वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव अब एक और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना की कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमला किया है। अमेरिकी दावों के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने की दिशा में करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। वहीं, इससे पहले अमेरिका ने ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव के साथ-साथ तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
5 तेल टैंकरों को अमेरिका ने बनाया निशाना
अमेरिकी सेना के मुताबिक, मंगलवार 8 सितंबर को ओमान की खाड़ी और ईरान के खार्ग द्वीप के आसपास पांच तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनमें चार टैंकर ओमान की खाड़ी में, जबकि एक टैंकर खार्ग द्वीप के पास निशाने पर आया। अमेरिका का दावा है कि ये टैंकर ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े एक बड़े शैडो नेटवर्क का हिस्सा थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए ईरान और उसके सहयोगियों के लिए अरबों डॉलर की रकम जुटाई जाती है। अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि कार्रवाई से पहले टैंकरों में मौजूद चालक दल को जहाज खाली करने का निर्देश दिया गया था।
अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने दावा किया कि ईरान ने पिछले दो दिनों के दौरान अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की। अमेरिकी सेना के अनुसार, दोनों प्रयासों को नाकाम कर दिया गया और किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा। अमेरिका का कहना है कि इसी कथित हमले के जवाब में ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
जवाब में ईरान ने दागीं 20 मिसाइलें
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ घंटे बाद तनाव और बढ़ गया। ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने की दिशा में करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने 18 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। शुरुआती दावों के मुताबिक इस हमले में बड़े पैमाने पर नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि, इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण यह हमला अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के संभावित विस्तार की ओर भी संकेत करता है।
होर्मुज स्ट्रेट में भी बढ़ा तनाव
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरान के मुताबिक, उसने इस इलाके में 10 जहाजों को निशाना बनाया। इनमें दो अमेरिकी जहाज और आठ तेल टैंकर शामिल बताए गए हैं। ईरान का आरोप है कि ये जहाज प्रतिबंधित क्षेत्र से होकर गुजर रहे थे। अगर इन दावों की पुष्टि होती है तो यह घटनाक्रम वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस मार्ग पर तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।
रूबियो की खुली चेतावनी- ‘टैंकर गंवाने पड़ेंगे’
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी ईरान को सख्त संदेश दिया है। कोलंबिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रूबियो ने कहा कि अगर ईरान अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसका जवाब देगा। रूबियो के मुताबिक, ईरान जब भी अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमला करेगा या ऐसा करने की कोशिश करेगा, तो उसे अपने तेल टैंकरों की कीमत चुकानी पड़ सकती है। इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका आगे भी ईरान से जुड़े समुद्री और तेल ढांचे के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
कुवैत और बहरीन के पास भी बढ़ा खतरा
तनाव सिर्फ ईरान और अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के IRGC ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के आसपास मौजूद कुछ तेल टैंकरों को भी चेतावनी दी है। ईरान की ओर से कथित तौर पर इन जहाजों के चालक दल को जहाज खाली करने के लिए कहा गया है। चेतावनी में यह भी कहा गया कि अगर किसी जहाज का संबंध अमेरिका से पाया गया तो उसे निशाना बनाया जा सकता है। इससे खाड़ी क्षेत्र में तेल की आवाजाही करने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम और बढ़ गया है।
खार्ग द्वीप पर कार्रवाई क्यों अहम?
अमेरिकी कार्रवाई में खार्ग द्वीप का नाम सामने आने के बाद इस जगह की रणनीतिक अहमियत भी चर्चा में है। खार्ग ईरान के प्रमुख कच्चे तेल निर्यात टर्मिनलों में से एक है। ईरान के तेल निर्यात के लिए यह इलाका बहुत जरूरी है। ईरान के कच्चे तेल को पाइपलाइनों के जरिए खार्ग द्वीप तक पहुंचाया जाता है और वहां से अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भेजा जाता है। ऐसे में इस इलाके के आसपास किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर ईरान के साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका रहती है।
अमेरिका पहले भी कर चुका है ऐसी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। इससे पहले 5 सितंबर को तीन ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई थी। अमेरिकी सेना ने उस कार्रवाई को भी ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश से जोड़कर देखा था। अब पांच और टैंकरों पर कार्रवाई और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की दिशा में मिसाइल हमले ने तनाव को और गंभीर बना दिया है।
अमेरिकी सब-मरीन ड्रोन पकड़ने का ईरान का दावा
इसी बीच ईरान के IRGC ने एक और बड़ा दावा किया है। उसने कहा है कि उसके बलों ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी सब-मरीन ड्रोन को पकड़ लिया है। IRGC ने कथित तौर पर इसकी तस्वीर भी जारी की है। बताया गया है कि तस्वीर में दिखाई देने वाला अंडरवाटर ड्रोन अमेरिकी कंपनी एंड्यूरिल के Dive-LD मॉडल से मिलता-जुलता है। इस तरह के मानव रहित अंडरवाटर सिस्टम लंबे समय तक पानी के भीतर मिशन कर सकते हैं और इनका इस्तेमाल समुद्री निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने तथा समुद्री बारूदी सुरंगों की पहचान जैसे कार्यों में किया जा सकता है। हालांकि, ड्रोन को लेकर ईरान के दावे और उसकी पहचान से जुड़ी जानकारी को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने की जरूरत है।
क्या है टकराव का परिणाम?
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का यह नया दौर केवल दोनों देशों तक सीमित रहने वाला मामला नहीं है। तेल टैंकर, होर्मुज स्ट्रेट, अमेरिकी सैन्य ठिकाने और समुद्री ड्रोन – इन सभी घटनाओं ने संघर्ष के कई मोर्चे खोल दिए हैं। अगर आने वाले दिनों में हमले और जवाबी हमले जारी रहते हैं, तो खाड़ी क्षेत्र में समुद्री यातायात प्रभावित होने के साथ वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ सकता है।

