राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव में आज बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की। हालिया Gen -Z प्रदर्शन, एथनॉल पर गुस्सा और सवर्णों की नाराजगी के बीच संपन्न हुए राजस्थान नगर निकाय चुनाव पर हर किसी की नजर थी, हर कोई इन चुनावों को भाजपा के लिए लिटमस टेस्ट के रूप में देख रहा था।
विधानसभा-लोकसभा चुनाव के बाद सम्पन हुए इन नगर निकाय चुनावों ने 5 साल पुरानी पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी है, गौरतलब है कि पिछली बार राज्य में कांग्रेस सरकार के समय हुए चुनावों में कुल 196 नगरीय निकायों में से 123 पर कांग्रेस ने अपना बोर्ड बनाया था, जबकि भाजपा सिर्फ 64 निकायों पर सिमट गई थी। बाकी 9 निकायों में निर्दलीय व अन्य थे
इस बार भाजपा ने सत्ता में होने का फायदा उठाते हुए बड़ी बढ़त बनाई है। कुल 309 निकायों में से भाजपा ने बढ़त हासिल की है और 10 बड़े नगर निगमों में से 5 पर कब्जा जमाया है। कांग्रेस को केवल 1 नगर निगम (बीकानेर) में स्पष्ट बहुमत मिला है, जबकि 4 नगर निगमों में त्रिशंकु (Hung) की स्थिति है।
पिछले 5 सालों में परिसीमन और नए निकायों के गठन के कारण वार्डों की संख्या 7,500 से बढ़कर 10,245 हो गई –
पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 3,036 वार्ड जीते थे और भाजपा ने 2,676। लेकिन 2026 के नतीजों में भाजपा ने करीब 4,179 वार्ड जीतकर पहला स्थान हासिल किया है, वहीं कांग्रेस 3,613 वार्डों के साथ दूसरे नंबर पर खिसक गई है। भाजपा की सीटों के प्रतिशत में करीब 5% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कांग्रेस को करीब 5% का नुकसान उठाना पड़ा है।
2,273 से अधिक वार्डों में निर्दलीयों ने जीत दर्ज की है। कई बड़े शहरों में ये ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर नगर निगम में तो निर्दलीयों ने 65 में से 36 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है।
अगर हम पारंपरिक गढ़ों में सेंधमारी को बात करें तो पिछले 5 सालों में कई बड़े नेताओं के पारंपरिक गढ़ों के समीकरण बदल गए हैं –
झालावाड़ में कांग्रेस का उलटफेर: पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने 45 में से 29 सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया।
पाली और अजमेर: भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले पाली और अजमेर में इस बार कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन कर बढ़त बनाई है।
बारां और अन्य क्षेत्र: आम आदमी पार्टी (AAP) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) जैसे क्षेत्रीय दलों ने भी कुछ चुनिंदा निकायों में किंगमेकर बनकर पारंपरिक भाजपा बनाम कांग्रेस द्विदलीय मुकाबले को प्रभावित किया है।
इन चुनावों ने एक बात और साफ़ कर दी है कि, भाजपा का परम्परगत वोट अभी पार्टी से छिटका नहीं है, CM भजनलाल को रबर स्टंप मुख्यमंत्री बताने वालों के मुँह पर भी ताला लग गया है और सबसे महत्वपूर्ण बात जो लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि इन चुनावों में के परिणाम को मोदी की छवि से जोड़ेंगे, उनकी भी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

