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274 भगोड़े अपराधियों की भारत वापसी: सरकार की सख्त नीति और रणनीति ने कैसे बदली तस्वीर? जानिए

274 भगोड़े अपराधियों की भारत वापसी: सरकार की सख्त नीति और रणनीति ने कैसे बदली तस्वीर? जानिए

भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को पहले से कहीं अधिक तेज और प्रभावी बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 2019 से जुलाई 2026 तक कुल 274 भगोड़े अपराधियों को अलग-अलग देशों से भारत वापस लाया गया है। सरकार का कहना है कि यह केवल प्रत्यर्पण की प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा अभियान है।

सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय के जरिए मिशन मोड में आगे बढ़ाया है। यही वजह है कि अब विदेश भागने वाले अपराधियों के लिए कानून से बच निकलना पहले जितना आसान नहीं रह गया है।

पहले क्यों मुश्किल था भगोड़ों को वापस लाना?
2014 से पहले भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कई देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां सीमित थीं और उपलब्ध कानूनी ढांचा भी समय के साथ पुराना पड़ चुका था। उस दौर में आर्थिक अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के लिए कोई अलग कानून नहीं था। यही कारण था कि बड़े आर्थिक अपराध करने वाले कई लोग देश छोड़कर विदेशों में बस गए और उनके खिलाफ कार्रवाई बेहद धीमी रही।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2004 से 2013 के बीच हर साल औसतन केवल चार भगोड़ों का ही प्रत्यर्पण हो पाता था, जबकि बड़ी संख्या में अनुरोध वर्षों तक लंबित रहते थे। अधूरे दस्तावेज, लंबी कानूनी प्रक्रिया और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भी बड़ी बाधा मानी जाती थी।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून ने बदली व्यवस्था
मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद भगोड़े आर्थिक अपराधियों के खिलाफ अलग कानूनी व्यवस्था तैयार की। ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम’ लागू होने के बाद ऐसे लोगों की संपत्ति जब्त करने और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया को कानूनी मजबूती मिली। सरकार ने इस मुद्दे को केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था से भी जोड़कर देखा।

इसके साथ ही NIA और UAPA जैसे कानूनों में संशोधन किए गए, जिससे विदेशों में बैठे आतंकियों, उनके फंडिंग नेटवर्क और सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई का दायरा बढ़ गया। सरकार का कहना है कि अब कार्रवाई संगठनों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी की जा रही है।

नए आपराधिक कानूनों से मिली अतिरिक्त ताकत
2024 में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों में भगोड़े अपराधियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए। इनमें सबसे अहम ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ यानी आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल विदेश भाग जाने से कोई आरोपी न्यायिक प्रक्रिया से बच न सके।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अदालतों में लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होगा और भगोड़ों पर कानूनी दबाव पहले से अधिक बढ़ेगा।

इंटरपोल और वैश्विक सहयोग बना बड़ी ताकत
विदेशों में छिपे अपराधियों तक पहुंचने के लिए भारत ने इंटरपोल और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग को मजबूत किया है। वर्ष 2022 में भारत ने इंटरपोल की 90वीं जनरल असेंबली की मेजबानी भी की, जहां वैश्विक स्तर पर अपराध नियंत्रण में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इसके बाद जनवरी 2025 में ‘भारतपोल (BHARTPOL)’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की गई, जिसने CBI, राज्य पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को एक साझा डिजिटल नेटवर्क से जोड़ दिया। अब विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान पहले की तुलना में काफी तेज हो गया है, जिससे भगोड़ों का पता लगाने और कानूनी कार्रवाई में तेजी आई है।

तकनीक के जरिए खोजे जा रहे हैं अपराधी
सरकार ने भगोड़े अपराधियों का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग शुरू किया है। ऑपरेशन त्रिशूल के तहत सैटेलाइट निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट, जियो-लोकेशन ट्रैकिंग और प्रोफाइल मैपिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कई मामलों में आरोपी विदेशों में अपना नाम और पहचान बदल चुके थे, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड और तकनीकी विश्लेषण की मदद से उनकी पहचान स्थापित कर उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता मिली। वहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी तकनीकों के जरिए प्रत्यर्पण से जुड़े मामलों की सुनवाई को भी तेज किया गया है।

रेड कॉर्नर नोटिस में लगातार बढ़ोतरी
विदेशों में फरार अपराधियों की तलाश के लिए इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे नोटिसों की संख्या लगातार बढ़ी है। सरकार के अनुसार, हाल के वर्षों में सैकड़ों रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए, जिससे कई देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को वांछित अपराधियों की पहचान करने और उन्हें हिरासत में लेने में मदद मिली। यह कदम भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कानूनी और कूटनीतिक सक्रियता का भी संकेत माना जा रहा है।

हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत सरकार ने आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई और बड़ी राशि की सफल रिकवरी भी हुई। सरकार का दावा है कि इससे आर्थिक अपराधियों को स्पष्ट संदेश गया है कि विदेश भाग जाने के बाद भी उनकी अवैध संपत्ति सुरक्षित नहीं रह सकती।

किन मामलों के आरोपी भारत लाए गए?
भारत वापस लाए गए 274 भगोड़े अपराधियों में हत्या, गैंगस्टर गतिविधियां, आतंकवाद, वित्तीय अपराध, ड्रग्स तस्करी, यौन अपराध, पॉक्सो, मानव तस्करी, साइबर अपराध और नकली मुद्रा जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि अभियान केवल आर्थिक अपराधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति पर केंद्रित है जो कानून से बचने के लिए विदेश भाग गया है।

क्या है आगे का प्लान?
सरकार ने भगोड़ों के खिलाफ अभियान को और मजबूत बनाने के लिए विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों, राज्य पुलिस, खुफिया विभाग, विदेश मंत्रालय और जांच एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया है। जनवरी 2026 में मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत एक विशेष फोकस ग्रुप का गठन भी किया गया, जिसका उद्देश्य भगोड़ों से जुड़े मामलों की निगरानी, दस्तावेजों का मानकीकरण और विदेशी एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना है।

सरकार का कहना है कि विदेशों में छिपे अपराधी केवल लंबित केस नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए लगातार चुनौती बने रहते हैं। इसलिए उन्हें भारत वापस लाकर न्याय के कटघरे तक पहुंचाना आने वाले समय में भी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

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