गोरखपुर। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। चाहे विवाह हो, गृह प्रवेश, धार्मिक अनुष्ठान या कोई नया काम, सबसे पहले गणपति का स्मरण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा गया है। माना जाता है कि उनका आह्वान करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शुभ काम निर्विघ्न पूरा होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का दर्जा कैसे मिला?
माता-पिता को माना पूरा संसार
पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश के प्रथम पूज्य होने की एक बेहद रोचक कथा मिलती है। ज्योतिषाचार्य डॉ. धनेश मणि त्रिपाठी, गोरखपुर के अनुसार, एक बार भगवान गणेश और उनके भाई कार्तिकेय के बीच इस बात को लेकर विवाद हुआ कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। इस विवाद को समाप्त करने के लिए भगवान शिव ने दोनों के सामने एक शर्त रखी। उन्होंने कहा कि जो सबसे पहले पूरे संसार की परिक्रमा करके वापस आएगा, उसे श्रेष्ठ माना जाएगा। यह सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार होकर संसार की परिक्रमा के लिए निकल पड़े।
गणेश जी ने दौड़ने के बजाय लगाई बुद्धि
कार्तिकेय जहां संसार की परिक्रमा करने निकल गए, वहीं भगवान गणेश ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। उनका वाहन मूषक था, इसलिए उनके लिए पूरे संसार का चक्कर लगाना आसान नहीं था। गणेश जी ने भगवान शिव और माता पार्वती के चारों ओर सात परिक्रमा की और उनके सामने जाकर खड़े हो गए। गणेश जी ने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही संपूर्ण संसार का वास है। इसलिए उनके लिए माता-पिता की परिक्रमा करना ही पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करने के समान है।
शिव-पार्वती ने गणेश को दिया श्रेष्ठता का सम्मान
गणेश जी की बुद्धि, भक्ति और माता-पिता के प्रति उनके सम्मान से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न हुए। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी प्रसंग के बाद भगवान गणेश को प्रथम पूज्य होने का सम्मान मिला। यही वजह है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति वंदना से करने की परंपरा प्रचलित हुई।
विघ्नहर्ता के रूप में होती है गणपति की पूजा
ज्योतिषाचार्य डॉ. धनेश मणि त्रिपाठी बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है। किसी भी पूजा, यज्ञ या शुभ कार्य से पहले उनका स्मरण करने का उद्देश्य कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर करने की कामना करना है। इसी विश्वास के चलते आज भी लोग नए काम की शुरुआत ‘श्री गणेशाय नमः’ के साथ करते हैं। गणेश पूजा एक धार्मिक परंपरा के साथ बुद्धि, विवेक, शुभता और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक भी मानी जाती है।

