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पितृ अमावस्या पर करें ये 5 काम, पितरों की कृपा से जीवन में आ सकती है सुख-शांति

पितृ अमावस्या पर करें ये 5 काम, पितरों की कृपा से जीवन में आ सकती है सुख-शांति

पितृ अमावस्या 2026: हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। पितृपक्ष का समापन आश्विन कृष्ण अमावस्या के दिन होता है, जिसे सर्व पितृ अमावस्या या पितृ अमावस्या कहा जाता है। साल 2026 में यह तिथि 10 अक्टूबर को पड़ रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्व पितृ अमावस्या का दिन उन सभी पूर्वजों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश न किया जा सका हो। इस दिन कुछ विशेष धार्मिक उपाय करने से पितरों का स्मरण और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की मान्यता है।

1. पितरों के नाम का करें मंत्र जाप
इस दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पितरों का ध्यान करें और श्रद्धा के साथ मंत्रों का जाप करें। मान्यता है कि पितरों को समर्पित मंत्रों के जाप से मन को शांति मिलती है। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार पितृ चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है –
ॐ पितृभ्यः नमः।
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।

2. विधि-विधान से करें तर्पण
सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण किया जाता है। जल में काले तिल, कुश, अक्षत और दूध मिलाकर पितरों का स्मरण करते हुए अर्पित करें। तर्पण करते समय श्रद्धा और भाव को विशेष महत्व दिया जाता है।

3. पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक
धार्मिक मान्यताओं में पीपल के वृक्ष को पितरों से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इस दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करने के साथ सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। ऐसा करते समय अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करें।

4. जरूरतमंदों को अन्न का दान करें
पितृ अमावस्या पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अन्न का दान करें। इसके अलावा गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए भोजन निकालना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जीवों को अन्न देने से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है।

5. घर की दक्षिण दिशा में जलाएं चौमुखी दीपक
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। इसलिए अमावस्या की शाम घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाया जा सकता है। दीपक जलाते समय पूर्वजों को याद करें और जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

कर सकते हैं उपाय
जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति सभी उपाय कर पाए। अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार इनमें से किसी एक उपाय को भी पूरे भाव से करना महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से किए गए श्राद्ध, तर्पण, दान और स्मरण से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है।

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