GST यानी वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े नियमों में बदलाव की खबर कारोबारियों और छोटे व्यापारियों के लिए अहम है। टैक्स संबंधी अनियमितताओं पर आपराधिक कार्रवाई की सीमा बढ़ाने, सामान्य जुर्माने को कम करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े विवादों की समीक्षा जैसे मुद्दों पर जीएसटी काउंसिल ने फैसले लिए हैं।
यह फैसला गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई GST काउंसिल की 53वीं बैठक में लिया गया।
इन बदलावों का उद्देश्य टैक्स व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाना और छोटे कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम करना है। हालांकि, इन प्रावधानों का वास्तविक असर संबंधित कानून और लागू अधिसूचनाओं के अनुसार तय होगा।
आपराधिक कार्रवाई की सीमा बढ़कर हुई 5 करोड़
GST से जुड़े बदलावों में सबसे अहम फैसला आपराधिक अभियोजन की न्यूनतम सीमा को लेकर बताया गया है। पहले एक करोड़ रुपये की टैक्स गड़बड़ी पर भी आपराधिक मुकदमा चलाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती थी। अब इस सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का फैसला लिया गया है। सरल शब्दों में कहें तो 5 करोड़ से कम की टैक्स चोरी या गड़बड़ी करने वालों को टैक्स अधिकारी अब किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकेंगे।
साथ ही GST मामलों में क्रिमिनल केस की मिनिमम लिमिट 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दी गई है। 5 करोड़ रुपए से कम की गड़बड़ी को सिर्फ जुर्माना भरकर सुलझाया जा सकेगा।
10 हजार की टैक्स चोरी पर नहीं मिलेगी नोटिस
10 हजार रुपए से कम की टैक्स चोरी पर कारोबारी को नोटिस भी नहीं दिया जाएगा। काउंसिल ने ऑनलाइन सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों के लिए भी नियम आसान बनाए हैं, हालांकि मौजूदा टैक्स स्लैब या रेट स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कोर्ट के पास होगा सजा तय करने का अधिकार
GST काउंसिल ने टैक्स अधिकारियों से सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार वापस ले लिया है। इसके साथ ही कानून में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। पहले छोटे-मोटे टैक्स विवादों में भी कम से कम एक निश्चित सजा काटनी ही पड़ती थी, लेकिन सरकार ने इस नियम को खत्म कर दिया है। अब किसी मामले में कितनी सजा होगी, जुर्माना लगेगा या जेल, इसका पूरा फैसला सिर्फ कोर्ट ही करेगी।
5 करोड़ से कम की टैक्स गड़बड़ी पर नहीं होगा केस
व्यापारियों को राहत देते हुए आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की सीमा 5 गुना बढ़ा दी गई है। पहले ₹1 करोड़ की टैक्स गड़बड़ी पर भी क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन शुरू किया जा सकता था, जिसे अब बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है। यानी ₹5 करोड़ तक के मामलों को अब आपराधिक कार्रवाई के बजाय पेनल्टी और सिविल प्रक्रिया के तहत ही निपटाया जाएगा।
सामान और बिल सही होने पर खरीदार का ITC नहीं अटकेगा
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम को लेकर ईमानदारी से व्यापार करने वाले खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। काउंसिल ने अधिकारियों की एक कमेटी (Committee of Officers) गठित करने का फैसला किया है। यह कमेटी इस बात का अध्ययन करेगी कि अगर किसी खरीदार के पास सही इनवॉइस (बिल) है, उसने सामान प्राप्त कर लिया है और सप्लायर को पूरा भुगतान भी कर दिया है, तो उसे धोखाधड़ी करने वाले सप्लायर की वजह से परेशान न होना पड़े। यह कमेटी 3 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी, जिसे अगली बैठक में रखा जाएगा।
अब सामान्य पेनल्टी होगी 10 हजार, साल में एक बार ही बदलेंगे रेट
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, कारोबारियों के लिए एक और महत्वपूर्ण बदलाव सामान्य पेनल्टी से जुड़ा है। जिन मामलों में अलग से कोई विशेष जुर्माना निर्धारित नहीं है, वहां सामान्य पेनल्टी को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने का फैसला बताया गया है। इसके अलावा, वित्त मंत्रालय ने साफ़ किया कि टैक्स रेट का स्ट्रक्चर अब स्थिर हो चुका है, इसलिए काउंसिल अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि रोजाना के कामकाज में टैक्स सिस्टम कैसे काम करता है।
साथ ही GST दरों में अब कोई भी बदलाव साल में सिर्फ एक बार ही किया जाएगा।

