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Vaibhav Sooryavanshi को रॉबिन उथप्पा की सलाह, बोले- प्रतिभा के साथ सही मार्गदर्शन ही बनाएगा लंबा करियर

Vaibhav Sooryavanshi को रॉबिन उथप्पा की सलाह, बोले- प्रतिभा के साथ सही मार्गदर्शन ही बनाएगा लंबा करियर

भारतीय क्रिकेट में इन दिनों जिस युवा खिलाड़ी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह हैं 15 वर्षीय Vaibhav Sooryavanshi. बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले इस प्रतिभाशाली बल्लेबाज ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और आत्मविश्वास से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जिम्बाब्वे दौरे पर शानदार अर्धशतक लगाने के बाद उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा है। लेकिन इसी बीच पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा ने वैभव को ऐसी सलाह दी है, जिसे उनके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कम उम्र में मिली सफलता के साथ बढ़ती हैं जिम्मेदारियां
रॉबिन उथप्पा का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी के लिए शुरुआती सफलता जितनी बड़ी उपलब्धि होती है, उतनी ही बड़ी चुनौती भी बन सकती है। कम उम्र में मिली लोकप्रियता, मीडिया की सुर्खियां और लगातार बढ़ती उम्मीदें कई बार खिलाड़ियों का ध्यान उनके खेल से भटका देती हैं। उथप्पा के अनुसार, वैभव के पास असाधारण प्रतिभा है, लेकिन आने वाले वर्षों में उन्हें अपने खेल के साथ-साथ मानसिक संतुलन, अनुशासन और सही फैसलों पर भी बराबर ध्यान देना होगा। उनका कहना है कि प्रतिभा खिलाड़ी को पहचान दिला सकती है, लेकिन लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर टिके रहने के लिए सही वातावरण और मजबूत मार्गदर्शन जरूरी होता है।

व्हाइट-बॉल क्रिकेट में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की क्षमता
अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान रॉबिन उथप्पा ने वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि अगर इस युवा खिलाड़ी का विकास सही दिशा में हुआ, तो वह सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारतीय टीम के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाजों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी खिलाड़ी की सफलता केवल उसकी तकनीक पर निर्भर नहीं करती। सही कोचिंग, परिवार का सहयोग, अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन और दबाव को संभालने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

कांबली और पृथ्वी शॉ का उदाहरण क्यों दिया?
उथप्पा ने अपनी बात को समझाने के लिए भारतीय क्रिकेट के दो चर्चित नामों – विनोद कांबली और पृथ्वी शॉ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने अपने शुरुआती करियर में असाधारण प्रतिभा दिखाई थी। क्रिकेट जगत को उनसे लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन समय के साथ उनका करियर उम्मीदों के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाया। उथप्पा का उद्देश्य इन खिलाड़ियों की आलोचना करना नहीं था, बल्कि यह बताना था कि केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं होती। यदि सही फैसले, अनुशासन और उचित मार्गदर्शन न मिले तो बेहतरीन खिलाड़ी भी अपने पूरे सामर्थ्य तक नहीं पहुंच पाते।

अगले पांच साल होंगे सबसे अहम
रॉबिन उथप्पा का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी के लिए आने वाले पांच वर्ष बेहद निर्णायक साबित होंगे। इस दौरान उन्हें अपने खेल को लगातार बेहतर बनाने के साथ फिटनेस और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि 15 से 20 वर्ष की उम्र किसी भी खिलाड़ी के विकास का सबसे महत्वपूर्ण दौर होती है। इसी समय खिलाड़ी की तकनीक, सोच और प्रोफेशनल रवैया आकार लेता है। यदि इस अवधि में सही दिशा मिल जाए तो आगे का सफर काफी आसान हो सकता है।

लोकप्रियता से ज्यादा क्रिकेट को दें प्राथमिकता
उथप्पा ने वैभव के मौजूदा रवैये की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि अभी तक वैभव ने अपनी प्राथमिकता क्रिकेट को ही बनाया है और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने माना कि जैसे-जैसे सफलता बढ़ेगी, वैसे-वैसे विज्ञापन, ब्रांड एंडोर्समेंट और व्यावसायिक प्रस्ताव भी बढ़ेंगे। ऐसे समय में खिलाड़ी को यह तय करना होगा कि उसका मुख्य लक्ष्य क्या है। यदि क्रिकेट पहली प्राथमिकता बना रहा, तो बाकी उपलब्धियां अपने आप मिलती जाएंगी।

सोशल मीडिया पर भी बरतनी होगी समझदारी
आज के दौर में सोशल मीडिया खिलाड़ियों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि रॉबिन उथप्पा का मानना है कि कम उम्र में इसकी अधिक सक्रियता कई बार नुकसान भी पहुंचा सकती है। उन्होंने सलाह दी कि वैभव को फिलहाल सोशल मीडिया की लोकप्रियता से ज्यादा अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि बाहरी दुनिया से पूरी तरह दूरी बनाना जरूरी नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग ही बेहतर रहेगा ताकि ध्यान क्रिकेट से न भटके।

लंबी रेस का खिलाड़ी बनने की चुनौती
वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में यह साबित कर दिया है कि उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होने की क्षमता मौजूद है। उनकी तकनीक, आत्मविश्वास और दबाव में खेलने की शैली ने क्रिकेट विशेषज्ञों को प्रभावित किया है। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है, क्योंकि शुरुआती सफलता को वर्षों तक बनाए रखना किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे कठिन चुनौती होती है।

यदि वैभव अनुशासन, फिटनेस, मानसिक मजबूती और सही मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ते हैं, तो वह भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो सकते हैं। रॉबिन उथप्पा की सलाह भी इसी दिशा में संकेत देती है कि प्रतिभा को सही दिशा मिल जाए, तो वह इतिहास रच सकती है। आने वाले वर्षों में सभी की नजर इस युवा बल्लेबाज के प्रदर्शन पर रहेगी कि वह अपनी शानदार शुरुआत को कितनी मजबूती से लंबे और सफल करियर में बदल पाते हैं।

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