अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस बार सावन का झूलनोत्सव बेहद खास होने जा रहा है। राम मंदिर में करीब पांच सदियों के लंबे इतिहास के बाद रामलला के झूलनोत्सव की परंपरा में बदलाव किए जाने की तैयारी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस वर्ष झूलनोत्सव की शुरुआत नाग पंचमी के बजाय सावन शुक्ल तृतीया, यानी 15 अगस्त 2026 से की जाएगी। इससे राम मंदिर के धार्मिक आयोजनों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है।
रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद यह आयोजन पहले की तुलना में कहीं बड़े और व्यवस्थित स्वरूप में मनाया जाएगा। 15 अगस्त की शाम से शुरू होने वाला यह उत्सव करीब 12 दिनों तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को रामलला के विशेष झूला दर्शन का अवसर भी मिलेगा।
15 अगस्त से शुरू होगा झूलनोत्सव
जानकारी के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में झूलनोत्सव का शुभारंभ 15 अगस्त की शाम करीब सात बजे किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित धार्मिक कार्यक्रम के तहत 17 अगस्त को रामलला को गर्भगृह में विशेष रूप से सजाए गए झूले पर विराजमान कराया जाएगा।
इस दौरान श्रद्धालु लगभग 20 फीट की दूरी से रामलला के झूला दर्शन कर सकेंगे। आयोजन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए पहली बार झूलनोत्सव के लाइव प्रसारण की तैयारी की बात भी सामने आई है। इससे देश-दुनिया में बैठे श्रद्धालु भी इस विशेष अवसर से जुड़ सकेंगे।
चांदी के झूले पर होगा विशेष आयोजन
रामलला के झूलनोत्सव के लिए विशेष चांदी का झूला पहले ही तैयार कराया जा चुका है। वर्ष 2021 में रामलला के लिए चांदी का झूला तैयार कराया गया था। अब नए मंदिर में इस परंपरा को अधिक भव्य स्वरूप देने की तैयारी है।
उत्सव के दौरान मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा। हर दिन करीब दो घंटे तक भक्ति संगीत, रामभजन, शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किए जाने की योजना बताई जा रही है। इससे रामनगरी में सावन की धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक रंग भी दिखाई देगा।
सदियों का संघर्ष
राम जन्मभूमि का इतिहास लंबे समय तक विवाद और संघर्ष से जुड़ा रहा है। 16वीं शताब्दी, यानी 1528 में बाबर के शासनकाल के दौरान ही अयोध्या में स्थापित राम मंदिर को तोड़ा गया था। इसके बाद बाबर के कमांडर मीर बांकी ने इस पर एक ढांचे का निर्माण कराया गया था, जिसे बाद में बाबरी मस्जिद के नाम से जाना गया। इस स्थल को लेकर सदियों तक विवाद चलता रहा।
बदला रामलला के उत्सव का स्वरूप
साल 1992 के बाद रामलला को अस्थायी व्यवस्था में विराजमान रखा गया। उस दौर में सुरक्षा और न्यायिक परिस्थितियों के कारण धार्मिक आयोजनों का स्वरूप भी सीमित रहा। झूलनोत्सव के दौरान लकड़ी के साधारण झूले का इस्तेमाल किया जाता था और श्रद्धालुओं की भागीदारी भी आज की तुलना में काफी सीमित थी।
इसके बाद 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राम जन्मभूमि विवाद का कानूनी समाधान हुआ और मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ। मंदिर निर्माण के बाद रामलला के धार्मिक उत्सवों को भी भव्य स्वरूप मिलने लगा।
2020 के बाद बढ़ी आयोजन की भव्यता
रामलला के लिए झूलनोत्सव की परंपरा पुरानी है, लेकिन मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ इसके आयोजन का स्वरूप भी बदलता गया। वर्ष 2020 में अस्थायी मंदिर में अपेक्षाकृत बड़े स्तर पर झूलनोत्सव आयोजित किया गया। इसके अगले वर्ष रामलला के लिए विशेष चांदी का झूला तैयार कराया गया।
अब 2026 में झूलनोत्सव की शुरुआत की तारीख में बदलाव किए जाने की खबर ने इसे और खास बना दिया है। सावन शुक्ल तृतीया से उत्सव शुरू करने का निर्णय धार्मिक परंपराओं और मंदिर की वर्तमान व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सावन में बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
सावन शुरू होते ही अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। रामलला के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त रोजाना रामनगरी पहुंच रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 7 अगस्त को करीब 91 हजार, 8 अगस्त को लगभग 1.15 लाख और 9 अगस्त की शाम तक करीब 97 हजार श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। यानी तीन दिनों में करीब तीन लाख लोगों के राम मंदिर पहुंचने की बात सामने आई है।
झूलनोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए मंदिर परिसर में दर्शन और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राम मंदिर के पुजारियों का ड्रेस कोड भी बदला
झूलनोत्सव के साथ राम मंदिर की पूजा व्यवस्था में भी बदलाव किए जा रहे हैं। मंदिर के पुजारियों के ड्रेस कोड को लेकर नई व्यवस्था लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि पुजारी रामानंदाचार्य परंपरा के अनुसार बिना सिले पीले रंग के उत्तरीय वस्त्र धारण कर गर्भगृह में प्रवेश करेंगे। ठंड के मौसम में भी इसी परंपरा के अनुरूप ऊनी वस्त्र रखने की बात कही गई है।
इसके अलावा पुजारियों की दिनचर्या, भगवान के श्रृंगार, भोग, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को व्यवस्थित करने के लिए नियम तैयार किए जा रहे हैं। आने वाले समय में इन व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देकर नियमित पूजा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सकता है।
ट्रस्ट ने तैयारियों का लिया जायजा
झूलनोत्सव की तैयारियों को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और धार्मिक समिति के सदस्यों ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था, पुजारियों की सुविधाओं और उत्सव से जुड़ी तैयारियों की जानकारी ली।
पालकी यात्रा और कुबेर टीला से जुड़े झूलनोत्सव कार्यक्रमों के लिए सजावट और अन्य व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना बड़ी प्राथमिकता होगी।
इस बार क्यों खास है रामलला का झूलनोत्सव?
राम मंदिर में इस वर्ष का झूलनोत्सव इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय के बाद रामलला का उत्सव अपने भव्य मंदिर परिसर में बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। झूला दर्शन, भक्ति संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मंदिर की विशेष सजावट और संभावित लाइव प्रसारण इसे देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना सकते हैं।
एक ओर जहां सावन की धार्मिक आस्था अयोध्या को भक्तिमय वातावरण दे रही है, वहीं दूसरी ओर रामलला के झूलनोत्सव की नई व्यवस्था इस उत्सव को ऐतिहासिक स्वरूप दे रही है। इस बार रामनगरी में 15 अगस्त से शुरू होने वाले इस आयोजन में सावन की भक्ति और रामलला की झूला परंपरा का भव्य संगम देखने को मिलेगा।

