झारखंड में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब राज्यव्यापी अभियान का रूप ले चुका है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच राजधानी रांची में छात्र लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो सहित कई प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील के बाद देवेंद्रनाथ महतो ने पानी पीकर अपना जल त्याग समाप्त किया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती।
परीक्षा परिणाम के बाद शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद हुई। मुख्य परीक्षा के लिए हजारों अभ्यर्थियों का चयन किया गया, लेकिन परिणाम जारी होते ही सोशल मीडिया और छात्र संगठनों ने कई सवाल उठाने शुरू कर दिए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कट-ऑफ सूची सार्वजनिक नहीं की गई और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा। कुछ कथित दस्तावेजों और OMR शीट्स के वायरल होने के बाद छात्रों ने निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी। बढ़ते विवाद को देखते हुए मुख्य परीक्षा को भी स्थगित करना पड़ा।
धरने से भूख हड़ताल तक पहुंचा आंदोलन
छात्रों का आंदोलन 25 जुलाई को रांची के मोरहाबादी मैदान से शुरू हुआ था। शुरुआत में इसमें सीमित संख्या में छात्र शामिल हुए, लेकिन कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के समर्थन से यह आंदोलन बड़ा होता चला गया। बाद में प्रशासनिक कारणों से धरनास्थल को बदलकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर के पास स्थानांतरित कर दिया गया। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र जुट रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन के अगले चरण में कई छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। फिलहाल सात प्रदर्शनकारी आमरण अनशन पर बैठे हैं। देवेंद्रनाथ महतो ने शुरुआत में पानी तक छोड़ दिया था, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। चिकित्सकों की सलाह और सोनम वांगचुक की अपील के बाद उन्होंने पानी पीना स्वीकार किया, लेकिन आंदोलन जारी रखने का फैसला दोहराया।
सोनम वांगचुक ने की स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील
भूख हड़ताल के दौरान देवेंद्रनाथ महतो ने फोन पर सोनम वांगचुक से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि लंबे समय से चल रहे परीक्षा विवादों और छात्रों की अनदेखी के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पानी नहीं पीते तो डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर हो सकती थी।
सोनम वांगचुक ने उन्हें सलाह दी कि आंदोलन जारी रखना जरूरी है, लेकिन जीवन की रक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संघर्ष लंबा हो सकता है, इसलिए स्वास्थ्य बनाए रखना आवश्यक है ताकि छात्र अपनी मांगों को मजबूती से आगे रख सकें।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि केवल 14वीं JPSC परीक्षा ही नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों से विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। इसलिए वे पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
छात्र चाहते हैं कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की भूमिका की गहन जांच हो और यदि किसी प्रकार की अनियमितता साबित होती है तो संबंधित परीक्षाओं को निरस्त किया जाए। साथ ही मामले की जांच केवल राज्य स्तर तक सीमित न रखकर केंद्रीय एजेंसियों से भी कराई जाए। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और भविष्य की परीक्षाओं के लिए विश्वसनीय एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।
जांच में अब तक क्या कार्रवाई हुई?
मामले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने कई स्थानों पर छापेमारी की और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ की। इस दौरान कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। बढ़ते विवाद के बीच राज्य सरकार ने मामले की जांच तेज करने के निर्देश दिए, जबकि JPSC और JSSC की कई आगामी भर्ती परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। जांच अभी भी जारी है और अधिकारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
आंदोलन दो गुटों में बंटा, लेकिन मुद्दा एक
समय के साथ छात्र आंदोलन के भीतर रणनीति को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। एक समूह देवेंद्रनाथ महतो के नेतृत्व में आंदोलन जारी रखे हुए है, जबकि दूसरा समूह अलग मंच से अपनी गतिविधियां चला रहा है। हालांकि दोनों पक्षों की मूल मांग समान है – भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
विधानसभा घेराव की तैयारी से बढ़ी राजनीतिक हलचल
झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान छात्र अपनी आवाज और बुलंद करने की तैयारी में हैं। पहले विधानसभा घेराव का कार्यक्रम एक तारीख पर प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया। अब छात्र संगठनों ने नए कार्यक्रम के तहत विधानसभा मार्च और बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। इस मुद्दे पर विपक्ष भी सरकार को लगातार घेर रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
आगे क्या?
JPSC विवाद अब केवल भर्ती परीक्षा का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के विश्वास, रोजगार और सरकारी भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। यदि सरकार और छात्र संगठनों के बीच जल्द संवाद नहीं होता, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र और जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

