गोरखपुर/ लखनऊ। दीपावली का त्योहार खुशियों, रोशनी और अपनों के साथ समय बिताने का अवसर होता है, लेकिन गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में बसे वनटांगिया परिवारों के लिए यह पर्व एक खास भावनात्मक जुड़ाव भी लेकर आता है। इन परिवारों की दीपावली तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक उनके बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नहीं पहुंच जाते। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को मुख्यमंत्री इस बार भी कायम रखने जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार, 8 नवंबर को जंगल तिकोनिया नंबर तीन गांव पहुंचेंगे। यहां वह वनटांगिया समुदाय के लोगों के साथ दीपावली की खुशियां साझा करेंगे। बच्चों से मुलाकात करेंगे और ग्रामीणों के बीच दीपोत्सव में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर गांव में तैयारियां तेज हो गई हैं। घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट का काम चल रहा है। ग्रामीण अपने प्रिय अतिथि के स्वागत के लिए उत्साहित हैं।
इस बार मुख्यमंत्री का दौरा केवल दीपावली की खुशियां बांटने तक सीमित नहीं रहेगा। कार्यक्रम के दौरान वह गोरखपुर जिले को विकास की कई महत्वपूर्ण सौगातें भी देंगे। कुल 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास प्रस्तावित है। इनमें सड़क संपर्क बेहतर करने से लेकर पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने वाली योजनाएं शामिल हैं।
सांसद रहते शुरू की परंपरा, मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नहीं टूटा सिलसिला
योगी आदित्यनाथ का वनटांगिया समुदाय से जुड़ाव आज का नहीं है। मुख्यमंत्री बनने से पहले जब वह गोरखपुर के सांसद और गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी थे, तभी उन्होंने इस समुदाय के बीच पहुंचना शुरू कर दिया था। वर्ष 2009 से वनटांगिया परिवारों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई। धीरे-धीरे यह आयोजन गांव के लोगों के लिए साल का सबसे खास अवसर बन गया।
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी आदित्यनाथ ने इस सिलसिले को जारी रखा। शासन और प्रशासन की व्यस्तताओं के बावजूद वनटांगिया गांव में दीपावली मनाने की परंपरा बनी रही। यही वजह है कि हर साल दीपावली से पहले ग्रामीणों को मुख्यमंत्री के आगमन का इंतजार रहने लगता है।
जंगल तिकोनिया नंबर तीन के लोगों के लिए यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी दौरा नहीं, बल्कि उस बदलाव की याद भी है जिसने उनके जीवन की दिशा बदलने में भूमिका निभाई। कभी बुनियादी सुविधाओं और नागरिक अधिकारों से दूर रहने वाला यह समुदाय आज सरकारी योजनाओं, शिक्षा, आवास, बिजली और सड़क जैसी सुविधाओं से जुड़ चुका है।
कौन हैं वनटांगिया और कैसे बसीं जंगल के बीच इनकी बस्तियां?
वनटांगिया समुदाय का इतिहास जंगलों के विकास और संरक्षण से जुड़ा हुआ है। ब्रिटिश शासन के दौरान रेलवे के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर लकड़ी की आवश्यकता थी। रेल पटरियों के लिए इस्तेमाल होने वाले स्लीपर तैयार करने के उद्देश्य से जंगलों में साखू के पेड़ों की कटाई की गई। बाद में जंगलों को दोबारा विकसित करने और नए पौधे लगाने के लिए मजदूरों तथा भूमिहीन परिवारों को जंगलों में बसाया गया।
इस काम में टांगिया पद्धति का इस्तेमाल किया गया। इस पद्धति के अंतर्गत परिवार जंगल में रहकर पौधों को लगाने, उनकी देखभाल करने और वन क्षेत्र को विकसित करने का काम करते थे। इसी व्यवस्था से जुड़े लोगों को आगे चलकर वनटांगिया कहा जाने लगा।
गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में वर्ष 1918 के आसपास पांच प्रमुख वनटांगिया बस्तियां विकसित हुईं। इनमें जंगल तिकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा शामिल हैं। इसके अलावा महराजगंज के जंगलों में भी वनटांगिया समुदाय की कई बस्तियां बसाई गईं।
इन परिवारों ने जंगल को विकसित करने में अपना जीवन लगा दिया, लेकिन विडंबना यह रही कि जिस जमीन और वन क्षेत्र को उन्होंने अपने श्रम से संवारा, उसी पर उनका अधिकार लंबे समय तक अनिश्चित बना रहा।
आजादी के बाद भी नहीं मिली सामान्य नागरिकों जैसी सुविधाएं
देश को वर्ष 1947 में आजादी मिली, लेकिन वनटांगिया समुदाय के जीवन में बदलाव आने में कई दशक लग गए। जंगलों में रहने वाले इन परिवारों को लंबे समय तक सामान्य नागरिकों की तरह अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल पाईं।
उनके सामने सबसे बड़ी समस्या स्थायी आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की थी। जंगल के भीतर रहने के कारण बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच आसान नहीं थी। पक्के मकान बनाने और स्थायी निर्माण करने पर भी कई तरह की पाबंदियां थीं। परिवारों की आजीविका मुख्य रूप से जंगल से जुड़े काम और मजदूरी पर निर्भर रहती थी।
बच्चों की पढ़ाई का कोई बेहतर इंतजाम नहीं था। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण छोटी-छोटी बीमारियां भी परिवारों के लिए परेशानी बन जाती थीं। इसके साथ ही वन विभाग की ओर से जंगल से बेदखली का डर भी बना रहता था।
समय बीतता गया, लेकिन इन बस्तियों में रहने वाले लोगों की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। वनटांगिया परिवारों की एक बड़ी चिंता यह थी कि वे जिस स्थान पर पीढ़ियों से रह रहे हैं, वहां उनका भविष्य कितना सुरक्षित है।
1998 के बाद शुरू हुई बदलाव की पहल
वर्ष 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर से सांसद बने। इसी दौरान उनका ध्यान वनटांगिया बस्तियों में रहने वाले परिवारों की कठिन परिस्थितियों की ओर गया। उन्होंने महसूस किया कि इस समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केवल सरकारी घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को गांव तक पहुंचाना जरूरी है।
इसके बाद वनटांगिया बस्तियों में शिक्षा और चिकित्सा से जुड़े प्रयास शुरू किए गए। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े संस्थानों और गोरखनाथ मंदिर की ओर से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा को इस काम में लगाया गया।
जंगल तिकोनिया नंबर तीन में वर्ष 2003 से शुरू हुए प्रयासों का असर अगले कुछ वर्षों में दिखाई देने लगा। बच्चों की शिक्षा के लिए व्यवस्था विकसित की गई और स्वास्थ्य सेवाओं को भी बस्ती तक पहुंचाने की कोशिश हुई। ग्रामीणों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण था, क्योंकि पहली बार उन्हें लगा कि उनकी समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के लिए कोई लगातार प्रयास कर रहा है।
बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल बनाने पर दर्ज हुआ था मुकदमा
वनटांगिया समुदाय को शिक्षा से जोड़ने की राह आसान नहीं रही। गांव में बच्चों के लिए स्कूल की व्यवस्था तैयार करने के दौरान वर्ष 2009 में विवाद भी सामने आया। जानकारी के मुताबिक, जंगल तिकोनिया नंबर तीन में वनटांगिया बच्चों की पढ़ाई के लिए एस्बेस्टस शीट से अस्थायी विद्यालय तैयार किया जा रहा था। वन विभाग ने इस निर्माण को नियमों के विरुद्ध बताते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया था।
इस मामले में योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया बच्चों की शिक्षा की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। उनका तर्क था कि जंगल में रहने वाले बच्चों को भी पढ़ने का अधिकार और अवसर मिलना चाहिए।
बाद में यहां गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से विद्यालय संचालित हुआ। यह स्कूल आज भी वनटांगिया समुदाय को शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। इस पहल ने गांव के बच्चों के सामने पढ़ाई और बेहतर भविष्य की नई संभावनाएं खोलीं।
2017 में राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने से बदली तस्वीर
वनटांगिया समुदाय के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक तब आया, जब योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद वनटांगिया बस्तियों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की दिशा में काम आगे बढ़ा।
राजस्व ग्राम घोषित होने से पहले इन बस्तियों के लोगों को कई सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उनकी बस्तियां सामान्य राजस्व गांवों की तरह प्रशासनिक व्यवस्था में शामिल नहीं थीं। ऐसे में सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण था।
राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने के बाद स्थिति में बदलाव आया। इन गांवों को विकास योजनाओं से जोड़ने का रास्ता आसान हुआ। आवास, सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य सरकारी सुविधाओं का विस्तार संभव हो सका।
वनटांगिया समुदाय के लोगों को भूमि से जुड़े अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में भी कदम उठाए गए। गोरखपुर और महराजगंज के कुल 23 वनटांगिया गांवों में विकास कार्यों का असर दिखाई देने लगा। करीब एक सदी तक उपेक्षा झेलने वाले इस समुदाय के लिए यह बदलाव केवल सरकारी सुविधा मिलने तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक पहचान और सम्मान से भी जुड़ा था।
पक्के मकान से लेकर बिजली और राशन तक पहुंचीं सुविधाएं
आज जंगल तिकोनिया नंबर तीन समेत वनटांगिया बस्तियों में पहले की तुलना में काफी बदलाव देखने को मिलता है। सरकारी योजनाओं के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए गए हैं। गांवों में बिजली, सड़क, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
इसके अलावा पात्र परिवारों को राशन कार्ड, आधार कार्ड और रसोई गैस जैसी सुविधाओं से जोड़ा गया है। बच्चों के लिए स्कूलों की व्यवस्था और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी जरूरी सेवाएं पहुंचाई गई हैं।
बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को पेंशन योजनाओं का लाभ देने की दिशा में भी काम हुआ है। ग्रामीणों को कृषि योग्य भूमि से जुड़े पट्टे और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं।
इन बदलावों का असर अब गांव की नई पीढ़ी पर भी दिखाई देता है। जहां पहले बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर अनिश्चितता रहती थी, वहीं अब उनके सामने स्कूल जाने और आगे बढ़ने के अवसर मौजूद हैं। वनटांगिया परिवारों के लिए दीपावली का त्योहार इस बदलाव को याद करने का भी अवसर बन गया है।
82.41 करोड़ की 52 परियोजनाओं से गोरखपुर को मिलेगी नई सौगात
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 8 नवंबर के कार्यक्रम में विकास परियोजनाओं को विशेष महत्व दिया गया है। इस दौरान कुल 82.41 करोड़ रुपये की 52 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जाएगा।
इनमें 26 परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाना है, जिनकी कुल लागत करीब 77.97 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, 26 तैयार विकास कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। इन पर लगभग 4.43 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। मुख्यमंत्री के हाथों शुरू होने वाली योजनाओं में सड़क संपर्क, पर्यटन विकास और बाजार व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
जंगल तिकोनिया नंबर तीन तक पहुंचना होगा आसान
वनटांगिया गांव के लोगों के लिए सबसे अहम घोषणाओं में रजही चौराहे से जंगल तिकोनिया नंबर तीन होते हुए पिपराइच मार्ग तक इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण शामिल है। इस परियोजना पर लगभग 3 करोड़ 65 लाख 11 हजार रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। सड़क बनने से गांव का बाहरी संपर्क बेहतर होगा और ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
अभी तक जंगल के भीतर स्थित बस्तियों से मुख्य मार्ग तक पहुंचना कई बार परेशानी भरा रहता है। खासकर बरसात के मौसम में रास्तों की स्थिति खराब होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इंटरलॉकिंग सड़क बनने से गांव के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कुसम्ही जंगल में बनेगा ईको पार्क, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कुसम्ही जंगल के पर्यटन विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास भी शामिल है। यहां करीब 4 करोड़ 84 लाख 81 हजार रुपये की लागत से ईको पार्क विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत प्राकृतिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए पर्यटकों के लिए सुविधाएं तैयार की जाएंगी। योजना में स्विस कॉटेज जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं, जिससे लोग जंगल के शांत और हरियाली से घिरे वातावरण में समय बिता सकेंगे। कुसम्ही जंगल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और हरियाली के लिए जाना जाता है। यहां ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलने से गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को घूमने के लिए एक नया विकल्प मिल सकता है।
पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार का होगा निर्माण
विकास परियोजनाओं में पिपराइच नगर पंचायत के लिए वैश्विक नगर बाजार का निर्माण भी शामिल है। इस परियोजना पर लगभग 1 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इस बाजार के निर्माण का उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बेहतर स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। बाजार व्यवस्था विकसित होने से व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
पिपराइच और आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिहाज से यह परियोजना महत्वपूर्ण हो सकती है। बाजार का बेहतर ढांचा तैयार होने से छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों को भी लाभ मिलने की संभावना है। इस प्रकार मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल विकास कार्य ग्रामीण संपर्क, पर्यटन और व्यापार जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
बच्चों के साथ दीपावली मनाने की भी है खास परंपरा
वनटांगिया गांव में मुख्यमंत्री के दीपोत्सव कार्यक्रम की एक खास पहचान बच्चों के साथ उनका संवाद भी है। हर साल दीपावली के अवसर पर योगी आदित्यनाथ बच्चों से मुलाकात करते हैं और उन्हें मिठाइयां तथा पढ़ाई से जुड़ी सामग्री भेंट करते हैं। कॉपी-किताबें और अन्य उपहार देकर बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने की यह परंपरा ग्रामीणों के बीच काफी लोकप्रिय है। मुख्यमंत्री गांव के लोगों से उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में भी बातचीत करते हैं।
इस बार भी ग्रामीणों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री उनके बीच पहुंचकर त्योहार की खुशियां साझा करेंगे और विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे। गांव में घरों को सजाने और स्वागत की तैयारियों के साथ दीपावली के आयोजन को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन की ओर से भी कार्यक्रम को व्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
वनटांगिया समुदाय के लिए दीपावली बदलाव की पहचान
जंगल तिकोनिया नंबर तीन में हर साल होने वाला दीपोत्सव अब गोरखपुर की एक खास परंपरा बन चुका है। इसकी अहमियत इसलिए भी है, क्योंकि यह उन परिवारों की कहानी से जुड़ा है जिन्होंने लंबे समय तक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष किया। कभी जंगलों में सीमित जीवन जीने को मजबूर रहे वनटांगिया परिवार आज विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। शिक्षा, आवास, सड़क, बिजली और सरकारी योजनाओं तक पहुंच ने उनके जीवन में नई संभावनाएं पैदा की हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 8 नवंबर को प्रस्तावित दौरा इसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा। एक ओर वनटांगिया परिवारों के साथ दीपावली की खुशियां साझा की जाएंगी, वहीं दूसरी ओर 82.41 करोड़ रुपये की 52 परियोजनाओं के जरिए विकास कार्यों को भी नई गति देने की तैयारी है।

