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नेपाल में बाढ़ से तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए कितने अरब डॉलर का आएगा खर्च; किन देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ

नेपाल में बाढ़ से तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए कितने अरब डॉलर का आएगा खर्च; किन देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ

काठमांडू। नेपाल में हालिया भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर जान-माल और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। अब राहत और बचाव के बाद नेपाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों को दोबारा खड़ा करने की है। सरकार का आकलन है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पहले से ज्यादा मजबूत और टिकाऊ ढांचा तैयार करने पर करीब 6 अरब डॉलर तक खर्च हो सकता है।

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि पुनर्निर्माण केवल पहले जैसी व्यवस्था खड़ी करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनका जोर ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर है, जो भविष्य में बाढ़, भूस्खलन और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने में ज्यादा सक्षम हो। उनके मुताबिक मजबूत और आपदा-रोधी पुनर्निर्माण की लागत सामान्य तरीके से किए जाने वाले निर्माण की तुलना में दो से तीन गुना तक अधिक हो सकती है।

बाढ़ ने नेपाल के सामने खड़ी की बड़ी चुनौती
भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस आपदा में 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा का असर जन जीवन के साथ सड़कें, पुल, घर और जलविद्युत परियोजनाएं पर भी पड़ा है।

अकेले हाइड्रोइलेक्ट्रिक सेक्टर को 100 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। करीब 74,500 घर तबाह हुए हैं, जबकि लगभग 40 किलोमीटर सड़कें और 30 से ज्यादा पुल बाढ़ की चपेट में आकर बह गए। ऐसे में सरकार के सामने राहत पहुंचाने के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में बिजली, सड़क, पुल, आवास और दूसरी जरूरी सुविधाओं को दोबारा खड़ा करने की चुनौती है।

पहले होगा नुकसान का विस्तृत आकलन
नेपाल सरकार फिलहाल आपदा से हुए नुकसान का शुरुआती आकलन कर रही है। इसके बाद एक व्यापक पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) तैयार किया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुनर्निर्माण की वास्तविक जरूरत और लागत का अंदाजा लगाया जाएगा। राष्ट्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. गुनाकर भट्टा के मुताबिक शुरुआती स्तर पर नुकसान का तेजी से आकलन किया जा रहा है। इसके बाद करीब एक से डेढ़ महीने के भीतर विस्तृत मूल्यांकन पूरा करने की योजना है।

इस बार नुकसान का आकलन करने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मौके पर किए जाने वाले निरीक्षण की भी मदद ली जाएगी। सरकार का मानना है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में मदद मिल सकती है।

पुनर्निर्माण के लिए डोनर कॉन्फ्रेंस की तैयारी
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि बाढ़ से नुकसान अरबों रुपये में है, लेकिन वास्तविक आंकड़ा PDNA पूरा होने के बाद ही सामने आएगा। इसके आधार पर सरकार अंतरराष्ट्रीय सहयोग जुटाने के लिए डोनर कॉन्फ्रेंस आयोजित करने पर विचार कर रही है। वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर बातचीत जारी है। विस्तृत आकलन सामने आने के बाद नेपाल अपने मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय सहायता जुटाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

नेपाल के लिए यह तरीका नया नहीं है। 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भी नुकसान का आकलन करने के बाद काठमांडू में डोनर कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। उस समय नेपाल सरकार ने करीब 7 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया था और अंतरराष्ट्रीय दाताओं ने लगभग 4.5 अरब डॉलर की सहायता देने का वादा किया था।

उस दौरान भारत ने सबसे ज्यादा 1 अरब डॉलर की सहायता देने का वादा किया था। चीन, एशियन डेवलपमेंट बैंक, विश्व बैंक, जापान और अमेरिका समेत कई देशों और संस्थाओं ने भी मदद की थी।

इस बार भी भारत समेत कई देश आगे आए
हालिया बाढ़ के बाद नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत मिलनी शुरू हो गई है। कई देशों, बहुपक्षीय संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने राहत सामग्री, आर्थिक सहायता और विशेषज्ञ टीमों के जरिए मदद पहुंचाई है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बाढ़ के पहले दिन से ही मित्र देशों की ओर से अलग-अलग तरह की सहायता मिल रही है। उन्होंने संकट की घड़ी में सहयोग करने वाले देशों का आभार जताया।

भारत की ओर से अलग-अलग चरणों में राहत और बचाव सामग्री के साथ विशेषज्ञों की टीमें नेपाल भेजी जा रही हैं। पड़ोसी देश होने के कारण भारत की सहायता राहत और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण रही है। चीन ने भी करीब 30 करोड़ नेपाली रुपये की राहत सामग्री और तत्काल सहायता उपलब्ध कराई है। इसके अलावा श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अमेरिका ने भी नेपाल के लिए मदद भेजी है।

ऑस्ट्रेलिया से लेकर ब्रिटेन तक मदद का ऐलान
ऑस्ट्रेलिया ने नेपाल के लिए 10 लाख डॉलर की नकद सहायता देने का वादा किया है। इसके साथ ड्रोन ऑपरेटरों और विशेषज्ञों की टीम भी भेजी गई है, जो प्रभावित इलाकों में राहत और आकलन के काम में मदद कर रही है।

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने 83 टन जरूरी राहत सामग्री भेजी है और 10 मिलियन डॉलर तक की सहायता देने का वादा किया है। कतर ने भी करीब 40 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है।

ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड की सहायता की घोषणा की है। यूरोपीय संघ पहले ही करीब 20 लाख यूरो की मदद दे चुका है और अतिरिक्त 5 लाख यूरो देने की बात कही है।

नेपाल के प्रधानमंत्री सचिवालय के मुताबिक स्विट्जरलैंड ने 1 मिलियन डॉलर, डेनमार्क ने 35 लाख डेनिश क्रोनर, जर्मनी ने 20 लाख डॉलर, आयरलैंड ने 5 लाख यूरो, चेक रिपब्लिक ने 25 लाख चेक कोरुना और नॉर्वे ने 17 लाख नॉर्वेजियन क्रोनर की सहायता घोषित की है।

विश्व बैंक और ADB भी आए आगे
नेपाल को राहत और पुनर्निर्माण में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से भी सहयोग मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार विश्व बैंक ने रियायती दरों पर 167 मिलियन डॉलर का लोन देने का वादा किया है। वहीं एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने 5 मिलियन डॉलर का अनुदान और अतिरिक्त तकनीकी सहायता देने की घोषणा की है।

इसके अलावा अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया ने 10 मिलियन डॉलर का दान देने की बात कही है। इससे नेपाल के सामने मौजूद तत्काल राहत और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण दोनों जरूरतों में मदद मिलने की उम्मीद है।

संयुक्त राष्ट्र ने भी शुरू की बड़ी अपील
बाढ़ प्रभावित लोगों तक तत्काल मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय सहायता साझेदारों ने करीब 5 करोड़ डॉलर की इमरजेंसी अपील शुरू की है। इसका उद्देश्य 84 हजार से ज्यादा प्रभावित लोगों तक जीवन रक्षक सहायता पहुंचाना है।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक यह चार महीने की योजना है, जिसका संचालन नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के नेतृत्व में किया जा रहा है। इसका खास फोकस ऊंचाई वाले और दूरदराज के इलाकों में सर्दी शुरू होने से पहले जरूरी सहायता पहुंचाने पर है। इन क्षेत्रों में साफ पानी, चिकित्सा सुविधाएं, टीके और नकद सहायता उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आपदा के बाद बीमारी और दूसरी मानवीय समस्याओं का खतरा कम किया जा सके।

राहत के बाद अब असली चुनौती पुनर्निर्माण की
नेपाल के सामने अब सिर्फ तत्काल राहत पहुंचाने की चुनौती नहीं है। असली परीक्षा प्रभावित इलाकों को दोबारा खड़ा करने की होगी। सरकार का जोर अगर मजबूत और टिकाऊ निर्माण पर रहता है तो इसके लिए भारी वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। करीब 6 अरब डॉलर तक के संभावित पुनर्निर्माण खर्च ने यह साफ कर दिया है कि नेपाल अकेले इस चुनौती का सामना करना आसान नहीं होगा। ऐसे में भारत समेत पड़ोसी देशों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और वैश्विक दाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

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