नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रस्तावित विरोध मार्च को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। लगातार तीसरे दिन दिल्ली हाई अलर्ट पर रही। पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के 30 हजार से अधिक जवानों को अलग-अलग इलाकों में तैनात किया गया है। विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।
दिल्ली की सीमाओं से संवेदनशील इलाकों तक निगरानी
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने राजधानी के प्रवेश मार्गों, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी है। सीमाओं पर आने-जाने वाले वाहनों की जांच की जा रही है। इसके साथ ही होटलों, गेस्ट हाउस, लॉज और धर्मशालाओं में भी सत्यापन अभियान तेज किया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी तरह की परेशानी न हो।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था संभालने में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 120 से अधिक कंपनियां दिल्ली पुलिस की मदद कर रही हैं। नई दिल्ली जिले को 20 जोन में बांटकर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर हालात का जायजा ले रहे हैं, जबकि विशेष पुलिस इकाइयां भी लगातार निगरानी कर रही हैं।
छह मेट्रो स्टेशन बंद रखने का फैसला
विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के छह स्टेशनों को शाम चार बजे तक बंद रखने की व्यवस्था की गई। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचाव करना है। पुलिस सोशल मीडिया पर भी नजर बनाए हुए है, ताकि प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों और लोगों को जुटाने की कोशिशों पर समय रहते जानकारी मिल सके।
इससे पहले सप्ताहांत में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। ऐसे में प्रशासन इस बार पहले से सतर्क नजर आ रहा है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के बीच आम लोगों की आवाजाही और यातायात पर भी असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
निर्वाचन आयोग को लेकर उठे सवालों के बीच प्रदर्शन
INDIA गठबंधन ने 11 अक्टूबर को मार्च की घोषणा करते हुए चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। यह विरोध मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सामने आया है। इसी बीच, एक मीडिया रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग के भीतर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत कुछ मुद्दों पर असहमति का दावा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में कई बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

