• info@thevaarta.com

मेडिकल स्टोर तक पहुंचने से पहले ही बदल गया खेल, लखनऊ से गुजरात तक नकली दवाओं की सप्लाई ने बढ़ाई चिंता

मेडिकल स्टोर तक पहुंचने से पहले ही बदल गया खेल, लखनऊ से गुजरात तक नकली दवाओं की सप्लाई ने बढ़ाई चिंता

नकली दवाओं का कारोबार मरीजों की सेहत के लिए खतरा तो है ही, साथ में यह एक ऐसा नेटवर्क है जिसमें दवा की खरीद से लेकर सप्लाई और मेडिकल स्टोर तक पहुंचाने की पूरी कड़ी शामिल हो सकती है। अहमदाबाद में नकली ब्लड प्रेशर की दवा पकड़े जाने के बाद अब जांच का एक अहम सिरा लखनऊ से जुड़ता नजर आ रहा है। पुलिस के मुताबिक, नकली NICARDIA RETARD 10 की सप्लाई लखनऊ के रास्ते गुजरात तक पहुंची थी। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ताओं के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि इस नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दवा मरीज के हाथ में पहुंचने से पहले कई स्तरों से गुजरती है। अगर इनमें से किसी एक स्तर पर असली दवा की जगह नकली या संदिग्ध दवा आ जाए तो उसका सीधा असर मरीज के इलाज पर पड़ सकता है।

अहमदाबाद केस के बाद लखनऊ पर क्यों टिकी नजर?
अहमदाबाद में हुई कार्रवाई में नकली BP की दवा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने के बाद लखनऊ की सप्लाई चेन जांच के केंद्र में आ गई है। जांच के मुताबिक, नकली दवा की खेप लखनऊ से गुजरात पहुंची। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दवा तैयार कहां हुई, उसे असली दवा जैसा दिखाने के लिए पैकेजिंग और बैच नंबर का इस्तेमाल कैसे किया गया और सप्लाई नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।

अहमदाबाद में करीब 1200 स्ट्रिप पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 1500 स्ट्रिप पहले ही बिक जाने की बात भी जांच में सामने आई है। ऐसे में मामला केवल जब्त की गई दवाओं तक सीमित नहीं रह जाता। जांच का अगला चरण उन मेडिकल स्टोर और खरीदारों तक पहुंच सकता है, जहां से संदिग्ध दवा मरीजों तक पहुंची।

लखनऊ में पहले से संदिग्ध दवाओं पर कार्रवाई
जुलाई और अगस्त के दौरान लखनऊ में दवा कारोबार से जुड़े कई मामलों में जांच और कार्रवाई हुई। अलग-अलग मामलों में BP, गैस, दर्द, बुखार और एंटीबायोटिक जैसी दवाओं के संदिग्ध स्टॉक सामने आने की बात कही गई है। कुछ मामलों में दवाओं की पैकेजिंग, बिल और सप्लाई से जुड़ी अनियमितताएं भी जांच के दायरे में आईं। ऐसे में अहमदाबाद मामले के बाद इन घटनाओं को एक साथ देखकर जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि कहीं इनके बीच कोई सप्लाई लिंक तो नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि लखनऊ केवल दवा भेजने का रास्ता था या यहां से दूसरे राज्यों में सप्लाई करने वाला कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है।

एक खेप से कई शहरों तक पहुंच सकता है खतरा
नकली दवा का सबसे बड़ा खतरा यह है कि एक बार सप्लाई चेन में शामिल होने के बाद वह सिर्फ एक दुकान या एक शहर तक सीमित नहीं रहती। अहमदाबाद मामले में भी यही चिंता सामने आई है। जब्त दवाओं के अलावा पहले बिक चुकी स्ट्रिप के कारण यह पता लगाना जरूरी हो जाता है कि वे दवाएं किन लोगों तक पहुंचीं। जांच एजेंसियों के सामने अब दवा के स्रोत, सप्लायर, डिस्ट्रीब्यूटर और मेडिकल स्टोर की कड़ी जोड़ने की चुनौती है। लखनऊ और जयपुर समेत कई जगहों पर जांच आगे बढ़ने की जानकारी सामने आई है।

BP की नकली दवा कितनी खतरनाक?
ब्लड प्रेशर की दवा में सक्रिय घटक कम हो, ज्यादा हो या उसकी जगह कोई दूसरा पदार्थ मौजूद हो, तो मरीज के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। अगर दवा प्रभावी नहीं है तो BP नियंत्रित नहीं होगा और लंबे समय तक हाई BP रहने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।

वहीं अगर किसी नकली दवा में BP कम करने वाला पदार्थ गलत मात्रा में मौजूद है तो चक्कर, कमजोरी या बहुत कम ब्लड प्रेशर जैसी परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि संदिग्ध दवाओं की पहचान और उनकी सप्लाई रोकना बेहद महत्वपूर्ण है।

ये 10 दवाएं भी जांच के दायरे में
दिए गए विवरण के मुताबिक, Telma-H, Flozen-AA, Moxzide-CV 625 LB, Pantop 40, Riopod-CV, Clavam 625, Calpic, L-Cin, Chymoral Forte और Rasody जैसी दवाओं के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि, किसी विशेष ब्रांड या बैच को नकली मानने से पहले संबंधित दवा की आधिकारिक जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट जरूरी होती है।

Telma-H हाई BP नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल होती है। नकली या कम प्रभावी दवा से BP नियंत्रित न होने का खतरा रहता है। Flozen-AA दर्द और सूजन के लिए इस्तेमाल होती है, जबकि गलत घटक होने पर एलर्जी या अन्य प्रतिकूल असर हो सकते हैं।

Moxzide-CV 625 LB, Riopod-CV और Clavam 625 एंटीबायोटिक दवाओं की श्रेणी में आती हैं। इनके नकली या अपर्याप्त प्रभाव वाले होने पर संक्रमण ठीक नहीं हो सकता और गलत इस्तेमाल से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ सकती है।

Pantop 40 और Rasody एसिडिटी, गैस और सीने में जलन जैसे लक्षणों में इस्तेमाल की जाती हैं। संदिग्ध दवा से लक्षणों में राहत न मिलने के साथ मूल बीमारी के इलाज में भी देरी हो सकती है।

Calpic दर्द और बुखार में इस्तेमाल होती है, जबकि गलत मात्रा या गलत घटक होने पर नुकसान का खतरा हो सकता है। L-Cin एलर्जी के लक्षणों में इस्तेमाल होती है और गलत घटक होने पर प्रतिकूल प्रतिक्रिया की आशंका रहती है। Chymoral Forte सूजन और दर्द कम करने के लिए इस्तेमाल की जाती है; नकली दवा की स्थिति में अपेक्षित राहत न मिलने के साथ अप्रत्याशित साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

मरीज कैसे करें संदिग्ध दवा की पहचान?
सिर्फ गोली देखकर यह तय करना मुश्किल है कि दवा असली है या नकली। इसलिए पैकेट पर बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी तारीख, निर्माता का नाम, लाइसेंस संबंधी जानकारी और पैकेजिंग को ध्यान से देखना चाहिए। अगर पैकिंग में प्रिंटिंग की गलती, सील में छेड़छाड़, असामान्य रंग या कीमत में असामान्य अंतर दिखाई दे तो सावधानी बरतनी चाहिए। मेडिकल स्टोर से दवा खरीदते समय बिल लेना भी जरूरी है, क्योंकि किसी शिकायत या जांच की स्थिति में यह खरीद का रिकॉर्ड उपलब्ध कराता है। सबसे अहम बात यह है कि किसी नियमित दवा पर शक होने पर मरीज उसे अपने मन से बंद न करें। डॉक्टर या योग्य फार्मासिस्ट से सलाह लेकर दवा और उसके बैच की पुष्टि कराएं।

लखनऊ की सप्लाई चेन से हो सकता है कनेक्शन
अहमदाबाद की कार्रवाई ने नकली दवाओं के नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर जांच में लखनऊ से गुजरात तक सप्लाई की पुष्टि होती है तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस नेटवर्क में कितने लोग और कितने शहर जुड़े हुए हैं। फिलहाल जांच का फोकस दवा के स्रोत से लेकर सप्लायर और मेडिकल स्टोर तक पहुंचने वाली पूरी कड़ी पर है। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि यह मामला कुछ लोगों तक सीमित था या इसके पीछे नकली दवाओं की एक बड़ी सप्लाई चेन काम कर रही थी। इस बीच मरीजों और दवा खरीदने वालों के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि दवा खरीदते समय सतर्क रहें और संदिग्ध दवा मिलने पर उसे बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल न करें।

Related Articles

Leave a Reply