नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अक्टूबर 2026 के मासिक बुलेटिन में यह बात सामने आई है। बुलेटिन में शामिल अध्ययनों के मुताबिक, मौद्रिक नीति के तहत ब्याज दरों में की गई कटौती का फायदा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCB) के जरिए कर्ज लेने वालों तक तेजी से पहुंचा है। वहीं, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) ने अपनी परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार के साथ कर्ज वितरण में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की है।
वैश्विक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती
RBI बुलेटिन के ‘स्टेट ऑफ द इकोनॉमी’ अध्ययन के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बढ़ाई हैं। इन परिस्थितियों के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है। ऐसे में कई प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने अपनी मौद्रिक नीतियों में सख्ती करते हुए नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है।
हालांकि, भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत बने हुए हैं। उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़े उच्च-आवृत्ति संकेतक आर्थिक गतिविधियों की मौजूदा स्थिति का आकलन करने में मदद करते हैं। बुलेटिन के मुताबिक, इन संकेतकों से भारतीय अर्थव्यवस्था में निरंतर मजबूती का पता चलता है।
बैंकों के जरिए कर्जदारों तक पहुंचा ब्याज दरों में कटौती का लाभ
बुलेटिन में शामिल अध्ययन के अनुसार, मौद्रिक नीति में की गई कटौती का असर बैंकिंग क्षेत्र के जरिए कर्ज लेने वालों तक तेजी से पहुंचा है। ब्याज दरों में कटौती का लाभ कर्ज की दरों में कमी के रूप में सामने आ सकता है, जिससे पात्र कर्जदारों के लिए ऋण लेना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है।
हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि कर्ज किस प्रकार का है, उसकी ब्याज दर किस आधार पर तय होती है और बैंक ने दरों में बदलाव को किस तरह लागू किया है।
NBFC के कर्ज वितरण में दोहरे अंकों की वृद्धि
RBI बुलेटिन में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। अध्ययन के अनुसार, परिसंपत्ति गुणवत्ता में लगातार सुधार के साथ इन कंपनियों ने कर्ज वितरण में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की है।
NBFC उन लोगों और कारोबारों को भी वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराती हैं, जिन्हें अलग-अलग कारणों से पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से कर्ज लेने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे में इन कंपनियों की ऋण वृद्धि आर्थिक गतिविधियों और कर्ज की मांग के रुझान को समझने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
महंगाई पर क्या संकेत?
वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। ऊर्जा, परिवहन और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने पर उनकी लागत बढ़ सकती है, जिसका असर उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
ऐसे माहौल में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ महंगाई के दबाव पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा। RBI बुलेटिन में प्रस्तुत आकलन वैश्विक जोखिमों और घरेलू आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन को समझने में मदद करता है।
RBI के अक्टूबर 2026 के बुलेटिन के मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज दरों में कटौती का लाभ कर्जदारों तक पहुंचने और NBFC के कर्ज वितरण में दोहरे अंकों की वृद्धि के संकेत वित्तीय क्षेत्र की गतिविधियों को दर्शाते हैं। हालांकि, आगे की आर्थिक स्थिति पर वैश्विक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला और महंगाई के रुझानों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।

