नई दिल्ली। लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए भयावह कार धमाके की जांच में एक बार फिर बड़ा मोड़ सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN) की हालिया निगरानी रिपोर्ट में इस हमले को अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जोड़ा गया है। इस अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के सामने आने के बाद दिल्ली ब्लास्ट की जांच और इसके पीछे सक्रिय आतंकी नेटवर्क को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
लाल किले के पास धमाके ने मचाई थी सनसनी
10 नवंबर 2025 को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के नजदीक एक कार में जोरदार धमाका हुआ था। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) समेत कई केंद्रीय एजेंसियां जांच में जुटीं।
शुरुआती जांच के दौरान ही यह आशंका मजबूत होने लगी थी कि यह कोई सामान्य विस्फोट नहीं बल्कि सुनियोजित आतंकी साजिश हो सकती है। बाद में जांच का दायरा बढ़ता गया और संदिग्धों के संपर्क तथा आतंकी संगठनों से संभावित संबंधों की पड़ताल शुरू हुई।
UN की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति से जुड़ी निगरानी व्यवस्था की ताजा रिपोर्ट में AQIS की गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक संगठन अब पारंपरिक तरीके से एक जगह केंद्रित होकर काम करने के बजाय छोटे और विकेंद्रीकृत नेटवर्क के जरिए अपनी गतिविधियां संचालित करने की दिशा में बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में दक्षिण एशिया में AQIS की मौजूदगी और विशेष रूप से अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश से जुड़े उसके नेटवर्क को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि संगठन अपनी गतिविधियों के लिए अलग-अलग छोटे नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है।
NIA की जांच में भी सामने आया था AQIS कनेक्शन
दिल्ली ब्लास्ट मामले में NIA की जांच ने भी AQIS से जुड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया था। मई 2026 में एजेंसी ने मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ लगभग 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपियों के तार Ansar Ghazwat-ul-Hind (AGuH) से जुड़े थे, जिसे AQIS का एक ऑफशूट बताया गया है।
NIA की जांच में सामने आए इस नेटवर्क ने मामले को और गंभीर बना दिया था। जांच एजेंसी ने इसे ऐसे मॉड्यूल के तौर पर देखा, जिसमें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित लोग शामिल थे और जिनके संबंध AQIS से जुड़े संगठन से बताए गए।
पहले JeM का नाम भी आया था
इस मामले में अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग के दौरान अलग-अलग आतंकी संगठनों के संभावित संबंधों की बात सामने आती रही है। फरवरी 2026 की एक UN निगरानी रिपोर्ट में एक सदस्य देश की ओर से नवंबर 2025 के Red Fort हमले को Jaish-e-Mohammed (JeM) से जोड़ने की सूचना दर्ज की गई थी। हालांकि रिपोर्ट में अलग-अलग सदस्य देशों के आकलनों में अंतर भी सामने आया था। अब ताजा UN रिपोर्ट में AQIS से जुड़ा आकलन सामने आने के बाद जांच के अंतरराष्ट्रीय पहलू को और मजबूती मिली है।
आतंकी संगठनों की बदलती रणनीति पर भी चिंता
UN की रिपोर्ट सिर्फ दिल्ली हमले तक सीमित नहीं है। इसमें अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठनों की बदलती गतिविधियों को लेकर व्यापक चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में आतंकवादी संगठनों द्वारा नई तकनीक और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी ध्यान दिलाया गया है।
इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती और बड़ी हो जाती है, क्योंकि छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए काम करने वाले संगठनों की गतिविधियों का पता लगाना पारंपरिक आतंकी नेटवर्क की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है।
दिल्ली ब्लास्ट जांच अब किस दिशा में?
लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में अब तक सामने आए तथ्यों से संकेत मिलता है कि एजेंसियां घटना को अंजाम देने वाले लोगों के साथ इसके पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क और संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।
UN रिपोर्ट में AQIS का नाम सामने आने और NIA की जांच में AQIS से जुड़े संगठन के तार मिलने के बाद इस मामले का अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से संबंध और गंभीर हो गया है। हालांकि किसी भी अंतिम निष्कर्ष को जांच और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
लाल किले जैसे अत्यंत संवेदनशील और ऐतिहासिक स्थल के नजदीक हुआ यह हमला पहले ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर चुका था। अब संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने इस मामले को एक नया अंतरराष्ट्रीय संदर्भ दे दिया है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों की ओर से सामने आने वाली अतिरिक्त जानकारी यह स्पष्ट कर सकती है कि इस साजिश का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी।

