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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन, 39 मेडल के साथ 6वीं बार भारत नंबर 4 पर

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन, 39 मेडल के साथ 6वीं बार भारत नंबर 4 पर

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन भारत के लिए कई यादगार उपलब्धियों के साथ हुआ। इस बार भारतीय दल ने कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। हालांकि भारत अपने 2010 के ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहरा नहीं सका, लेकिन जिन खेलों में खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, उनमें कई नए रिकॉर्ड बने और भविष्य के लिए मजबूत उम्मीदें भी दिखाई दीं। खासकर भारतीय मुक्केबाज़ों ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।

39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत
भारत ने इस संस्करण में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीतकर कुल 39 पदक अपने नाम किए। अंतिम दिन पदकों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ और भारतीय दल चौथे स्थान पर ही रहा। मेडल तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखते हुए 70 स्वर्ण सहित कुल 171 पदकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि कुल पदकों के लिहाज से भारत शीर्ष तीन देशों में जगह नहीं बना सका, लेकिन सीमित स्पर्धाओं के बावजूद खिलाड़ियों ने कई प्रभावशाली प्रदर्शन किए।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया। दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में यह छठी बार है जब भारत चौथे स्थान पर रहा है। इससे पहले भारत 1990, 1998, 2002, 2006 और 2022 में भी चौथे स्थान पर रहा था। वहीं भारत ने 2010 में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ दूसरा स्थान, 2018 में तीसरा स्थान, 2014 और 1994 में पांचवां, 1982 और 1978 में छठा, जबकि 1970, 1974 और 1986 में सातवां स्थान हासिल किया था। यह आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो दशकों में भारत ने लगातार शीर्ष पांच देशों में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी है।

मुक्केबाज़ी बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की सबसे बड़ी सफलता मुक्केबाज़ी में देखने को मिली। भारतीय बॉक्सरों ने 7 स्वर्ण और 3 रजत पदकों सहित कुल 10 पदक जीतकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले किसी भी राष्ट्रमंडल खेल में भारत की मुक्केबाज़ी टीम इतनी सफल नहीं रही थी।

दिलचस्प बात यह रही कि प्रतियोगिता के अंतिम मुकाबले शुरू होने से पहले ही भारतीय मुक्केबाज़ों ने रिकॉर्ड संख्या में पदक सुनिश्चित कर दिए थे। यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि इस बार शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे भारत के पारंपरिक मजबूत खेल प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं थे। ऐसे में बॉक्सिंग भारतीय दल के लिए सबसे बड़ा पदक स्रोत बनकर उभरी।

महिला मुक्केबाज़ों ने दिखाई दमदार ताकत
भारतीय महिला मुक्केबाज़ों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। युवा खिलाड़ियों ने बड़े मंच पर आत्मविश्वास के साथ मुकाबले खेले और कई स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाले।

साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मीन लम्बोरिया और प्रिया घनघस जैसी खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से यह संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में भारतीय महिला मुक्केबाज़ी और भी मजबूत हो सकती है। अनुभवी मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहेन भी फाइनल तक पहुंचीं, हालांकि उन्हें स्वर्ण मुकाबले में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा और रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा।

पुरुष खिलाड़ियों ने भी बढ़ाया देश का गौरव
महिला खिलाड़ियों के साथ-साथ पुरुष मुक्केबाज़ों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। सचिन सिवाच और अंकुश ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय अभियान को नई ऊंचाई दी। अधिकांश भारतीय मुक्केबाज़ फाइनल मुकाबलों में जीत दर्ज करने में सफल रहे, जिससे भारत का रिकॉर्ड पदक अभियान संभव हो पाया।

पैरा खिलाड़ियों ने भी बनाया नया इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के पैरा खिलाड़ियों के लिए भी ऐतिहासिक साबित हुए। भारतीय दल ने पैरा स्पर्धाओं में 7 पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया, जिसमें 3 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे। यह प्रदर्शन राष्ट्रमंडल खेलों के पैरा इतिहास में भारत की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

महिला खिलाड़ियों का रहा शानदार योगदान
भारत की कुल सफलता में महिला खिलाड़ियों की भूमिका बेहद अहम रही। महिला एथलीटों ने कुल 16 पदक जीतकर भारतीय अभियान की मजबूत नींव रखी। इनमें 8 स्वर्ण, 4 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल रहे। वहीं पुरुष खिलाड़ियों ने 23 पदकों का योगदान दिया, जिनमें 5 स्वर्ण, 13 रजत और 5 कांस्य पदक शामिल थे। दोनों वर्गों के संतुलित प्रदर्शन ने भारत को पदक तालिका में शीर्ष चार देशों में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सरकार की योजनाओं का प्रभाव
हालांकि नई दिल्ली में आयोजित 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 101 पदकों के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था, लेकिन ग्लासगो 2026 ने भी कई सकारात्मक संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निरंतर सुधार के पीछे केंद्र सरकार की खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS), राष्ट्रीय खेल विकास कार्यक्रम, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के प्रशिक्षण केंद्रों तथा आधुनिक खेल विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय कोचिंग का बड़ा योगदान रहा है।

इन योजनाओं के माध्यम से खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, पोषण, खेल उपकरण, विदेशी एक्सपोज़र और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिसका सकारात्मक असर राष्ट्रमंडल, एशियाई खेलों और ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में लगातार दिखाई दे रहा है। ग्लासगो 2026 में मुक्केबाज़ी और पैरा खेलों में भारत की ऐतिहासिक सफलता भी इसी मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र का परिणाम मानी जा रही है। इससे ये अनुमान लगाया जा रहा है कि 2030 में अहमदाबाद में प्रस्तावित कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत शीर्ष तीन देशों में अपना स्थान बनाने में क़ामयाब हो सकता है।

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