रम्प के मुताबिक, चुनाव से पहले नेतन्याहू की हार की संभावनाएं जताई जा रही थीं, लेकिन उनके समर्थन के बाद राजनीतिक माहौल बदल गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है और नेतन्याहू जीत की स्थिति में पहुंच सकते हैं।

ट्रम्प के इस बयान ने इजराइल के चुनावी घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि, चुनावी नतीजों पर बाहरी समर्थन का कितना असर पड़ा, इसका आकलन अंतिम परिणाम और राजनीतिक परिस्थितियों के स्पष्ट होने के बाद ही किया जा सकेगा।

सरकार बनाने के लिए मिलेंगे अधिकतम 42 दिन
इजराइल में चुनाव जीतना और सरकार बनाना दो अलग-अलग राजनीतिक चरण हैं। किसी भी गठबंधन को संसद में बहुमत का समर्थन हासिल करना होता है। इसके लिए राष्ट्रपति उस नेता को सरकार बनाने का अवसर देते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना होती है।

सरकार बनाने के लिए आमतौर पर पहले 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत दे सकते हैं। इस तरह कुल 42 दिनों के भीतर सरकार गठन की कोशिश पूरी करनी होती है। इस दौरान विभिन्न दलों के बीच मंत्री पदों, नीतियों और साझा कार्यक्रमों को लेकर बातचीत होती है। नई सरकार को संसद में विश्वास मत हासिल करना भी जरूरी होता है। यदि किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो छोटे दलों का समर्थन और उनका रुख निर्णायक साबित हो सकता है।

डबल लिफाफों में रखे वोटों की गिनती पर नजर
इजराइल के चुनाव में डबल लिफाफे वाली मतदान प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मतों की गिनती आधी रात के आसपास शुरू होने और अगले दिन शाम तक पूरी होने की उम्मीद जताई गई थी। दिए गए विवरण में इन मतों की संख्या लगभग पांच लाख बताई गई है।

इस व्यवस्था के तहत उन मतदाताओं को मतदान का अवसर दिया जाता है, जो अपने सामान्य मतदान केंद्र पर नहीं पहुंच सकते। इनमें सैनिक, अस्पतालों में भर्ती कुछ मरीज, जेल में बंद कैदी, विदेश में तैनात इजराइली राजनयिक और निर्धारित परिस्थितियों में दूसरे केंद्र पर मतदान करने वाले दिव्यांग मतदाता शामिल हो सकते हैं।

इस प्रक्रिया में मतदाता का मतपत्र एक छोटे लिफाफे में रखा जाता है, जिसे पहचान संबंधी जानकारी वाले दूसरे लिफाफे में बंद किया जाता है। अधिकारी पहले यह जांचते हैं कि संबंधित व्यक्ति ने पहले कहीं और मतदान तो नहीं किया। सत्यापन के बाद बाहरी लिफाफा हटाकर अंदर के मतपत्र को गिनती में शामिल किया जाता है, जिससे मतदान की गोपनीयता बनी रहती है।

क्या बहुमत जुटा पाएंगे नेतन्याहू?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि शुरुआती बढ़त को नेतन्याहू गठबंधन बहुमत में बदल पाएगा या नहीं। 61 सीटों के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे दूसरे दलों का साथ चाहिए होगा। विपक्ष भी अपनी रणनीति के जरिए सरकार गठन की संभावनाएं तलाश सकता है।

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