दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के अचानक ढहने से हुई मौतों ने राजधानी में अवैध और जर्जर निर्माण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में 7 लोगों की मौत और 6 लोगों के घायल होने के बाद अब नगर निगम ने पूरी दिल्ली की इमारतों की सुरक्षा जांच कराने का फैसला किया है। MCD ने सभी जोन के बिल्डिंग विभाग से जुड़े एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को अपने-अपने इलाकों में निरीक्षण कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
इस जांच का मकसद जर्जर इमारतों की पहचान करना और यह पता लगाना भी है कि कहीं नियमों के खिलाफ अतिरिक्त मंजिलें बनाकर तो भवनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। सत्य निकेतन हादसे के बाद खास तौर पर उन इलाकों पर नजर है, जहां पुराने मकानों को PG और हॉस्टल में बदलकर बड़ी संख्या में छात्रों को ठहराया जा रहा है।
28 घंटे चला रेस्क्यू, मलबे से निकाले गए 12 लोग
सत्य निकेतन में रविवार को इमारत गिरने के बाद शुरू हुआ राहत और बचाव अभियान करीब 28 घंटे तक चला। बचाव दल ने मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला, लेकिन इनमें से 7 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे में घायल 6 लोगों में से 3 की हालत गंभीर बताई गई है। घटना के बाद दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, MCD और राहत एजेंसियों की टीमें लगातार मौके पर मौजूद रहीं। मलबे की जांच पूरी होने के बाद अब हादसे की परिस्थितियों और इमारत की संरचनात्मक स्थिति से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
27.84 लाख इमारतों के सर्वे में सिर्फ 19 खतरनाक?
सत्य निकेतन हादसे के बीच MCD के पुराने सर्वे का आंकड़ा भी चर्चा में है। निगम के अनुसार, इस साल की शुरुआत में दिल्ली में 27 लाख 84 हजार 286 इमारतों का सर्वे किया गया था। इनमें सिर्फ 19 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े शहर में क्या वास्तव में इतनी कम इमारतें ही सुरक्षा के लिहाज से जोखिम वाली हैं? सत्य निकेतन जैसी घटना के बाद नए सिरे से निरीक्षण के आदेश को इसी चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच से मिलने वाली जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में भी शामिल किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होनी है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, PG संचालकों की भी तलाश
पुलिस ने हादसे के मामले में संपत्ति की मालकिन उर्मिला गुप्ता, उनके पति हरिराम गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, संपत्ति उर्मिला गुप्ता के नाम पर दर्ज थी, जबकि उसके प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी पति और बेटे के पास थी। तीनों को सोमवार रात पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत मिली है। इसके अलावा पुलिस अब PG चलाने वाले संचालकों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच का दायरा यह पता लगाने तक बढ़ाया जा रहा है कि इमारत में किस तरह का निर्माण या बदलाव किया जा रहा था और उसमें सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
MCD के पांच अधिकारी सस्पेंड
हादसे के बाद MCD ने अपने स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें चार इंजीनियरिंग अधिकारी भी शामिल हैं। विभागीय जांच पूरी होने तक इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को सौंपा गया है, जो फिलहाल साउथ वेस्ट जोन के डिप्टी कमिश्नर हैं।
सत्य निकेतन में 300 मकान, करीब 170 में PG
सत्य निकेतन का मौजूदा स्वरूप इस हादसे को और गंभीर बनाता है। यह इलाका मूल रूप से 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए विकसित किया गया था। बाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी का साउथ कैंपस विकसित होने के साथ यहां छात्रों की संख्या बढ़ती गई और मकानों का इस्तेमाल धीरे-धीरे PG के तौर पर होने लगा। बताया जाता है कि इलाके में करीब 300 मकान हैं, जिनमें लगभग 170 में PG चल रहे हैं। यानी बड़ी संख्या में ऐसे भवन हैं, जिनका इस्तेमाल मूल आवासीय ढांचे से अलग तरीके से हो रहा है।
अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट जगदीश ममगैन के मुताबिक, दिल्ली की कई पुरानी इमारतों को अतिरिक्त मंजिलों का भार उठाने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। उनके अनुसार, राजधानी के करीब 75 लाख घरों में से केवल लगभग 1.75 लाख इमारतों के पास स्वीकृत बिल्डिंग लेआउट प्लान हैं।
हादसे के बाद दिल्ली में सात बड़े फैसले
सत्य निकेतन की घटना के बाद प्रशासन ने कई मोर्चों पर कार्रवाई शुरू की है। चार मंजिल से ज्यादा वाले अवैध निर्माणों को तत्काल सील करने की बात कही गई है। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
जर्जर और खतरनाक इमारतों को गिराने के नोटिस दिए जा रहे हैं। हादसे वाली इमारत के पास मौजूद एक अन्य भवन को भी खाली कराया गया है और उसकी सुरक्षा के लिए सपोर्टिंग पिलर लगाए गए हैं।
दिल्ली के उपराज्यपाल ने PG हब में मौजूद इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं हाईकोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और MCD से जवाब मांगा है।
असली सवाल हादसे के बाद नहीं, पहले की निगरानी पर
सत्य निकेतन हादसे ने सिर्फ एक परिवार या एक इमारत को प्रभावित नहीं किया है। इसने दिल्ली के उन तमाम इलाकों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है, जहां पुराने मकानों में बड़ी संख्या में छात्र और किरायेदार रह रहे हैं। अगर किसी इमारत में अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी गईं, उसे PG में बदल दिया गया या उसकी संरचना में बदलाव हुआ, तो उसकी समय रहते जांच किसकी जिम्मेदारी थी? यही वह सवाल है जिसका जवाब अब प्रशासन को देना होगा।
हादसे के बाद सीलिंग, गिरफ्तारी और जांच जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि अगली बार किसी इमारत के गिरने का इंतजार न करना पड़े। दिल्ली में अगर व्यापक और ईमानदार स्ट्रक्चरल ऑडिट होता है, तो सत्य निकेतन की त्रासदी शायद भविष्य के बड़े हादसों को रोकने की वजह बन सकती है।

