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तृषा टिप्पणी विवाद में उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार, DMK ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई

तृषा टिप्पणी विवाद में उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार, DMK ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई

तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब नेता प्रतिपक्ष और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन को अभिनेत्री तृषा पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी, लेकिन उस पर सुनवाई पूरी होने से पहले ही पुलिस ने कार्रवाई कर दी। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है और डीएमके ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

पूरा विवाद तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक रैली से जुड़ा है। सभा के दौरान उदयनिधि स्टालिन राज्य सरकार पर हमला बोल रहे थे। इसी बीच भीड़ से अभिनेत्री तृषा का नाम लेकर नारे लगाए गए। आरोप है कि इस पर उदयनिधि ने ऐसी टिप्पणी की जिसे विपक्षी दलों ने डबल मीनिंग बताते हुए महिलाओं का अपमान करार दिया। बयान सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया और उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

मामले में पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कई गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। उन पर महिला की गरिमा का अपमान करने, जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने, विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने, आपराधिक साजिश रचने और आपराधिक धमकी देने जैसी धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम, 2002 तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 67 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

गिरफ्तारी के बाद उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लेकर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की है। उनका कहना है कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं, किसी से डरने वाले नहीं हैं और यदि गिरफ्तारी होती है तो उसका सामना करने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की गई है।

उधर, डीएमके ने अपने नेता के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता टीकेएस इलांगोवन ने दावा किया कि उन्होंने उदयनिधि का पूरा भाषण सुना है और उसमें अभिनेत्री तृषा का नाम लेकर कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की गई। उनके अनुसार विपक्ष के आरोप तथ्यों पर नहीं बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष को निशाना बनाने के लिए इस मामले का इस्तेमाल कर रही है।

गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही चेन्नई समेत कई स्थानों पर डीएमके कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। पार्टी समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। इससे राज्य का राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया।

इस बीच मद्रास हाईकोर्ट में उदयनिधि स्टालिन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। सरकारी पक्ष ने कहा कि आवश्यक पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें स्टेशन बेल पर रिहा कर दिया जाएगा। अदालत में दिए गए इस बयान के बाद यह संकेत मिला कि पुलिस की कार्रवाई फिलहाल पूछताछ तक सीमित रह सकती है।

फिलहाल यह मामला केवल एक बयान का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच नए टकराव का कारण बन चुका है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही, पुलिस जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले की दिशा तय करेंगी। पूरे घटनाक्रम पर राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की भी नजर बनी हुई है।

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