देश में बन रहे नेशनल हाईवे की गुणवत्ता को बेहतर करने और निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक अहम कदम उठाया है। अब 20 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाले और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत के सभी हाईवे प्रोजेक्ट्स में ऑटोमेटेड एंड इंटेलिजेंट मशीन-एडेड कंस्ट्रक्शन (AI-MC) तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। NHAI ने इस संबंध में शुक्रवार को सर्कुलर जारी किया।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य हाईवे निर्माण के दौरान होने वाली गुणवत्ता संबंधी कमियों को कम करना है। सरकार लंबे समय से सड़क निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन को लेकर निगरानी बढ़ाने पर जोर देती रही है। AI आधारित मशीनों के इस्तेमाल से निर्माण कार्य को ज्यादा सटीक और वैज्ञानिक बनाने की कोशिश की जा रही है।
हर लेयर पर होगी टेक्नोलॉजी की निगरानी
नई व्यवस्था के तहत ठेकेदारों को केवल सड़क की ऊपरी सतह तैयार करते समय ही AI-MC का इस्तेमाल नहीं करना होगा, बल्कि प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर निर्माण के विभिन्न चरणों में इस तकनीक को लागू करना होगा। इसमें एम्बैंकमेंट, सबग्रेड और ग्रैन्युलर सब-बेस (GSB) जैसी प्रमुख निर्माण परतें शामिल हैं। GSB सड़क की शुरुआती महत्वपूर्ण परतों में से एक होती है, जिसे मिट्टी की तैयार सतह के ऊपर बिछाया जाता है। इसके ऊपर आगे सड़क की दूसरी परतें तैयार की जाती हैं। ऐसे में इस हिस्से की गुणवत्ता सड़क की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मशीनों बताएंगी निर्माण की स्थिति
AI-MC तकनीक की खासियत यह है कि इसमें सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों को आधुनिक सेंसर और ऑन-बोर्ड कंप्यूटर से लैस किया जाता है। ग्रेडर, पेवर, कॉम्पैक्टर और डोजर जैसी मशीनों से निर्माण के दौरान लगातार डेटा हासिल किया जा सकता है। इससे अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि काम निर्धारित मानकों के मुताबिक हो रहा है या नहीं। मशीनों से मिलने वाले डेटा के जरिए निर्माण प्रक्रिया की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, क्वालिटी कंट्रोल और डिजिटल रिकॉर्डिंग संभव होती है।
रियल-टाइम डेटा से बढ़ेगी जवाबदेही
NHAI की नई व्यवस्था में रियल-टाइम डेटा शेयरिंग को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। यानी निर्माण के दौरान मशीनों से मिलने वाली जानकारी NHAI अधिकारियों तक पहुंचती रहेगी। इससे किसी स्तर पर काम में कमी होने पर उसे समय रहते पहचाना जा सकता है। NHAI अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल निगरानी से मानवीय गलतियों को कम करने के साथ-साथ निर्माण कार्य में एकरूपता लाई जा सकेगी। इसके अलावा मिट्टी का काम शुरू होने से लेकर सड़क की विभिन्न परतें तैयार होने तक पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में पहले हुआ था इस्तेमाल
AI-MC तकनीक का इस्तेमाल भारत में पहले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान किया गया था। हालांकि उस प्रोजेक्ट में इसका उपयोग पूरी परियोजना और सभी निर्माण परतों में व्यापक रूप से नहीं किया गया था। अब NHAI ने बड़े और महंगे हाईवे प्रोजेक्ट्स में इस तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू करने का फैसला किया है। इससे भविष्य में सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी पहले के मुकाबले अधिक तकनीक आधारित हो सकती है।
डेटा साझा होना जरूरी
AI-MC से जुड़े क्षेत्र के विशेषज्ञों और कंपनियों का कहना है कि इस तकनीक का वास्तविक फायदा तभी मिलेगा, जब निर्माण के दौरान मिलने वाला डेटा संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ लगातार साझा किया जाए। बताया जाता है कि कुछ ठेकेदार रियल-टाइम डेटा शेयर करने से इसलिए बचते हैं क्योंकि इससे उनके काम की जवाबदेही बढ़ जाती है। ऐसे में नई व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती तकनीक लागू करने के साथ-साथ उसके डेटा का पारदर्शी इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी होगी।

