देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ताजा चार्जशीट ने परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि प्रश्नपत्र किसी प्रिंटिंग प्रेस से लीक नहीं हुआ, बल्कि NTA के लिए कार्यरत कुछ विषय विशेषज्ञों ने अपने अधिकृत एक्सेस का कथित दुरुपयोग करते हुए गोपनीय प्रश्नों को बाहर पहुंचाया। इस मामले में दाखिल चार्जशीट पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट 10 अगस्त को सुनवाई करेगी।
प्रिंटिंग प्रेस नहीं, गोपनीय प्रक्रिया के दौरान हुआ कथित लीक
CBI की जांच के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद अनुवाद, बैक-ट्रांसलेशन और प्रूफरीडिंग जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं के दौरान सुरक्षा में सेंध लगी। एजेंसी का कहना है कि इसी चरण में कुछ विषय विशेषज्ञों ने परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों तक अपनी वैध पहुंच का गलत इस्तेमाल किया और सवालों की जानकारी बाहरी लोगों तक पहुंचाई।
चार्जशीट में बॉटनी और जूलॉजी, केमिस्ट्री तथा फिजिक्स से जुड़े कुछ विशेषज्ञों के नाम भी शामिल किए गए हैं, जिन पर जांच एजेंसी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। CBI का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित किया गया ताकि डिजिटल सबूत कम से कम छोड़े जाएं।
गुप्त रिवीजन सेशन में उम्मीदवारों को बताए गए सवाल
जांच में सामने आया है कि परीक्षा से कुछ सप्ताह पहले कुछ चुनिंदा छात्रों के लिए निजी स्तर पर विशेष रिवीजन सेशन आयोजित किए गए। इन बैठकों में कथित तौर पर उम्मीदवारों को संभावित प्रश्न, उनके विकल्प और सही उत्तर मौखिक रूप से बताए गए।
CBI के अनुसार, छात्रों से कहा गया कि वे किसी मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग न करें, बल्कि सभी प्रश्न और उत्तर हाथ से अपनी नोटबुक में लिखें। ऐसा इसलिए किया गया ताकि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार न हो और जांच एजेंसियों के लिए सबूत जुटाना कठिन हो जाए।
फिजिक्स के प्रश्नों का फोटो लेकर आगे भेजने का आरोप
चार्जशीट के मुताबिक, फिजिक्स विषय से जुड़े प्रश्न पहले एक शिक्षक तक पहुंचे, जहां उन्हें हस्तलिखित रूप में तैयार किया गया। बाद में इन नोट्स की तस्वीरें लेकर उन्हें दूसरे व्यक्ति को भेजा गया, जिसने आगे इस सामग्री को परीक्षा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचाया।
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन भुगतान भी किए गए, जिनके डिजिटल रिकॉर्ड जांच में मिले हैं। इन्हीं वित्तीय लेनदेन को CBI पूरे नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है।
अस्पताल बना कथित तैयारी का केंद्र
CBI की जांच में यह भी दावा किया गया है कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले एक निजी अस्पताल में बुलाया गया, जहां उन्हें कथित रूप से पूरा प्रश्न बैंक याद कराया गया। वहां कई घंटों तक छात्रों को संभावित प्रश्नों और उनके उत्तरों का अभ्यास कराया गया ताकि परीक्षा के दौरान वे आसानी से उन्हें हल कर सकें। जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया और इसमें सीमित लोगों को ही शामिल किया गया था।
टेलीग्राम और पीडीएफ के जरिए बढ़ा नेटवर्क
चार्जशीट में उल्लेख है कि प्रश्नों को बाद में पीडीएफ फॉर्मेट में बदलकर ऑनलाइन माध्यम से साझा किया गया। जांच के दौरान टेलीग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई है। इसके बाद यह सामग्री अलग-अलग शहरों में मौजूद लोगों तक पहुंची और कथित रूप से मोटी रकम लेकर आगे वितरित की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्र की कॉपियां कुछ कोचिंग संस्थानों, निजी शिक्षकों और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक भी पहुंचाई गईं।
फॉरेंसिक जांच में मिले अहम सबूत
CBI ने बताया कि छापेमारी के दौरान कई हस्तलिखित नोटबुक, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए। केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) और सरकारी दस्तावेज विशेषज्ञों द्वारा इनकी जांच कराई गई।
जांच में जब इन नोटबुकों का मिलान वास्तविक NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र से किया गया तो कई प्रश्न और उनके उत्तर समान पाए गए। एजेंसी इसे पूरे मामले का महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य मान रही है।
पैसों के लेनदेन और नकदी की भी जांच
चार्जशीट में ऑनलाइन बैंक ट्रांजैक्शन और वित्तीय लेनदेन का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि कुछ संदिग्ध बैंक खातों में हुए भुगतान के रिकॉर्ड मिले हैं। इसके अलावा छापेमारी के दौरान लाखों रुपये की नकदी भी बरामद होने का दावा किया गया है, जिसकी जांच जारी है।
10 अगस्त को कोर्ट में होगी अहम सुनवाई
अब इस पूरे मामले पर सबकी नजर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर है। अदालत 10 अगस्त को CBI की चार्जशीट पर संज्ञान ले सकती है। यदि जांच एजेंसी के दावे अदालत में साबित होते हैं, तो यह मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और गोपनीय प्रक्रियाओं पर भी बड़े सवाल खड़े करेगा। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और जांच की प्रगति इस मामले की दिशा तय करेगी।

