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ईंटें बनेंगी बिजली की बैटरी! 2,400°C की गर्मी से बिजली स्टोर करने की अनोखी टेक्नोलॉजी

ईंटें बनेंगी बिजली की बैटरी! 2,400°C की गर्मी से बिजली स्टोर करने की अनोखी टेक्नोलॉजी

सोचिए, जिस ईंट का इस्तेमाल हम घर और इमारत बनाने में करते हैं, वही ईंट बिजली को स्टोर करके जरूरत पड़ने पर वापस ऊर्जा में बदलने लगे! सुनने में यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन ऊर्जा भंडारण की दुनिया में ऐसी तकनीक पर तेजी से काम हो रहा है। MIT से जुड़े इंजीनियरों की सोच से विकसित इस तकनीक में ग्रेफाइट से बनी खास ईंटों को बेहद ऊंचे तापमान तक गर्म करके उन्हें एक तरह की थर्मल बैटरी में बदलने की कोशिश की जा रही है।

इस तकनीक को डीप-टेक कंपनी Fourth Power विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य अतिरिक्त बिजली को बैटरी की तरह रासायनिक रूप से स्टोर करने के बजाय उसे अत्यधिक गर्मी के रूप में सुरक्षित रखना है। जरूरत पड़ने पर इसी गर्मी को दोबारा बिजली में बदला जा सकता है।

2,400°C तक गर्म होती हैं ग्रेफाइट की ईंटें
इस सिस्टम में ग्रेफाइट की ईंटों को इलेक्ट्रिक हीटिंग एलिमेंट्स की मदद से करीब 2,400 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है। इतना ज्यादा तापमान होने पर ग्रेफाइट सफेद-गर्म दिखाई देने लगता है और उससे बेहद तेज तापीय विकिरण निकलता है। जब ग्रिड पर बिजली की मांग कम होती है और अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध होती है, तब इसी अतिरिक्त बिजली का इस्तेमाल ईंटों को गर्म करने में किया जाता है। यानी उस समय खर्च होने वाली अतिरिक्त बिजली को भविष्य के लिए गर्मी के रूप में सुरक्षित कर लिया जाता है।

गर्मी को वापस बिजली में कैसे बदला जाता है?
अब असली तकनीकी कमाल तब सामने आता है जब बिजली की जरूरत पड़ती है। सिस्टम में गर्म ग्रेफाइट से ऊर्जा निकालने के लिए लिक्विड टिन का इस्तेमाल किया जाता है। टिन को बेहद ऊंचे तापमान पर गर्म करके ग्रेफाइट संरचना के भीतर प्रवाहित किया जाता है। इसके बाद यह गर्म टिन और ग्रेफाइट से निकलने वाली तेज रोशनी को TPV यानी थर्मोफोटोवोल्टाइक सेल्स बिजली में बदलते हैं। सामान्य सोलर पैनल सूर्य की रोशनी से बिजली बनाते हैं, जबकि TPV तकनीक बेहद गर्म वस्तुओं से निकलने वाले थर्मल विकिरण को विद्युत ऊर्जा में बदल सकती है। इस तरह पहले अतिरिक्त बिजली से गर्मी तैयार की जाती है और बाद में उसी गर्मी को फिर बिजली में बदला जाता है।

पुराने सिस्टम की समस्या का समाधान
इतने ज्यादा तापमान पर किसी भी सामान्य धातु के पाइप को लंबे समय तक सुरक्षित रखना बेहद मुश्किल होता है। Fourth Power ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सिस्टम में ग्रेफाइट आधारित पाइप और लिक्विड टिन का इस्तेमाल किया है। कंपनी के अनुसार, टिन और कार्बन के बीच इस सिस्टम की परिस्थितियों में अनुकूलता इस डिजाइन का अहम हिस्सा है। ग्रेफाइट उच्च तापमान को संभाल सकता है और सिस्टम को नियंत्रित वातावरण में रखा जाता है, जिससे लंबे समय तक संचालन की संभावना बढ़ती है।

अधिक ऊर्जा स्टोर करने का दावा
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी पावर डेंसिटी बताई जा रही है। Fourth Power के अनुसार, इसका सिस्टम करीब 100 मेगावॉट प्रति एकड़ तक की पावर डेंसिटी हासिल करने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि कुछ पारंपरिक थर्मल स्टोरेज सिस्टम इससे काफी कम स्तर पर रहते हैं। कंपनी यह भी बताती है कि सिस्टम में गर्मी का नुकसान बेहद कम रखा जा सकता है। यही वजह है कि यह तकनीक कई घंटों तक बिजली की जरूरत पूरी करने वाले लॉन्ग-ड्यूरेशन एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के रूप में उपयोगी हो सकती है।

डेटा सेंटर से लेकर ग्रिड तक हो सकता है इस्तेमाल
AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के विस्तार के साथ डेटा सेंटरों की बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में ऐसी तकनीकें महत्वपूर्ण हो सकती हैं, जो नवीकरणीय ऊर्जा से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकें और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध करा सकें। हालांकि, तकनीक के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। लिक्विड टिन की बड़ी मात्रा में उपलब्धता, सप्लाई चेन, लागत और बड़े पैमाने पर सिस्टम को व्यावसायिक रूप से चलाना अभी महत्वपूर्ण सवाल हैं।

Fourth Power फिलहाल 1 MWh के इंटीग्रेटेड डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल साबित होती है, तो भविष्य में बिजली स्टोरेज की तस्वीर बदल सकती है – जहां बैटरी का मतलब सिर्फ लिथियम-आयन सेल नहीं, बल्कि हजारों डिग्री गर्म ग्रेफाइट की ईंटें भी हो सकती हैं।

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