Made in India: दुनिया इस समय तेजी से बदल रहे जियोपॉलिटिकल समीकरणों के दौर से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर मिडिल ईस्ट के संघर्ष और दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव तक, सुरक्षा को लेकर देशों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, साइबर वॉरफेयर और आधुनिक मिसाइल तकनीक ने युद्ध की तस्वीर भी बदल दी है। ऐसे में बड़ी सैन्य ताकत हासिल करने के साथ-साथ अपने हथियार दूसरे देशों को बेचने की होड़ भी तेज हो गई है।
यही कारण है कि दुनिया के तमाम देश रक्षा बजट बढ़ा रहे हैं और ग्लोबल डिफेंस मार्केट लगातार विस्तार कर रहा है। लेकिन इसी बाजार से जुड़ा एक आंकड़ा भारत के लिए चौंकाने वाला है। रक्षा निर्यात के मामले में भारत अभी भी पाकिस्तान से पीछे दिखाई देता है। सवाल यह है कि जिस देश के पास ब्रह्मोस जैसी मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और पिनाका जैसे आधुनिक हथियार हैं, वह ग्लोबल एक्सपोर्ट रैंकिंग में पाकिस्तान से पीछे कैसे रह गया?
डिफेंस एक्सपोर्ट में पाकिस्तान आगे कैसे?
स्वीडन स्थित थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक हथियार निर्यात में पाकिस्तान की हिस्सेदारी करीब 0.4 फीसदी है और वह भारत से ऊपर स्थान पर है। दूसरी तरफ भारत की हिस्सेदारी करीब 0.2 फीसदी बताई गई है। पहली नजर में यह आंकड़ा भारत के लिए निराशाजनक लग सकता है, लेकिन इसके पीछे दोनों देशों की रक्षा नीति और हथियारों के उत्पादन का अंतर समझना जरूरी है।
पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपोर्ट में चीन की भूमिका काफी अहम मानी जाती है। पाकिस्तान और चीन मिलकर JF-17 थंडर लड़ाकू विमान तैयार करते हैं। इन विमानों की बिक्री दूसरे देशों को होने पर उसका हिस्सा पाकिस्तान के रक्षा निर्यात में भी दिखाई देता है। म्यांमार, नाइजीरिया और अजरबैजान जैसे देश पाकिस्तान से जुड़े इस रक्षा प्लेटफॉर्म के खरीदार रहे हैं।
इसके अलावा चीन के कम लागत वाले हथियारों की मांग भी कई विकासशील देशों में बनी हुई है। पाकिस्तान चीन के साथ अपने रक्षा सहयोग का फायदा उठाकर इन बाजारों तक पहुंच बनाता है। यही वजह है कि कम कीमत और अपेक्षाकृत आसान उपलब्धता वाले हथियारों के बाजार में पाकिस्तान को बढ़त मिलती है।
भारत क्या रणनीति है?
भारत लंबे समय तक अपनी सेना की जरूरतें पूरी करने के लिए विदेशों से हथियार खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है। यानी दशकों तक देश का फोकस रक्षा उपकरण बेचने से ज्यादा अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने पर रहा। अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। सरकार ने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता पर जोर बढ़ाया है। इसका असर रक्षा निर्यात के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 23,622 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात दर्ज किया था, जो देश के रक्षा निर्यात में लगातार बढ़ती क्षमता को दिखाता है। भारत अब हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि आधुनिक सैन्य तकनीक का निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ब्रह्मोस से आकाश तक, दुनिया में बढ़ रही मांग
भारत के रक्षा निर्यात की पहचान अब कई आधुनिक हथियार प्रणालियों से बनने लगी है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। फिलीपींस को ब्रह्मोस की बिक्री ने भारतीय रक्षा उद्योग की वैश्विक पहचान को मजबूत किया है। इसके अलावा इंडोनेशिया के साथ भी ब्रह्मोस को लेकर बातचीत और सौदे की संभावनाएं भारत के लिए बड़ा बाजार खोल रही हैं। आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म भी विदेशी ग्राहकों का ध्यान खींच रहे हैं। अर्मेनिया भारत से रक्षा उपकरण खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है और भारतीय हथियारों की पहुंच अब एशिया से आगे दूसरे क्षेत्रों तक भी बढ़ रही है।
अमेरिका और फ्रांस भी भारत के बाज़ार
भारत के रक्षा निर्यात मिसाइल और तोपों के साथ दुनिया की बड़ी रक्षा कंपनियों और देशों के साथ भारत का डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क भी तेजी से मजबूत हो रहा है। अमेरिका और फ्रांस जैसे देश भारत से विमान के पुर्जे, फ्यूजलेज, विशेष मिश्र धातु, इलेक्ट्रॉनिक सब-सिस्टम और रक्षा क्षेत्र से जुड़े हाई-टेक कंपोनेंट्स खरीद रहे हैं। इससे साफ है कि भारत की भूमिका अब केवल हथियार बेचने वाले देश की नहीं, बल्कि ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी विकसित हो रही है।
पाकिस्तान से आगे निकलने की चुनौती
भारत के लिए असली चुनौती अब सिर्फ पाकिस्तान को पीछे छोड़ना नहीं है। लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है – भारत को दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में शामिल करना। इसके लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने, हथियारों की कीमत प्रतिस्पर्धी रखने, डिलीवरी तेज करने और विदेशी देशों के साथ लंबे समय के रक्षा समझौते मजबूत करने की जरूरत होगी। भारत की रक्षा निर्यात यात्रा अभी शुरुआती दौर में जरूर है, लेकिन ब्रह्मोस, आकाश, पिनाका और स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी तकनीकों ने संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्षों में ‘Made in India’ हथियारों की वैश्विक मौजूदगी और मजबूत हो सकती है।
यानी आज भले ही आंकड़ों में पाकिस्तान भारत से आगे नजर आ रहा हो, लेकिन बदलती तस्वीर यह बताती है कि भारत अब हथियारों का बड़ा खरीदार बनने के बजाय दुनिया के बड़े रक्षा सप्लायर बनने की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

