काठमांडू। नेपाल और तिब्बत में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। सीमा पार से आई इस विनाशकारी बाढ़ ने कुछ ही समय में कई इलाकों की तस्वीर बदल दी। नेपाल के रसुवा क्षेत्र से लेकर चीन के तिब्बत स्थित कीरोंग तक बाढ़ ने जान-माल को भारी नुकसान पहुंचाया है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि नेपाल और चीन में करीब 1400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लगातार बचाव कार्य चल रहा है जिससे इन आंकड़ों में बढ़ोतरी होने की भी संभावना है।
आपदा के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों तक पहुंचना, प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और बाढ़ से कट चुके क्षेत्रों में जरूरी मदद पहुंचाना है।
कैसे शुरू हुई नेपाल में तबाही?
घटना का केंद्र नेपाल का रसुवा क्षेत्र और चीन के तिब्बत का कीरोंग इलाका रहा। तिब्बत की ओर ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया। देखते ही देखते बाढ़ ने नदी के बहाव को बेहद खतरनाक बना दिया। सीमा पार बहने वाली बाढ़ आगे बढ़ते हुए नेपाल की भोटेकोशी नदी तक पहुंची। तेज पानी के बहाव ने रास्ते में आने वाले इलाकों, बुनियादी ढांचे और कई परियोजनाओं को प्रभावित किया। अचानक आई इस बाढ़ के कारण लोगों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका और बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए।
नेपाल में 826 लोग संपर्क से बाहर
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ के बाद करीब 826 लोग संपर्क से बाहर हैं। इनमें अकेले 579 पर्यटक शामिल बताए गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपदा का असर स्थानीय आबादी पर हुआ है, साथ ही नेपाल घूमने पहुंचे विदेशी नागरिक भी इसकी चपेट में आए हैं।
लापता लोगों में सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक 85 नेपाली सुरक्षाकर्मियों का अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। इनमें नेपाल सेना के 44 जवान, विभिन्न पुलिस चौकियों पर तैनात नेपाल पुलिस के 28 जवान और आपदा प्रभावित क्षेत्र में तैनात सशस्त्र पुलिस बल के 13 जवान शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा अलग-अलग हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले 162 कर्मचारियों के बारे में भी जानकारी नहीं मिल सकी है। राहत एजेंसियां और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में तलाश अभियान चला रहे हैं।
300 से ज्यादा भारतीयों के लापता होने की पुष्टि
नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटकों और नागरिकों के मौजूद होने के कारण भारत के लिए भी यह आपदा चिंता का विषय बन गई है। इस हादसे में करीब 160 लोगों की मौत हो गई और नेपाल के विदेश मंत्रालय की ओर से 300 से ज्यादा भारतीयों के लापता होने की पुष्टि किए जाने की जानकारी सामने आई है। नेपाल सरकार ने कहा है कि विदेशी नागरिकों समेत सैकड़ों लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
चीन के तिब्बत में भी भारी नुकसान
नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ ने गंभीर असर डाला है। तिब्बत में करीब 588 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह नेपाल और तिब्बत को मिलाकर लापता लोगों का आंकड़ा 1400 के पार पहुंच जाता है। तिब्बत के कीरोंग इलाके से शुरू हुई तबाही का असर सीमा पार नेपाल तक पहुंचा। ग्लेशियर से अचानक बड़ी मात्रा में पानी आने के कारण नदी का जलस्तर और बहाव तेजी से बढ़ा, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और वहां मौजूद परियोजनाओं के लिए खतरा पैदा हुआ।
क्या भूकंप की वजह से टूटा था ग्लेशियर?
आपदा के शुरुआती घंटों में यह आशंका जताई जा रही थी कि शायद भूकंप के कारण ग्लेशियर टूटा और उसके बाद अचानक बाढ़ आई। इस वजह से लोगों के बीच भूकंप को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रही। हालांकि यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार इस घटना की वजह कोई भूकंप नहीं था। ग्लेशियर टूटने के दौरान पैदा हुए कंपन को भूकंप समझ लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार ग्लेशियर टूटने से उत्पन्न भूकंपीय कंपन की तीव्रता करीब 5.2 मापी गई। यानी जिस घटना को शुरुआती तौर पर संभावित भूकंप से जोड़कर देखा जा रहा था, उसका वास्तविक कारण ग्लेशियर का टूटना और उसके बाद अचानक आया भारी जलप्रवाह था। यही अचानक आई बाढ़ इस पूरे संकट की सबसे बड़ी वजह बनी।
अभी क्या है हालात?
फिलहाल नेपाल और तिब्बत में सबसे बड़ा फोकस राहत और बचाव अभियान पर है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों में तलाश अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि लापता लोग कहां हैं और किन इलाकों में लोग अभी भी फंसे हुए हैं। नेपाल में विदेशी पर्यटकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। विशेष रूप से भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर के बाद उनकी जानकारी जुटाने और परिवारों से संपर्क स्थापित करने की कोशिशें महत्वपूर्ण हो गई हैं।
आपदा ने फिर दिखाया हिमालयी क्षेत्रों का खतरा
नेपाल और तिब्बत में हुई यह त्रासदी एक बार फिर बताती है कि हिमालयी क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से कितना संवेदनशील है। ग्लेशियर टूटने जैसी घटनाएं बेहद तेजी से बाढ़ का रूप ले सकती हैं और कुछ ही समय में बड़े क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इस घटना में सबसे बड़ा सवाल अब लापता लोगों की सुरक्षित तलाश का है। राहत दलों के सामने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने और अधिक से अधिक लोगों को बचाने की चुनौती है। वहीं सरकारों के सामने मृतकों और लापता लोगों की सही संख्या का पता लगाने, प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं के खतरे को कम करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

