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अरुणाचल प्रदेश में चीन के सैनिकों से कई जगह आमना-सामना, ITBP के शौर्य कमांडो ने संभाला मोर्चा – बोले डीजी

भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच ITBP प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना हुआ है और कुछ जगहों पर स्थिति अब भी बनी हुई है। इस बीच, भारत ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शौर्य कमांडो, ड्रोन तकनीक और आधुनिक सैन्य उपकरणों पर अपना ध्यान बढ़ा दिया है।

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीनी सेना के साथ जारी आमने-सामने की स्थिति को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने अहम जानकारी दी है। उनके बयान से साफ है कि सीमा पर सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ सुरक्षा बल अपनी परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने में जुटे हैं। खास बात यह है कि इन परिस्थितियों में ITBP की नई विशेष लड़ाकू टीम ‘शौर्य कमांडो’ ने भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

अरुणाचल में कई जगहों पर चीनी सैनिकों से सामना
ITBP महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 22 अक्टूबर को बल के स्थापना दिवस से पहले आयोजित सम्मान समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए अरुणाचल प्रदेश की स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सीमा के कई स्थानों पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों के साथ आमना-सामना हुआ है। इनमें से कुछ स्थानों पर स्थिति अभी भी जारी है।

कपूर ने इस दौरान शौर्य कमांडो टीमों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन टीमों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार कौशल दिखाया है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास भी जारी हैं। हालांकि, कूटनीतिक संवाद के बावजूद जमीनी स्तर पर सतर्कता और निगरानी की जरूरत बनी हुई है।

हर बटालियन में तैनात होंगे शौर्य कमांडो
सीमा पर बदलती परिस्थितियों को देखते हुए ITBP अपनी विशेष लड़ाकू क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। महानिदेशक के मुताबिक, बल की प्रत्येक बटालियन में एक कमांडो टीम तैयार की जा चुकी है। अब दो अतिरिक्त टीमें गठित करने की प्रक्रिया भी चल रही है।

ITBP की योजना आगे बढ़कर प्रत्येक बटालियन में एक पूरी कमांडो कंपनी तैयार करने की है। इसके अलावा, एक ऐसी अलग बटालियन बनाने पर भी काम किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य विशेष कमांडो अभियान संचालित करना होगा।

इस प्रस्ताव पर बल का ऑपरेशंस विंग काम कर रहा है। कपूर ने उम्मीद जताई कि इस इकाई की योजना का खाका जल्द तैयार हो जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष परिस्थितियों का सामना करने के लिए प्रशिक्षित जवानों की उपलब्धता बढ़ाना है। शौर्य कमांडो को ITBP की विशिष्ट पहचान बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर बढ़ेगा जोर
आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका ने दुनिया भर की सेनाओं की रणनीति बदल दी है। अब निगरानी से लेकर हमले और दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने तक, ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ITBP भी इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियों में नई तकनीक को शामिल कर रही है।

कपूर ने बताया कि बल हर प्लाटून में ड्रोन यूनिट विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। ड्रोन संचालन के लिए जवानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है और स्वदेशी स्तर पर ड्रोन तैयार करने की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है।

इसके साथ ही एंटी-ड्रोन सिस्टम को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि दुश्मन के ड्रोन से पैदा होने वाले संभावित खतरों का मुकाबला किया जा सके। पहाड़ी और दुर्गम सीमा क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी से महत्वपूर्ण जानकारी तेजी से हासिल करने में मदद मिल सकती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध से लिया जा रहा सबक
ITBP प्रमुख ने बदलते युद्ध के स्वरूप को समझाने के लिए रूस-यूक्रेन संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने संकेत दिया कि आधुनिक तकनीक ने छोटे और बड़े देशों के बीच सैन्य मुकाबले की परिस्थितियों को काफी हद तक बदल दिया है। ड्रोन जैसी तकनीक किसी देश की पारंपरिक सैन्य ताकत के सामने नई चुनौती खड़ी कर सकती है।

उन्होंने ईरान का उदाहरण देते हुए भी बताया कि आधुनिक संघर्षों में तकनीक और नए तरीके कितने महत्वपूर्ण हो गए हैं। उनका जोर इस बात पर था कि केवल पारंपरिक सैन्य संसाधनों के आधार पर भविष्य की चुनौतियों का आकलन नहीं किया जा सकता।

इसी सोच के तहत ITBP अपने जवानों को नई तकनीक से परिचित कराने, ड्रोन पायलट तैयार करने और आधुनिक युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

2030 तक आधुनिकीकरण की बड़ी तैयारी
ITBP अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए केवल कमांडो और ड्रोन तक सीमित नहीं है। बल के आधुनिकीकरण में वाहनों, हथियारों और अन्य जरूरी उपकरणों को भी शामिल किया जा रहा है। योजना के तहत दुर्गम इलाकों में आवाजाही के लिए विशेष वाहन, स्वचालित ग्राउंड व्हीकल और क्विक रिएक्शन व्हीकल जैसे साधनों पर ध्यान दिया जाएगा।

कपूर के अनुसार, वर्ष 2030 तक बल को अतिरिक्त संसाधन मिलने की उम्मीद है। आधुनिकीकरण की प्रस्तावित योजना में करीब 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए निर्धारित करने की बात कही गई है। इसके अलावा, पुराने उपकरणों और गोला-बारूद को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बेहतर बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। इन प्रयासों का लक्ष्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जवानों की कार्यक्षमता और प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ाना है।

भारत-चीन सीमा पर क्यों अहम है यह तैयारी?
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों की धारणाएं कई क्षेत्रों में अलग-अलग हैं। इसी वजह से गश्त के दौरान दोनों पक्षों के सैनिक आमने-सामने आ जाते हैं और तनाव की स्थिति बन सकती है। ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की व्यवस्था मौजूद है।

अरुणाचल प्रदेश में सामने आई स्थिति के बीच ITBP की तैयारियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण मौसम, दुर्गम रास्ते और संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के लिए अतिरिक्त मुश्किलें पैदा करती हैं।

शौर्य कमांडो की तैनाती, ड्रोन क्षमताओं का विस्तार और आधुनिक उपकरणों पर निवेश इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा हैं। हालांकि, सीमा पर जारी आमने-सामने की स्थिति का समाधान बातचीत और सैन्य सतर्कता, दोनों के जरिए तलाशना महत्वपूर्ण रहेगा।

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