पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित बजाज ग्रुप की किनौनी शुगर मिल में कथित तौर पर गैंगस्टर ऊधम सिंह की आवभगत और मिल के महाप्रबंधक (GM) केपी सिंह से मुलाकात का मामला चर्चा में है। 7 सितंबर 2026 को हुई इस कथित मुलाकात के बाद कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, GM केपी सिंह के सामने नहीं आने और उनके अंडरग्राउंड होने की चर्चाएं भी सामने आई हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, 7 सितंबर को दोपहर के समय ऊधम सिंह अपने कुछ साथियों के साथ दो गाड़ियों में किनौनी शुगर मिल पहुंचा था। आरोप है कि दोनों गाड़ियों पर फर्जी नेमप्लेट लगी हुई थीं। मिल के मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर बिना किसी विशेष पूछताछ के गेट खोल दिया। इतना ही नहीं, मिल के कर्मचारी और अधिकारी भी उसके स्वागत के लिए मौजूद बताए जा रहे हैं।
बताया जाता है कि मिल परिसर में पहुंचने के बाद ऊधम सिंह अपने साथियों के साथ GM केपी सिंह के कार्यालय में गया। उसके साथ आए अधिकांश लोगों ने चेहरे पर मास्क लगा रखे थे। कार्यालय में चाय-नाश्ते के बीच मुलाकात हुई और कुछ देर बाद सभी वहां से चले गए।
इस मुलाकात को लेकर सबसे गंभीर आरोप टेंडर, सीजनल नौकरियों और रंगदारी से जुड़े हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि बैठक में मिल के टेंडर, गैंग के सदस्यों को मौसमी रोजगार दिलाने और अन्य आर्थिक गतिविधियों को लेकर बातचीत हुई थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद जांच शुरू होने की बात कही जा रही है। वहीं, GM केपी सिंह की ओर से इस मुलाकात को सामान्य मुलाकात बताया गया। दूसरी तरफ, गन्ना किसानों और किसान संगठनों के दबाव से निपटने के लिए गैंगस्टर के प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। दावा है कि इसके बदले टेंडर और नौकरियों के जरिए कथित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
गौरतलब है कि ऊधम सिंह के खिलाफ 71 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की बात कही जाती है। ऐसे में एक बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान में उसकी कथित आवभगत और अधिकारियों के साथ मुलाकात ने सुरक्षा व्यवस्था और उद्योग जगत के साथ अपराधियों के संभावित संबंधों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब अहम सवाल यह है कि आखिर एक कथित गैंगस्टर को शुगर मिल परिसर में इस तरह प्रवेश कैसे मिला? क्या मुलाकात महज औपचारिक थी या इसके पीछे कोई बड़ा व्यावसायिक और आपराधिक गठजोड़ था? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान से ही स्पष्ट हो सकेगा।

