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SEMICON India 2026: छोटा सा चिप, भारत के लिए खुलती टेक्नोलॉजी की दुनिया; Gen Z के लिए भी बढ़ेंगे मौके

SEMICON India 2026: छोटा सा चिप, भारत के लिए खुलती टेक्नोलॉजी की दुनिया; Gen Z के लिए भी बढ़ेंगे मौके

SEMICON India 2026: आज की दुनिया में तकनीक की रफ्तार जिस छोटे से कंपोनेंट पर टिकी है, वह है सेमीकंडक्टर चिप। स्मार्टफोन से लेकर कार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल, कंप्यूटर और तमाम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत अब केवल दूसरे देशों से चिप खरीदकर इस्तेमाल करने वाला बाजार बने रहने के बजाय इसके डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और टेस्टिंग की पूरी क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इस बदलते परिदृश्य की झलक SEMICON India 2026 में दिखाई दे रही है। देश में बढ़ते निवेश के साथ यह सेक्टर युवाओं, स्टार्टअप और खास तौर पर Gen Z के लिए भी नए करियर और बिजनेस अवसरों का आधार तैयार कर रहा है।

SEMICON India 2026 में दिखी भारत की बड़ी तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज को नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया। तीन दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़ी कंपनियों के अलावा निवेशक, स्टार्टअप, शोधकर्ता और छात्र भी हिस्सा ले रहे हैं।

इस बार कार्यक्रम की थीम ‘Silicon to Systems: Building the Ecosystem’ रखी गई है। इसमें 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और 600 से ज्यादा कंपनियों की भागीदारी बताई गई है। आयोजन का फोकस भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में फैक्ट्रियां लगाने से लेकर चिप की डिजाइनिंग, उसके निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण और कुशल मानव संसाधन तक पूरा इकोसिस्टम विकसित करे।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग ने बनाई मजबूत जमीन
सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विस्तार के लिए भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बढ़ता आधार महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2014-15 में देश में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025-26 तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया।

मोबाइल फोन निर्माण में भी भारत की स्थिति पिछले वर्षों में बदली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में इस्तेमाल होने वाले 99 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन देश में ही बनाए जा रहे हैं। घरेलू उत्पादन बढ़ने के साथ मोबाइल फोन का निर्यात भी बढ़ा है।

इस बदलाव का असर अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है। मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर, टेलीविजन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में चिप की जरूरत होती है। इसलिए तैयार इलेक्ट्रॉनिक सामान के साथ उसके अहम कंपोनेंट को देश में बनाने की क्षमता विकसित करना भी महत्वपूर्ण हो गया है।

1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट
भारत सरकार के Semicon India Programme के तहत अब तक सेमीकंडक्टर से जुड़े 12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में कुल मिलाकर 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की योजना बताई गई है। इनमें चिप निर्माण के साथ पैकेजिंग और टेस्टिंग से जुड़ी सुविधाएं भी शामिल हैं। यानी भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र केवल शुरुआती निवेश की कहानी नहीं रह गया है। कुछ परियोजनाएं उत्पादन के चरण तक पहुंच चुकी हैं। Micron, Kaynes और CG Semi जैसी कंपनियों ने भारत में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। इससे देश में सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन तैयार होने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

Semicon 2.0 से पूरी वैल्यू चेन पर जोर
सरकार ने सेमीकंडक्टर सेक्टर के अगले चरण यानी Semicon 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका मकसद केवल चिप निर्माण क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि इस उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है। चिप की कहानी फैक्ट्री से शुरू नहीं होती। इसके पीछे डिजाइन, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग, मशीनरी, मटेरियल, टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसे कई चरण होते हैं। इसलिए इन सभी क्षेत्रों में घरेलू क्षमता विकसित होने पर ही एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार हो सकता है।

चिप डिजाइन में युवाओं और स्टार्टअप के लिए मौके
सेमीकंडक्टर उद्योग का एक बड़ा हिस्सा चिप डिजाइन से जुड़ा है। किसी चिप के निर्माण से पहले उसका डिजाइन तैयार किया जाता है और उसे कई स्तरों पर टेस्ट किया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों के साथ विशेष सॉफ्टवेयर और डिजाइन टूल्स की आवश्यकता होती है। सरकार के अनुसार, 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता के लिए मंजूरी दी गई है। वहीं 105 स्टार्टअप और MSME को EDA यानी Electronic Design Automation टूल्स तक पहुंच दी गई है।

यही वह क्षेत्र है जहां कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और संबंधित तकनीकी क्षेत्रों में पढ़ाई कर रहे युवाओं के लिए अवसर बन सकते हैं। चिप डिजाइन, वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता भविष्य के रोजगार बाजार में महत्वपूर्ण हो सकती है।

AI और EV से बढ़ेगी चिप की जरूरत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी तकनीकों के विस्तार ने सेमीकंडक्टर की मांग को और महत्वपूर्ण बना दिया है। AI आधारित सिस्टम को बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी मैनेजमेंट, मोटर कंट्रोल और दूसरे सिस्टम के लिए अलग-अलग तरह की चिप और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट इस्तेमाल होते हैं।

SEMICON India 2026 में भी इस क्षेत्र से जुड़े प्रयोग और प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए जा रहे हैं। Synchronous Drives & Inverters Private Limited के फाउंडर दर्शन कुमार पंडित के मुताबिक, उनकी कंपनी EV के लिए हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, सेमीकंडक्टर और AI तकनीक पर काम कर रही है। कार्यक्रम में IIT दिल्ली और SVNIT सूरत में विकसित किए जा रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल सेमीकंडक्टर चिप के प्रोटोटाइप को भी प्रदर्शित किया गया।

विदेशी कंपनियां भी भारत में देख रही हैं अवसर
भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर बाजार में विदेशी कंपनियों की दिलचस्पी भी बढ़ रही है। जर्मनी की KoCoS Technologies की भारत में सब्सिडियरी है और कंपनी ने पहली बार भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़े इस तरह के कार्यक्रम में हिस्सा लिया है। कंपनी के Patrick Zube के अनुसार, कंपनी भारत में नए ग्राहकों और कारोबारी अवसरों से जुड़ना चाहती है। उन्होंने भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक उम्मीद जताते हुए भारत को भविष्य में ‘नया ताइवान’ बनने की संभावना से जोड़ा।

Gen Z के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सेमीकंडक्टर सेक्टर?
सेमीकंडक्टर उद्योग का विस्तार केवल बड़े निवेश और फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है। इसके साथ इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर, डिजाइन, AI, डेटा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई क्षेत्रों में विशेषज्ञ लोगों की जरूरत बढ़ सकती है। Gen Z के लिए इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक IT नौकरियों के अलावा चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर टेस्टिंग, एम्बेडेड टेक्नोलॉजी, AI हार्डवेयर, EV इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में करियर के रास्ते खुल सकते हैं। वहीं तकनीकी स्टार्टअप के लिए भी डिजाइन टूल्स, प्रोटोटाइपिंग और सरकारी सहायता के जरिए नए प्रयोगों की गुंजाइश बन रही है।

चिप से शुरू होकर सिस्टम तक पहुंच रहा भारत
SEMICON India 2026 से भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति की दिशा साफ दिखाई देती है। लक्ष्य केवल चिप फैक्ट्री स्थापित करना नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अंतिम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करना है।

बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्वीकृत प्रोजेक्ट, Semicon 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान और AI तथा EV जैसी तकनीकों की बढ़ती जरूरत इस क्षेत्र को भारत की टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। आने वाले समय में यही इकोसिस्टम भारत के युवाओं और तकनीकी उद्यमियों के लिए नए अवसरों का आधार बन सकता है।

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