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यूपी में बनेगा एक्सप्रेसवे का विशाल नेटवर्क, 932 KM के 8 नए कॉरिडोर पर 67,800 करोड़ खर्च करने की तैयारी

यूपी में बनेगा एक्सप्रेसवे का विशाल नेटवर्क, 932 KM के 8 नए कॉरिडोर पर 67,800 करोड़ खर्च करने की तैयारी

उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने की तैयारी चल रही है। प्रदेश में पहले से संचालित और निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना सामने आई है। इसके तहत करीब 932 किलोमीटर लंबाई के आठ नए लिंक और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे विकसित करने का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं पर लगभग 67,800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। योजना का उद्देश्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को तेज रफ्तार सड़कों से जोड़ना, यात्रा का समय घटाना और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।

यूपी में बनेगा एक्सप्रेसवे ग्रिड, कई जिलों को मिलेगा फायदा
उत्तर प्रदेश में आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख कॉरिडोर पहले से सड़क परिवहन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अब इन मार्गों के बीच सीधी कनेक्टिविटी विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे यात्रियों को एक एक्सप्रेसवे से दूसरे तक पहुंचने के लिए शहरों के भीड़भाड़ वाले रास्तों से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है।

इस नेटवर्क का लाभ पश्चिमी यूपी से लेकर बुंदेलखंड, पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र तक पहुंचने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से माल ढुलाई आसान होने, औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ने और पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। हालांकि, परियोजनाओं की अंतिम लागत, रूट और निर्माण समयसीमा संबंधित सरकारी मंजूरी तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।

1. झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को झांसी और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) के प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ने की योजना है। लगभग 119 किलोमीटर लंबे इस छह लेन के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसकी निर्माण लागत करीब 5,000 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि जमीन अधिग्रहण सहित कुल खर्च लगभग 7,968 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। प्रस्तावित समयसीमा के मुताबिक, निर्माण में करीब तीन साल लग सकते हैं।

2. जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे: एयरपोर्ट तक आसान पहुंच
जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे की योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब 75 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित छह लेन के मार्ग में लगभग नौ किलोमीटर एलिवेटेड सड़क बनाने की बात कही गई है।

इससे बुलंदशहर और आसपास के क्षेत्रों के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा एनसीआर के यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। परियोजना को पूरा करने के लिए लगभग ढाई से तीन साल की अवधि का अनुमान दिया गया है।

3. लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे: शहर के ट्रैफिक से मिलेगी राहत
प्रस्तावित लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। लगभग 51 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत 4,776 करोड़ रुपये बताई गई है।

इस कॉरिडोर के विकसित होने से आगरा और दिल्ली-एनसीआर की ओर से गाजीपुर तथा बिहार की दिशा में जाने वाले वाहनों को लखनऊ शहर के अंदर प्रवेश करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे समय और ईंधन की बचत होने के साथ शहर के यातायात पर दबाव घटने की उम्मीद है।

4. फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे: कई जिलों को जोड़ने की तैयारी
करीब 91 किलोमीटर लंबा फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को फर्रुखाबाद के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की प्रस्तावित योजना है। इसकी अनुमानित लागत 5,500 से 6,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

इस मार्ग से इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई और शाहजहांपुर जैसे जिलों को बेहतर सड़क संपर्क मिल सकता है। कृषि उत्पादों की ढुलाई और स्थानीय कारोबार के लिए भी यह कॉरिडोर उपयोगी साबित हो सकता है।

5. चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे: धार्मिक पर्यटन को मिलेगा सहारा
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को चित्रकूट धाम और मध्य प्रदेश की सीमा की दिशा में जोड़ने के लिए प्रस्तावित है। करीब 15 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की लागत लगभग 800 करोड़ रुपये बताई गई है।

इससे चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। साथ ही बुंदेलखंड के सीमावर्ती इलाकों में आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है।

6. विंध्य एक्सप्रेसवे: पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र को जोड़ेगा
प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे इस योजना की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 320 से 333 किलोमीटर लंबे इस छह लेन के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को प्रयागराज से मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र होते हुए मध्य प्रदेश की सीमा के निकट सिंगरौली क्षेत्र तक विकसित करने की बात कही गई है।

इसकी अनुमानित लागत करीब 25,000 करोड़ रुपये है और इसे पूरा करने के लिए लगभग चार साल का लक्ष्य बताया गया है। बेहतर कनेक्टिविटी से विंध्य क्षेत्र के खनन, ऊर्जा और औद्योगिक केंद्रों को बड़े बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

7. विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे: वाराणसी-गाजीपुर क्षेत्र को फायदा
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए विंध्य एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है। करीब 117 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित छह लेन के मार्ग पर 7,500 से 8,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इससे सोनभद्र और मिर्जापुर जैसे क्षेत्रों का वाराणसी, गाजीपुर और आसपास के इलाकों से सड़क संपर्क बेहतर हो सकता है। परियोजना की प्रस्तावित समयसीमा करीब तीन साल बताई गई है।

8. हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे: उत्तराखंड जाना होगा आसान
हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हरिद्वार, रुड़की और उत्तराखंड की सीमा से जोड़ने की योजना का हिस्सा है। इसकी प्रस्तावित लंबाई लगभग 120 से 146 किलोमीटर और अनुमानित लागत करीब 10,500 करोड़ रुपये बताई गई है।

इस कॉरिडोर के बनने से मेरठ, मुजफ्फरनगर और एनसीआर की ओर से हरिद्वार तथा उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान हो सकता है। इससे धार्मिक पर्यटन, व्यापार और यात्रियों की आवाजाही को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

यूपी की अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा?
इन आठ परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग एक्सप्रेसवे को एक-दूसरे से जोड़कर यात्रा और माल परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना है। इससे औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों, पर्यटन स्थलों और प्रमुख शहरों के बीच संपर्क मजबूत हो सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी मददगार हो सकता है।

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