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यूपी में विधायकों को विधायक निधि की दूसरी किस्त 1242.50 करोड़ जारी, विकास कार्यों में आएगी तेजी

यूपी में विधायकों को विधायक निधि की दूसरी किस्त 1242.50 करोड़ जारी, विकास कार्यों में आएगी तेजी

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विकास कार्यों को रफ्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष की विधायक निधि की दूसरी और अंतिम किस्त जारी कर दी है। इसके तहत विधानसभा और विधान परिषद सदस्यों के क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों से जुड़े विकास कार्यों के लिए करीब 1,242.50 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।

397 विधायकों और 99 एमएलसी को मिलेगा पैसा
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की मंजूरी के बाद ग्राम्य विकास विभाग ने धनराशि जारी करने से संबंधित शासनादेश जारी किया है। मौजूदा व्यवस्था के तहत प्रदेश के प्रत्येक विधायक और विधान परिषद सदस्य को सालाना 5 करोड़ रुपये की विधायक निधि मिलती है। यह राशि दो किस्तों में, 2.5-2.5 करोड़ रुपये के हिसाब से जारी की जाती है। इस बार विधानसभा के 397 सदस्यों और विधान परिषद के 99 सदस्यों के लिए दूसरी किस्त जारी की गई है। विधानसभा की 403 सीटों में छह स्थान खाली हैं, जबकि विधान परिषद की 100 सीटों में एक पद रिक्त है। रिक्त सीट वाले क्षेत्र की निधि कोषागार से नहीं निकाली जाएगी।

सड़क, नाली और पेयजल जैसे कामों को मिलेगी गति
विधायक निधि का इस्तेमाल क्षेत्र की स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर विकास कार्यों में किया जाएगा। इसमें सड़क निर्माण और मरम्मत, नालियों की व्यवस्था, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सामुदायिक सुविधाओं और सार्वजनिक उपयोग से जुड़े काम शामिल हैं। सरकार का मानना है कि चुनाव से पहले निधि जारी होने से जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों में जरूरी कार्य कराने में सुविधा होगी और कई लंबित विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

प्रस्ताव के आधार पर खर्च होगी धनराशि
सरकार ने विधायक निधि के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट प्रक्रिया भी तय की है। संबंधित विधायक और विधान परिषद सदस्य अपने क्षेत्र में कराए जाने वाले कार्यों के प्रस्ताव देंगे। इन्हीं प्रस्तावों के आधार पर धनराशि जारी कर विकास कार्य कराए जाएंगे। काम के अनुसार देय राशि जीएसटी सहित खाते से निकाली जाएगी और संबंधित डीआरडीए के डिपॉजिट खाते में स्थानांतरित की जाएगी।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निधि का इस्तेमाल पारदर्शिता, गुणवत्ता और तय समयसीमा के भीतर किया जाए। उन्होंने लापरवाही से बचने और विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।

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