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सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान को दिया झटका, ED की गिरफ्तारी पर राहत नहीं; हाईकोर्ट जाने का मिला निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान को दिया झटका, ED की गिरफ्तारी पर राहत नहीं; हाईकोर्ट जाने का मिला निर्देश

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान की मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। रामपुर जेल से रिहाई के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्त में पहुंचे आजम खान को अब सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने को कहा है। इस फैसले के बाद आजम खान की जेल से जल्द बाहर आने की उम्मीदों को झटका लगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
आजम खान की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि इस मामले में पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की और हाईकोर्ट को 16 नवंबर को मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया। इसका मतलब है कि फिलहाल आजम खान को जेल में ही रहना होगा। अब उनकी कानूनी लड़ाई का अगला अहम पड़ाव इलाहाबाद हाईकोर्ट होगा।

रामपुर से रिहाई के बाद फिर ED की गिरफ्त में आए आजम
दरअसल, आजम खान को जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। रामपुर जेल से रिहाई के तुरंत बाद हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी।

गिरफ्तारी के बाद गाजियाबाद की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद उन्हें गाजियाबाद की डासना जेल में रखा गया। अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 13 नवंबर तक निर्धारित की थी।

426 करोड़ की संपत्ति पर ED की कार्रवाई
आजम खान के खिलाफ ईडी की जांच का केंद्र रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी संपत्तियां हैं। एजेंसी ने विश्वविद्यालय से संबंधित करीब 426.46 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था।

ईडी के मुताबिक, विश्वविद्यालय की संपत्तियों का मौजूदा अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, आजम खान और अन्य लोगों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।

26 FIR से शुरू हुई थी जांच
ईडी की जांच रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन अधिग्रहित की गई। एजेंसी के अनुसार, जौहर विश्वविद्यालय का परिसर रामपुर के सींगन खेड़ा गांव स्थित जौहर नगर में है और इसका स्वामित्व मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के पास है। इस ट्रस्ट की स्थापना और संचालन आजम खान करते हैं। वह विश्वविद्यालय के मानद कुलाधिपति भी हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।

अब 16 नवंबर पर टिकी आजम खान की नजरें
सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद अब आजम खान के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला बेहद अहम हो गया है। 16 नवंबर को होने वाली सुनवाई में उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर आगे की कानूनी दिशा तय होगी। फिलहाल ईडी की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के रुख ने आजम खान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना होगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से उन्हें कोई राहत मिलती है या उनकी जेल में रहने की अवधि और बढ़ जाती है।

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