Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाला यह उत्सव कई घरों और सार्वजनिक पंडालों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। भक्त गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
घर में गणेश जी की स्थापना करने से पहले प्रतिमा के स्वरूप को लेकर कई सवाल मन में आते हैं। खासतौर पर गणेश जी की सूंड किस दिशा में मुड़ी होनी चाहिए, प्रतिमा में मूषक होना जरूरी है या नहीं और किस रंग की प्रतिमा को शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु से जुड़ी परंपराओं में इन बातों का विशेष महत्व बताया गया है।
घर के लिए कैसी गणेश प्रतिमा मानी जाती है शुभ?
मान्यताओं के अनुसार, घर में गणेश जी की स्थापना करते समय शांत, सौम्य और सुंदर स्वरूप वाली प्रतिमा का चयन करना चाहिए। प्रतिमा का चेहरा प्रसन्न मुद्रा में हो और वह किसी भी तरह से खंडित या टूटी हुई न हो। गणेश जी की चार भुजाओं वाली प्रतिमा को भी पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इनमें पाश और अंकुश जैसे प्रतीक भगवान गणेश की शक्तियों और नियंत्रण का संकेत देते हैं, जबकि मोदक प्रसन्नता और अभय मुद्रा सुरक्षा व आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है।
बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी क्यों माने जाते हैं शुभ?
गणेश जी की सूंड की दिशा को लेकर धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। घर में स्थापना के लिए आमतौर पर बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा को शुभ माना जाता है। इन्हें वाममुखी गणपति कहा जाता है। मान्यता है कि इस स्वरूप की पूजा करने से घर में सकारात्मक वातावरण, सुख और समृद्धि बनी रहती है। हालांकि, गणेश प्रतिमा की सूंड की दिशा से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं में भिन्न भी हो सकती हैं।
दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति का क्या महत्व है?
दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को दक्षिणमुखी गणपति कहा जाता है। धार्मिक परंपराओं में इस स्वरूप को विशेष विधि-विधान और अनुशासन से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए सामान्य घरेलू पूजा के लिए प्रतिमा चुनते समय लोग अक्सर बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को प्राथमिकता देते हैं।
गणेश जी के साथ मूषक होना क्यों जरूरी है?
भगवान गणेश का वाहन मूषक है। इसलिए गणेश जी की प्रतिमा खरीदते समय यह भी देखना चाहिए कि उसके साथ मूषक की आकृति मौजूद हो। धार्मिक मान्यताओं में गणपति और उनके वाहन का साथ होना प्रतिमा को पूर्ण स्वरूप प्रदान करने वाला माना जाता है।
किस रंग की गणेश प्रतिमा लाएं?
गणेश जी की प्रतिमा के रंग को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सफेद रंग को शांति और समृद्धि से जोड़ा जाता है, जबकि सिंदूरी रंग की गणेश प्रतिमा को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पीले रंग को पवित्रता और मानसिक शांति से तथा हरे रंग को सुख-सुविधा और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
प्रतिमा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा खरीदते समय उनके स्वरूप के साथ सामग्री पर भी ध्यान देना चाहिए। पर्यावरण की दृष्टि से मिट्टी और प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प हो सकता है। प्रतिमा साफ-सुथरी, सुंदर और बिना किसी टूट-फूट के होनी चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गणपति स्थापना श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाए। धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना गया है, इसलिए गणेश चतुर्थी पर उनकी पूजा भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है।

