• info@thevaarta.com

एकता कपूर का बॉलीवुड पर बयान, बोलीं- ‘हिंदूफोबिया है’, तिलक और कलावा पहनने पर सुनने पड़े ताने

एकता कपूर का बॉलीवुड पर बयान, बोलीं- ‘हिंदूफोबिया है’, तिलक और कलावा पहनने पर सुनने पड़े ताने

टीवी और फिल्म जगत की मशहूर निर्माता एकता कपूर ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भारतीय लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं को पेश करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान एकता ने कहा कि बॉलीवुड में विदेशी फैंटेसी कहानियों को जिस सहजता से स्वीकार किया जाता है, वैसी दिलचस्पी भारतीय संस्कृति, हिंदू लोककथाओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित कहानियों को लेकर हमेशा दिखाई नहीं देती। उन्होंने इस स्थिति को ‘हिंदूफोबिया’ बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। एकता ने यह भी बताया कि धार्मिक प्रतीकों को अपनाने और अपनी आस्था को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने पर उन्हें अजीब टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है।

बॉलीवुड में हिंदू लोककथाओं को लेकर क्या बोलीं एकता कपूर?
एकता कपूर का मानना है कि भारतीय सिनेमा में देश की सांस्कृतिक विरासत और लोकविश्वासों से जुड़ी कहानियों को अधिक महत्व मिलना चाहिए। उनके अनुसार, फिल्मों की सफलता का आकलन केवल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के आधार पर करना पर्याप्त नहीं है। किसी कहानी का सांस्कृतिक महत्व, उसकी पहचान और दर्शकों के साथ उसका जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है।

रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में उन्होंने अपनी फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय लोककथाओं पर आधारित कहानियों को भी व्यापक स्तर पर स्वीकार किया जाना चाहिए। एकता ने बातचीत में दावा किया कि विदेशी फैंटेसी और एनिमेशन से जुड़ी कहानियों के लिए लोगों में उत्साह देखने को मिलता है, लेकिन जब भारतीय पौराणिक कथाओं या धार्मिक परंपराओं को केंद्र में रखा जाता है, तो कई बार असहजता दिखाई देती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ऐसी कहानियों को बड़े पर्दे पर लाने और दर्शकों के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ाने के पक्ष में हैं। उनके मुताबिक, अब पहले की तुलना में भारतीय संस्कृति पर आधारित विषयों को लेकर स्वीकार्यता बढ़ी है, लेकिन इस दिशा में अभी और काम किए जाने की जरूरत है।

तिलक और कलावा पहनने पर लोगों ने किए सवाल
एकता कपूर ने बातचीत के दौरान अपनी धार्मिक आस्था से जुड़ा व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि तिलक लगाने और हाथ में कलावा बांधने जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को अपनाने पर भी लोगों ने उनके पहनावे पर सवाल उठाए।

एकता के अनुसार, एक मौके पर उनसे इस तरह के कपड़े पहनने को लेकर ऐसी टिप्पणी की गई, जिसमें उन्हें सनकी या अजीब व्यक्ति की तरह पेश किया गया। इस अनुभव पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर तिलक लगाना और कलावा पहनना किसी के लिए असामान्य क्यों होना चाहिए।

उनकी बातों से यह मुद्दा सामने आया कि धार्मिक आस्था को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने वाले लोगों को कभी-कभी सामाजिक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। एकता ने इस बात पर हैरानी जताई कि पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को पहनने को लेकर भी लोगों की ओर से आपत्तियां क्यों उठाई जाती हैं।

उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति की आस्था और पहनावे को लेकर उसका मजाक उड़ाना उचित नहीं है। हालांकि, उनके अनुभव व्यक्तिगत हैं और इससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री के रवैये के बारे में अपने आप कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

एकता कपूर को ‘तांत्रिक’ कहे जाने का भी हुआ जिक्र
पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान एकता कपूर को धार्मिक आस्था और पारंपरिक पहनावे के कारण ‘तांत्रिक’ कहे जाने का मुद्दा भी उठा। इस प्रसंग ने चर्चा को फिल्मों और मनोरंजन के साथ व्यक्तिगत धार्मिक अभिव्यक्ति और सामाजिक धारणाओं से भी जोड़ दिया।

एकता की बातों से स्पष्ट हुआ कि वह भारतीय परंपराओं को अपनाने में किसी तरह का संकोच नहीं करना चाहतीं। उनका जोर इस बात पर है कि धार्मिक प्रतीकों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर लोगों को अनावश्यक रूढ़ियों में नहीं बांधना चाहिए।

फिल्मों के संदर्भ में भी उनका नजरिया यही है कि भारतीय लोकविश्वासों और पौराणिक कथाओं को आधुनिक कहानी कहने के तरीकों के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का अवसर मिल सकता है और फिल्म निर्माताओं को भी नई तरह की कहानियां विकसित करने की प्रेरणा मिल सकती है।

‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में दिखाई गई बिहार की लोककथा
एकता कपूर इन दिनों अपनी फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ को लेकर भी चर्चा में हैं। इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। फिल्म का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा ने किया है, जबकि इसकी कहानी अरुणाभ कुमार ने लिखी है।

फिल्म की कहानी में फैंटेसी और अलौकिक तत्वों के साथ बिहार की स्थानीय लोकमान्यताओं को शामिल किया गया है। इसकी प्रेरणा पटना से लगभग 35 किलोमीटर दूर बिहटा स्थित मां वन देवी मंदिर से जुड़ी मान्यताओं से बताई गई है। फिल्म के माध्यम से क्षेत्रीय लोकविश्वासों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को सिनेमाई रूप में पेश करने की कोशिश की गई है।

एकता के लिए इस तरह की कहानी का महत्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। वह चाहती हैं कि भारतीय लोककथाओं को भी ऐसी पहचान मिले, जैसी दूसरी लोकप्रिय फैंटेसी कहानियों को मिलती है। उनके अनुसार, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित मान्यताओं, लोकदेवताओं और पीढ़ियों से चली आ रही कहानियों में सिनेमा के लिए काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का प्रदर्शन भी चर्चा में
‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ की कमाई के आंकड़े भी चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के पहले दिन भारत में करीब 8 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसका घरेलू नेट कलेक्शन लगभग 69.50 करोड़ रुपये और दुनियाभर में कुल कलेक्शन करीब 90.47 करोड़ रुपये बताया गया है।

एकता कपूर के बयान के मुताबिक, फिल्म की सफलता को केवल कमाई से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। उनके लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि भारतीय लोककथाओं पर आधारित कहानी दर्शकों तक पहुंचे और उन्हें इस तरह के विषयों को देखने का अवसर मिले।

हालांकि, बॉक्स ऑफिस के ये आंकड़े संबंधित रिपोर्टों में बताए गए आंकड़ों पर आधारित हैं। फिल्म की व्यावसायिक सफलता का आकलन करते समय बजट, वितरण लागत और अन्य आर्थिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।

एकता कपूर के आगामी प्रोजेक्ट्स पर भी नजर
टेलीविजन की दुनिया में ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ और ‘कहानी घर घर की’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों से पहचान बनाने वाली एकता कपूर अब फिल्मों और डिजिटल मनोरंजन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। बालाजी टेलीफिल्म्स से जुड़े उनके आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर भी दर्शकों में दिलचस्पी बनी हुई है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बालाजी टेलीफिल्म्स और यूट्यूब के सहयोग से 200 एपिसोड वाले पांच ओरिजिनल शो बनाने की योजना की घोषणा की गई है। इसके अलावा ‘हक से’ के दूसरे सीजन, ‘फिर प्यार की यह कहानी सुनो’ और ‘कहने को हमसफर हैं’ के चौथे सीजन जैसे प्रोजेक्ट्स का भी जिक्र किया गया है।

एकता कपूर ने ‘द डर्टी पिक्चर 2’ पर काम जारी होने की बात भी कही है। वहीं, स्टार प्लस के लिए एक नए टीवी शो की तैयारी की जानकारी सामने आई है, जिसमें गौरव खन्ना और श्रद्धा आर्या के शामिल होने की बात कही गई है। इन परियोजनाओं की रिलीज और प्रसारण से जुड़ी अंतिम जानकारी के लिए आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी होगा।

भारतीय संस्कृति पर आधारित कहानियों को लेकर छिड़ी बहस
एकता कपूर का बयान भारतीय सिनेमा में सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व को लेकर चल रही व्यापक चर्चा का हिस्सा है। एक तरफ फिल्म निर्माताओं के सामने दर्शकों की पसंद और व्यावसायिक सफलता की चुनौती होती है, तो दूसरी तरफ स्थानीय इतिहास, लोककथाओं और परंपराओं को नए अंदाज में प्रस्तुत करने का अवसर भी मौजूद है।

एकता का पक्ष है कि भारतीय पौराणिक और लोककथात्मक कहानियों को भी बड़े स्तर पर जगह मिलनी चाहिए और उन्हें प्रस्तुत करने में अनावश्यक संकोच नहीं होना चाहिए। तिलक और कलावा पहनने को लेकर उनके अनुभव ने इस बहस में व्यक्तिगत आस्था और सामाजिक व्यवहार का पहलू भी जोड़ दिया है।

Related Articles

Leave a Reply