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Paper leak पर संसद में नया संशोधन बिल! जेल, जुर्माने के साथ दोषियों से होगी परीक्षा खर्च की भरपाई

Paper leak पर संसद में नया संशोधन बिल! जेल, जुर्माने के साथ दोषियों से होगी परीक्षा खर्च की भरपाई

देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में Paper leak की लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से सरकार ने पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश कर दिया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के हंगामे के बीच इस विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। सरकार का कहना है कि नए संशोधन के जरिए पेपर लीक माफियाओं, फर्जी परीक्षा नेटवर्क और इसमें शामिल संस्थाओं के खिलाफ पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

पेपर लीक के दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा प्रक्रिया में धोखाधड़ी करने या इस तरह की साजिश में शामिल पाया जाता है, तो उसे 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। इसके अलावा दोषियों से संबंधित परीक्षा आयोजित कराने में सरकार द्वारा हुआ पूरा खर्च भी वसूला जाएगा। इतना ही नहीं, दोषी व्यक्ति को आठ वर्षों तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलेगी। पहले लागू प्रावधानों में अधिकतम एक करोड़ रुपये का जुर्माना और चार साल तक परीक्षा से प्रतिबंध का प्रावधान था। नए संशोधन में इन सज़ाओं को कई गुना सख्त किया गया है।

सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों और कोचिंग संस्थानों पर भी शिकंजा
सरकार ने केवल व्यक्तिगत अपराधियों तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। यदि किसी परीक्षा से जुड़ी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं में दोषी पाई जाती है, तो उसे आठ वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा। यदि कंपनी के निदेशक, प्रबंधक या अन्य जिम्मेदार अधिकारी अपराध में शामिल पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान होगा। वहीं, यदि किसी कोचिंग संस्थान की भूमिका पेपर लीक में सामने आती है, तो उसकी संपत्ति तक जब्त की जा सकती है। सरकार का मानना है कि इससे परीक्षा माफियाओं के आर्थिक नेटवर्क पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

बनेगी स्पेशल टास्क फोर्स
नए विधेयक में जांच प्रक्रिया को भी तेज और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत सीबीआई या विशेष जांच दल (SIT) को ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। साथ ही केंद्र सरकार को आवश्यकता पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार भी मिलेगा, ताकि पेपर लीक से जुड़े संगठित गिरोहों पर तेजी से कार्रवाई की जा सके।

प्रधानमंत्री ने हाई पावर कमेटी का किया ऐलान
विधेयक पेश होने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। प्रधानमंत्री ने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय हाई पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा भी की। यह समिति परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग, पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को सुझाव देगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था भी शुरू की है ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके।

संसद में विपक्ष का विरोध
हालांकि सरकार इस विधेयक को परीक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन विपक्ष ने इसे लेकर अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। संसद भवन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में INDIA ब्लॉक की बैठक हुई, जिसमें विपक्षी दलों ने विधेयक पर अपने रुख और संसद में आगे की रणनीति पर चर्चा की। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही कई बार स्थगित भी करनी पड़ी। बावजूद इसके सरकार ने लोकसभा में विधेयक पेश करने की प्रक्रिया पूरी कर ली।

परीक्षा प्रणाली में भरोसा लौटाने की कोशिश
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित किया है। ऐसे में सरकार का दावा है कि यह संशोधन केवल दंड बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक व्यापक पहल है। यदि यह विधेयक संसद से पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और संगठित नकल गिरोहों के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानूनी ढांचा लागू होगा। इससे ईमानदार अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होने और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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