अगर आप वजन कम करने (मोटापा) या ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने की कोशिश कर रहे हैं, तो सबसे पहले अक्सर कार्बोहाइड्रेट यानी कार्ब्स को कम करने की सलाह सुनने को मिलती है। कई लोग इसी वजह से चावल, रोटी या दूसरे कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों को पूरी तरह छोड़ देते हैं। लेकिन क्या हर कार्ब खराब होता है? ऐसा नहीं है। शरीर को ऊर्जा देने में कार्बोहाइड्रेट की अहम भूमिका होती है और इन्हें पूरी तरह डाइट से हटाना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है।
असल में जरूरत इस बात को समझने की है कि आप किस तरह के कार्ब्स खा रहे हैं, उनकी मात्रा कितनी है और वे किस तरह के पूरे भोजन का हिस्सा हैं। इसी कड़ी में सिंपल और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स का अंतर समझना काफी उपयोगी हो सकता है।
कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए क्यों जरूरी हैं?
खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट पाचन के दौरान छोटे अणुओं में टूटते हैं, जिनमें ग्लूकोज प्रमुख है। शरीर की कोशिकाएं इसका इस्तेमाल ऊर्जा के लिए करती हैं। दिमाग समेत शरीर के कई हिस्सों को लगातार ऊर्जा की जरूरत होती है।
कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से शुगर, स्टार्च और फाइबर के रूप में भोजन में पाए जाते हैं। फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज जैसे खाद्य पदार्थ कार्ब्स के साथ फाइबर, विटामिन और मिनरल भी दे सकते हैं। वहीं मीठे पेय, मिठाइयां और कई अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में एडेड शुगर और कैलोरी अधिक हो सकती है।
सिंपल कार्ब्स क्या होते हैं?
सिंपल कार्बोहाइड्रेट अपेक्षाकृत छोटी शुगर संरचनाओं से बने होते हैं। ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, सुक्रोज और लैक्टोज इसके उदाहरण हैं। दिलचस्प बात यह है कि सिंपल कार्ब्स सिर्फ मिठाई या चीनी में ही नहीं पाए जाते। फलों में प्राकृतिक शुगर और दूध में लैक्टोज भी मौजूद होता है।
इसलिए हर सिंपल कार्ब को सीधे अनहेल्दी मानना सही नहीं होगा। समस्या तब बढ़ सकती है जब डाइट में एडेड शुगर वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा ज्यादा हो जाए। मिठाइयां, शुगरी ड्रिंक्स, कैंडी, मीठे डेजर्ट और कई पैकेज्ड फूड इसके उदाहरण हैं। पूरे फल को सिर्फ इसलिए खराब विकल्प नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि उसमें प्राकृतिक शुगर होती है। फल में फाइबर और कई अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं।
कॉम्प्लेक्स कार्ब्स से क्या समझें?
कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट में शुगर यूनिट्स लंबी चेन के रूप में जुड़ी होती हैं। साबुत अनाज, दालें और फलियां इसके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। ओट्स, जौ, ब्राउन राइस, साबुत गेहूं, बीन्स, छोले और दालें इसके उदाहरण हैं।
इनमें से कई खाद्य पदार्थ फाइबर से भरपूर होते हैं, जिसके कारण उनका पाचन कुछ रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों की तुलना में धीमा हो सकता है। साथ ही इनमें कई जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी मिल सकते हैं।
हालांकि, यहां भी एक जरूरी बात समझना महत्वपूर्ण है। हर कॉम्प्लेक्स कार्ब अपने आप लो-जीआई या ब्लड शुगर के लिए बेहतर विकल्प नहीं बन जाता। किसी भोजन का असर उसकी प्रोसेसिंग, पकाने के तरीके, मात्रा और पूरे भोजन के संयोजन पर भी निर्भर कर सकता है।
सिंपल और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स में क्या अंतर है?
सामान्य तौर पर सिंपल कार्ब्स की संरचना छोटी होती है, जबकि कॉम्प्लेक्स कार्ब्स में लंबी चेन होती है। मिठाई और मीठे पेय सिंपल कार्ब्स के आम उदाहरण हैं, जबकि साबुत अनाज, दालें और फलियां कॉम्प्लेक्स कार्ब्स के प्रमुख स्रोत हैं। लेकिन सिर्फ इस आधार पर किसी भोजन को अच्छा या खराब तय करना सही नहीं है। उदाहरण के लिए किसी खाद्य पदार्थ में कार्ब्स की मात्रा के साथ फाइबर, प्रोटीन, फैट, प्रोसेसिंग और सर्विंग साइज भी मायने रखते हैं।
क्या वजन घटाने के लिए चावल छोड़ना जरूरी है?
वजन कम करने के लिए चावल को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं माना जा सकता। ज्यादा महत्वपूर्ण है कि कुल डाइट में कितनी कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट लिए जा रहे हैं और भोजन कितना संतुलित है। चावल खाते समय मात्रा पर ध्यान देने के साथ उसे दाल, सब्जियों, सलाद या प्रोटीन के किसी स्रोत के साथ शामिल करना भोजन को ज्यादा संतुलित बना सकता है। जरूरत व्यक्ति की कुल डाइट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
डायबिटीज में कार्ब्स को लेकर क्या करें?
डायबिटीज होने पर भी कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह खत्म करना सामान्य नियम नहीं है। ध्यान भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और दिनभर के कार्बोहाइड्रेट वितरण पर दिया जाता है। साबुत अनाज, दालें, चने, बीन्स, सब्जियां और पूरे फल जैसे पोषक विकल्प डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। वहीं मीठे पेय, ज्यादा एडेड शुगर और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की मात्रा सीमित करना उपयोगी हो सकता है। डायबिटीज वाले व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत भोजन योजना डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटीशियन की सलाह के अनुसार तय करना बेहतर रहता है।
कार्ब्स छोड़ने से ज्यादा जरूरी है सही चुनाव
कार्बोहाइड्रेट को दुश्मन मानकर डाइट से पूरी तरह हटाने के बजाय यह समझना ज्यादा जरूरी है कि प्लेट में किस तरह के कार्ब्स और कितनी मात्रा शामिल है। पूरे और कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना, पर्याप्त फाइबर लेना और भोजन में संतुलन बनाए रखना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। यानी वजन और ब्लड शुगर मैनेजमेंट का फोकस “चावल खाएं या न खाएं” पर डिपेंड नहीं है बल्कि क्या खा रहे हैं, कितना खा रहे हैं और पूरे दिन की डाइट कैसी है, इस पर होना चाहिए।

