• info@thevaarta.com

‘कोर्ट से नहीं, जनता से मांगिए माफी’, देवरिया पुलिस पर हाईकोर्ट सख्त; SHO की सैलरी से वसूला जाएगा ₹65 हजार मुआवजा

‘कोर्ट से नहीं, जनता से मांगिए माफी’, देवरिया पुलिस पर हाईकोर्ट सख्त; SHO की सैलरी से वसूला जाएगा ₹65 हजार मुआवजा

प्रयागराज। देवरिया में कथित अवैध हिरासत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न सिर्फ हिरासत को लेकर सवाल उठाए, बल्कि थाने के CCTV सिस्टम और उसकी रिकॉर्डिंग को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की। अदालत ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ताओं को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस रकम की वसूली संबंधित SHO की सैलरी से करने के निर्देश दिए गए हैं।

अवैध हिरासत पर कोर्ट ने तय की जवाबदेही
मामले में याचिकाकर्ताओं को अलग-अलग अवधि तक कथित तौर पर हिरासत में रखे जाने का आरोप था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता नंबर 2, 3 और 4 को 20-20 हजार रुपये, जबकि याचिकाकर्ता नंबर 1 को 5 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने साफ किया कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं है, बल्कि हिरासत में रखे गए लोगों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।

CCTV रिकॉर्डिंग नहीं मिली तो कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान थाने के CCTV कैमरों की कार्यप्रणाली और रिकॉर्डिंग को लेकर कोर्ट ने SHO से कई सवाल किए। जस्टिस जे. अतुल श्रीधरन ने पूछा कि यदि 14 अप्रैल से CCTV कैमरा काम कर रहा था, तो उसकी रिकॉर्डिंग कहां है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि SHO करीब दो महीने तक पद पर रहे, ऐसे में रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी थी।

SHO इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पुलिस की ओर से बताया गया कि 13 अप्रैल की कुछ रिकॉर्डिंग उपलब्ध थी और CCTV सिस्टम को रीसेट करना पड़ा था। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि तकनीकी समस्या आने पर CCTV कंपनी के विशेषज्ञों को बुलाकर उसकी जांच क्यों नहीं कराई गई।

SP की माफी पर कोर्ट की दो टूक
सुनवाई के दौरान जब SP ने अदालत से माफी मांगी तो जस्टिस श्रीधरन ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा- “कोर्ट से माफी मत मांगिए। जनता से माफी मांगिए।” कोर्ट ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि लापरवाही सामने आने के बावजूद संबंधित SHO को निलंबित क्यों नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों के सामने मुआवजे की रकम बढ़ाने की संभावना भी रखी और पूछा कि क्या दोनों अधिकारियों पर प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये का मुआवजा लगाया जाए।

पुलिस शपथ पर भी उठाया सवाल
अदालत ने SHO से पुलिस अकादमी में ली गई शपथ को लेकर भी सवाल किया। हालांकि, SHO इस सवाल का जवाब नहीं दे सके। CCTV रिकॉर्डिंग की अनुपलब्धता, कथित अवैध हिरासत और अधिकारियों के जवाबों से नाराज हाईकोर्ट ने मुआवजे की रकम SHO के वेतन से वसूलने का आदेश देकर पुलिसकर्मियों की जवाबदेही को लेकर सख्त संदेश दिया है।

Related Articles

Leave a Reply