अयोध्या/ लखनऊ। रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव का उत्साह अपने चरम पर है। चारों तरफ भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों की छटा दिखाई दे रही है। इसी बीच रामपथ पर निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को राममय कर दिया। सजे-धजे रथों पर भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कहीं प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के दिव्य स्वरूप दिखाई दिए तो कहीं हनुमान जी के पराक्रम का प्रदर्शन हुआ।
ढोल, नगाड़े और ताशों की गूंज के बीच आगे बढ़ती झांकियों ने ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया, मानो रामायण के प्रसंग अयोध्या की धरती पर फिर से जीवंत हो उठे हों। शोभायात्रा को देखने के लिए रामपथ पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक जुटे। लोग हाथ जोड़कर भगवान के स्वरूपों का दर्शन करते रहे और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
21 झांकियों में दिखी रामायण की पूरी गाथा
इस वर्ष की शोभायात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण 21 भव्य झांकियां रहीं। इनमें सात झांकियां रामायण के सातों कांडों पर आधारित थीं, जबकि 14 झांकियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में संचालित विकास योजनाओं और सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया।
रामायण आधारित झांकियों में बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक की कथा को अलग-अलग दृश्य रूपों में सजाया गया था। बालकांड में प्रभु श्रीराम के जन्म और बाल्यकाल की लीलाओं का चित्रण किया गया। अयोध्याकांड में वनवास के प्रसंग को दिखाया गया, जबकि अरण्यकांड में वन जीवन से जुड़ी घटनाओं को प्रस्तुत किया गया।
किष्किन्धाकांड की झांकी में भगवान श्रीराम की सुग्रीव और हनुमान जी से भेंट को दर्शाया गया। सुंदरकांड में बजरंगबली के साहस और पराक्रम की झलक दिखाई दी। वहीं लंकाकांड में भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध को भव्य तरीके से प्रस्तुत किया गया। उत्तरकांड की झांकी ने रामायण की कथा को आगे बढ़ाते हुए श्रद्धालुओं को धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा। एक के बाद एक गुजरती झांकियों के जरिए दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों को देखने का अवसर मिला।
महिला कलाकारों के ढोल और लोकनृत्य ने बांधा समां
शोभायात्रा में धार्मिक झांकियों के साथ कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। महिला कलाकारों ने अपने कंधों पर ढोल रखकर जब पारंपरिक अंदाज में थाप दी तो पूरा रामपथ तालियों और उत्साह से गूंज उठा। नगाड़ों और ताशों की तेज आवाज के बीच कलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ शानदार करतब दिखाए। अलग-अलग राज्यों से आए लोक कलाकारों ने अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नृत्य और संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने शोभायात्रा को भारतीय लोककला और सांस्कृतिक विविधता का बड़ा मंच बना दिया। रामपथ पर मौजूद लोग कलाकारों की हर प्रस्तुति को उत्सुकता से देखते नजर आए।
साकेत महाविद्यालय से रामकथा पार्क तक निकली यात्रा
भव्य शोभायात्रा की शुरुआत साकेत महाविद्यालय से हुई। उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। इसके बाद झांकियां और कलाकारों के समूह करीब तीन किलोमीटर का रास्ता तय करते हुए रामकथा पार्क पहुंचे। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालु शोभायात्रा का स्वागत करते दिखाई दिए। कई लोग अपने मोबाइल फोन से इस भव्य आयोजन के दृश्य कैमरे में कैद करते रहे। भगवान श्रीराम के स्वरूपों के दर्शन के लिए लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। रामपथ पर उमड़ी भीड़ और धार्मिक नारों के बीच शोभायात्रा ने दीपोत्सव के उत्सव को और भी भव्य बना दिया।
सरकारी योजनाओं की झांकियों में दिखाई दी विकास की तस्वीर
इस बार दीपोत्सव की शोभायात्रा में धार्मिक विरासत के साथ उत्तर प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं को भी प्रमुखता दी गई। 14 झांकियों के माध्यम से विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी दृश्य रूप में प्रस्तुत की गई। इनमें जल जीवन मिशन, एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी), कृषि एवं पशुपालन, आयुष्मान कैशलेस योजना और स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश जैसी योजनाएं शामिल रहीं। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, मिशन शक्ति, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और आत्मनिर्भर नारी से जुड़े विषयों को भी झांकियों में स्थान दिया गया।
उत्तर प्रदेश पुलिस, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और विकसित भारत की अवधारणा को भी प्रदर्शित किया गया। इन झांकियों के जरिए प्रदेश में आधारभूत सुविधाओं, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, कृषि और औद्योगिक विकास से जुड़े प्रयासों की तस्वीर पेश की गई। इस तरह शोभायात्रा में एक तरफ भगवान श्रीराम की जीवनगाथा दिखाई दी तो दूसरी तरफ आधुनिक उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को भी दर्शकों के सामने रखा गया।
पर्यटन मंत्री बोले- हर साल अपना ही रिकॉर्ड तोड़ता है दीपोत्सव
शोभायात्रा की भव्यता देखकर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने दीपोत्सव को अलौकिक और दिव्य आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव हर वर्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रत्येक साल पिछले साल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का प्रयास किया जाता है और इस बार भी नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी है।
पर्यटन मंत्री के मुताबिक, दीपोत्सव अब केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन चुकी है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग भी इस आयोजन को लेकर उत्सुक रहते हैं।
उन्होंने कहा कि सातों कांडों पर आधारित झांकियों के माध्यम से लोगों को राम में अयोध्या, सनातन में अयोध्या और विरासत में अयोध्या के दर्शन हो रहे हैं। शाम को होने वाला मुख्य दीपोत्सव कार्यक्रम भी बेहद भव्य रहने की उम्मीद है।
श्रद्धालुओं ने कहा- रामायण को जीवंत देखना यादगार अनुभव
शोभायात्रा देखने पहुंचे श्रद्धालुओं में भी जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। उन्नाव से आए सुशील कुमार ने कहा कि अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन बेहद आकर्षक है। रामायण के प्रसंगों को जिस तरह झांकियों के माध्यम से दिखाया गया, वह मन को आनंदित करने वाला अनुभव है।
जौनपुर से पहुंचे राम कुमार ने भी शोभायात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया। वहीं बलरामपुर की सुशीला ने कहा कि रामकथा के दृश्यों को इतने सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया कि ऐसा महसूस हुआ जैसे पूरी रामायण आंखों के सामने घटित हो रही हो। शोभायात्रा के दौरान कई श्रद्धालु भगवान श्रीराम के स्वरूपों को देखकर भावुक हो गए। कुछ लोग हाथ जोड़कर नमन करते नजर आए तो कई श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं।
आस्था, संस्कृति और विकास का संगम बना दसवां दीपोत्सव
अयोध्या का दसवां दीपोत्सव इस बार भी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ प्रस्तुत करता दिखाई दिया। रामपथ पर निकली शोभायात्रा ने यह दिखाया कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। 21 झांकियों के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों को नई पीढ़ी के सामने रखने के साथ प्रदेश की विकास योजनाओं को भी प्रदर्शित किया गया। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने आयोजन में भारतीय संस्कृति के अलग-अलग रंग भर दिए।

