कानपुर। राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों और उसके नाम पर आर्थिक लाभ उठाने वालों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने बड़ा बयान दिया है। कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों ने अपना जीवन और समय लगाया, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी रहे जिन्होंने राम जन्मभूमि के नाम पर पैसा कमाया और फिर चले गए।
चंपत राय बुधवार को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, बेनाझाबर में विहिप के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी वर्ष के शुभारंभ समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे थे। श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी विवाद के बाद कानपुर में यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम बताया जा रहा है।
अशोक सिंहल के योगदान को किया याद
कार्यक्रम में चंपत राय ने अशोक सिंहल के जीवन और उनके सामाजिक योगदान से जुड़े कई प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा कि सिंहल का पूरा जीवन भारतीय संस्कृति के उत्थान और हिंदू समाज को संगठित करने के लिए समर्पित रहा। उनके मुताबिक अशोक सिंहल में आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संगठन खड़ा करने की क्षमता और असाधारण आत्मविश्वास था।
उन्होंने कहा कि सिंहल जिस कार्य को अपने हाथ में लेते थे, उसे पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा देते थे। उनके नेतृत्व में कई ऐसे अभियान चलाए गए जिनका उद्देश्य समाज को संगठित करना और लोगों में आत्मविश्वास पैदा करना था।
पंजाब से अयोध्या तक कई प्रसंगों का जिक्र
चंपत राय ने पंजाब में आतंकवाद के दौर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस कठिन समय में समाज का मनोबल बनाए रखने के लिए अशोक सिंहल ने हरिद्वार से अमृतसर तक संतों की यात्रा निकाली थी। उनका मानना था कि संकट की परिस्थितियों में समाज को भय के बजाय संगठन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने काशी की धर्म संसद में डोम राजा को मंच पर सम्मान देने और सनातन-बौद्ध परंपराओं के बीच संवाद बढ़ाने में सिंहल की भूमिका का भी उल्लेख किया।
राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका
चंपत राय ने कहा कि 1984 में धर्म संसद से शुरू हुए अभियान, शिलापूजन, कारसेवा और गांव-गांव जनजागरण तक अशोक सिंहल लगातार सक्रिय रहे। उन्होंने रामभक्तों पर गोली चलाए जाने के बाद की एक घटना का भी जिक्र किया और बताया कि सिंहल ने इसे बेहद भावनात्मक रूप से लिया था।
संतों ने भी रखी अपनी बात
कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी संबोधन किया। उन्होंने चंपत राय के प्रति संत समाज के विश्वास का उल्लेख किया और अशोक सिंहल को संत समाज के बीच प्रभावशाली व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि सिंहल ने संत शक्ति को संगठित कर राष्ट्र निर्माण के कार्य से जोड़ने का प्रयास किया था।

