लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में जलभराव की समस्या ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई मोहल्लों में बारिश का पानी सड़कों और गलियों में जमा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को इसी पानी के बीच से होकर आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई जगह वाहन पानी में डूब गए हैं, जिन्हें बाहर निकालने के लिए पंप की मदद से जलनिकासी की जा रही है।
कई मोहल्लों में अब भी पानी का संकट
गोमती नदी से जुड़े फैजुल्लागंज इलाके में जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। हर साल बारिश के दौरान यहां के कई हिस्से पानी की चपेट में आ जाते हैं। इस बार दाऊदनगर, मामा कॉलोनी, पवन विहार, अलीगंज और गोमती विहार समेत कई इलाकों में लोग जलभराव से परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलनिकासी की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है। हालांकि सरकार की ओर से करीब 55 करोड़ रुपये की लागत से नाले का निर्माण कराया गया है, जिससे कई इलाकों को राहत मिली है, लेकिन कुछ हिस्सों में समस्या अभी भी बनी हुई है।
अनियोजित विकास बना बड़ी चुनौती
फैजुल्लागंज का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हुआ है। अनियोजित तरीके से बसे इस इलाके को नगर निगम को चार वार्डों में बांटना पड़ा। इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग का सिलसिला जारी रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप है कि नदी किनारे की जमीनों को पहले तो प्लॉट के रूप में बेच दिया गया, लेकिन जलनिकासी और बुनियादी सुविधाओं का पर्याप्त इंतजाम नहीं किया गया। ऐसे में बारिश के दौरान इसका खामियाजा स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ता है।
तीन हफ्ते से जलभराव, 4 हजार लोग प्रभावित
सामाजिक कार्यकर्ता ममता त्रिपाठी के मुताबिक, इलाके में करीब तीन सप्ताह से जलभराव की स्थिति बनी हुई है और लगभग चार हजार निवासी प्रभावित हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जलभराव के बावजूद एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग नहीं हो रही है, जिससे मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश चंद्र वर्मा का कहना है कि जिन इलाकों में पानी जमा है, वे लो-लाइन एरिया हैं। वहां पंप लगाकर पानी निकालने का काम किया जा रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों की परेशानी को देखते हुए अब स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही है।

