• info@thevaarta.com

आज लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं आएगा नजर; जानें सूतक काल से लेकर खास बातें

आज लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं आएगा नजर; जानें सूतक काल से लेकर खास बातें

साल 2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण आज यानी 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इस बार पूर्ण सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा दुनिया के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा। हालांकि, भारत में रहने वाले लोगों को यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगी और इसका समापन देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा।

सूर्य ग्रहण को लेकर जहां खगोल विज्ञान में लोगों की दिलचस्पी रहती है, वहीं ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में भी इसे महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। ग्रहण के समय सूतक काल, पूजा-पाठ और धार्मिक नियमों को लेकर भी लोगों के बीच काफी जिज्ञासा रहती है।

कब शुरू होगा सूर्य ग्रहण और कितनी देर रहेगा?
12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 9:04 बजे शुरू होगा। इसके बाद रात 10:28 बजे खग्रास अवस्था शुरू होगी। ग्रहण का मध्य रात 11:14 बजे होगा, जबकि खग्रास अवस्था रात 12:04 बजे समाप्त हो जाएगी। ग्रहण का पूर्ण मोक्ष यानी समापन रात 1:27 बजे होगा। इस तरह ग्रहण की पूरी प्रक्रिया करीब 4 घंटे 23 मिनट तक चलेगी। खगोलीय गणना के अनुसार इस ग्रहण का ग्रासमान 1.038 बताया गया है।

भारत में क्यों नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी हिस्से से दिखाई नहीं देगा। यही वजह है कि भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष अनुभव संभव नहीं होगा। यह ग्रहण यूरोप के अधिकांश हिस्सों, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका, कनाडा और रूस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में दिखाई देगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र समेत उत्तरी स्पेन तथा पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में देखने को मिल सकता है। ग्रहण के आंशिक चरण को ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और यूरोप के कई अन्य देशों में भी देखा जा सकेगा।

दिन में दिखाई दे सकता है रात जैसा नजारा
पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य के अधिकांश हिस्से को ढक लेता है। इस बार सूर्य की डिस्क का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा चंद्रमा द्वारा ढके जाने की स्थिति बनेगी। ऐसे में जिन क्षेत्रों में ग्रहण का पूर्ण या गहरा आंशिक चरण दिखाई देगा, वहां दिन के समय कुछ देर के लिए अंधेरा छाने जैसा अनुभव हो सकता है।

आसमान साफ रहने पर कुछ चमकीले तारे और ग्रह भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि खगोल प्रेमियों के लिए यह ग्रहण बेहद रोमांचक घटना माना जा रहा है।

सूतक काल को लेकर क्या है मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। चूंकि इस ग्रहण की शुरुआत भारतीय समयानुसार रात 9:04 बजे होगी, इसलिए धार्मिक गणना के आधार पर सूतक काल की शुरुआत सुबह से मानी जा सकती है। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए देश के अधिकांश हिस्सों में मंदिरों के कपाट बंद करने या सूतक से जुड़े पारंपरिक नियमों को लेकर स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग व्यवस्था हो सकती है।

जहां ग्रहण दिखाई देगा, वहां कुछ मंदिरों में सूतक और ग्रहण काल के दौरान धार्मिक गतिविधियों को रोकने तथा ग्रहण समाप्त होने के बाद साफ-सफाई और पूजा दोबारा शुरू करने की परंपरा निभाई जा सकती है।

ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण का क्या असर?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगने जा रहा है। इस दौरान सूर्य के साथ बुध, चंद्रमा और गुरु के भी कर्क राशि में होने की बात कही जा रही है। ज्योतिष में ग्रहण को महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के साथ-साथ राशियों पर प्रभाव डालने वाली स्थिति माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार सभी राशियों पर इसका अलग-अलग प्रभाव हो सकता है, लेकिन कर्क और सिंह राशि के जातकों पर इसका प्रभाव अधिक माना जा रहा है। हालांकि, ज्योतिषीय प्रभाव धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

गर्भवती महिलाओं को लेकर क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं?
सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान घर में रहने, मंत्र जाप करने और ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करने की सलाह दी जाती है। कुछ परंपराओं में ग्रहण के दौरान धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल न करने की बात भी कही जाती है। हालांकि, इन मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाता। गर्भावस्था से जुड़े किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना उचित है।

ग्रहण के दौरान सोना चाहिए या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण काल के दौरान सोने के बजाय ध्यान और मंत्र जाप करने की बात कही गई है। मान्यता है कि इस समय पूजा, ध्यान और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। बीमार या अस्वस्थ लोगों के लिए आराम करना स्वाभाविक रूप से जरूरी हो सकता है। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां ग्रहण देखने से जुड़े सामान्य व्यवहारिक नियम भी सीधे लागू नहीं होते।

ग्रहण के दौरान कौन से मंत्र जपने की मान्यता है?
धार्मिक परंपराओं में ग्रहण के समय मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया गया है। इस दौरान लोग अपनी आस्था के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र, गुरु मंत्र या भगवान विष्णु का मंत्र जाप कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में राहु-केतु से जुड़े मंत्रों के जाप का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान भगवान का ध्यान मन ही मन करना चाहिए और मंदिर की मूर्तियों को स्पर्श करने से बचना चाहिए।

वैज्ञानिक रूप से कैसे लगता है सूर्य ग्रहण?
वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण पूरी तरह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और उसकी छाया पृथ्वी के कुछ हिस्सों पर पड़ती है, तब सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। चंद्रमा सूर्य की रोशनी को कुछ समय के लिए आंशिक या पूरी तरह ढक देता है। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को राहु-केतु से जोड़कर देखा जाता है, जबकि विज्ञान इसके पीछे सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति को मुख्य कारण मानता है।

आज के ग्रहण की खास बात
12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि यह इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण है और दुनिया के कई हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण का शानदार दृश्य देखने को मिलेगा। भारत में भले ही यह नजर नहीं आएगा, लेकिन खगोल विज्ञान के लिहाज से यह घटना बेहद महत्वपूर्ण रहेगी। ग्रहण के दौरान सूर्य को सीधे नंगी आंखों से देखने के बजाय प्रमाणित सोलर फिल्टर या सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल करना जरूरी है। गलत तरीके से सूर्य को देखने से आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

Related Articles

Leave a Reply