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लखनऊ का फरार सतपाल सिंह गिरफ्तारी से बचने पहुंचा कोर्ट, FIR छिपाकर आज़मगढ़ से बनवाया चरित्र प्रमाणपत्र; मुकदमा दर्ज

लखनऊ का फरार सतपाल सिंह गिरफ्तारी से बचने पहुंचा कोर्ट, FIR छिपाकर आज़मगढ़ से बनवाया चरित्र प्रमाणपत्र; मुकदमा दर्ज

लखनऊ के यश बिल्डर के निदेशक सतपाल सिंह पर मुकदमों की जानकारी छिपाकर चरित्र प्रमाणपत्र हासिल करने की कोशिश के आरोप में आजमगढ़ के अहरौला थाने में एफआईआर दर्ज है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही है। गिरफ्तारी से बचने के लिए सतपाल सिंह ने हाईकोर्ट की प्रयागराज बेंच का रुख किया है। उसकी याचिका सुनवाई प्रस्तावित है। मुकदमा 29 अगस्त को दर्ज होने के बावजूद पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

शपथ पत्र में मुकदमे की जानकारी न देने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, सतपाल सिंह ने फरवरी 2026 में चरित्र प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि आवेदन के साथ दिए शपथ पत्र में उसने खुद को ग्राम पखनपुर का निवासी बताते हुए पूरे भारत में अपने खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं होने की जानकारी दी।

जांच के दौरान पुलिस को लखनऊ स्थित उसके पते पर कई मुकदमे दर्ज होने की जानकारी मिली। इसके बाद अहरौला थाने में शपथ पत्र में तथ्य छिपाने और कूटरचना के आरोप में FIR दर्ज की गई। पुलिस उपनिरीक्षक नितेश कुमार चौबे की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ है।

मेरठ में 60 करोड़ से ज्यादा के CM-GRID काम पर भी सवाल
आजमगढ़ में मुकदमा दर्ज होने के बाद सतपाल सिंह की मेरठ में CM GRID परियोजना के तहत मिली ठेकेदारी भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि यश बिल्डर और उसकी सहयोगी फर्म SS Infra Zone को मिलाकर 60 करोड़ रुपये से अधिक के काम मिले हैं। करीब 33.26 करोड़ रुपये की अतिरिक्त GST राशि को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में सतपाल सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमों और चरित्र प्रमाणपत्र से जुड़ी जानकारी सामने नहीं रखी गई। मेरठ नगर निगम की ओर से पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि टेंडर के समय कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे और पात्रता का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था।

48 लाख की धोखाधड़ी की एफआईआर भी दर्ज
सतपाल सिंह के खिलाफ लखनऊ के विभूतिखंड थाने में भी धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है। विक्रांतखंड निवासी रंजना सिंह ने आरोप लगाया कि चिनहट की कॉलोनी में प्लॉट देने के नाम पर उनसे 48 लाख रुपये लिए गए। रंजना के मुताबिक, वर्ष 2023 में उनके बेटों ने प्लॉट के लिए सतपाल से संपर्क किया था। बैंक लोन के जरिए 48 लाख रुपये दिए गए।

छह अप्रैल 2024 को जमीन का दाखिल-खारिज भी हो गया, लेकिन निर्माण शुरू कराने पहुंचने पर पड़ोसी किसान ने काम रुकवा दिया। आरोप है कि किसान ने बिल्डर से अपना लेनदेन पूरा नहीं होने की बात कही। महिला के मुताबिक, करीब दो साल बाद भी उसे प्लॉट पर कब्जा नहीं मिला और रकम वापस मांगने पर भी टालमटोल की गई।

गिरफ्तारी से राहत के लिए हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका
अहरौला थाने में दर्ज केस के बाद पुलिस सतपाल सिंह की तलाश में जुटी है। गिरफ्तारी की कार्रवाई के बीच उसने हाईकोर्ट की प्रयागराज बेंच में याचिका दाखिल की है। इसमें गिरफ्तारी पर रोक की मांग की गई है। फिलहाल याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है।

 

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