गणेश विसर्जन 2026: 4 शुभ मुहूर्त में दें बप्पा को विदाई, जानें पूजा और विसर्जन के जरूरी नियमगणेश चतुर्थी से शुरू हुआ 10 दिवसीय गणपति उत्सव अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। आज यानी 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर देशभर में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन कर बप्पा को भावपूर्ण विदाई देंगे। मान्यता है कि गणपति जी अपने भक्तों के घर कुछ दिनों तक विराजमान रहने के बाद कैलाश लौटते हैं। इसी भाव के साथ भक्त उन्हें अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देते हुए विदा करते हैं।
इस दिन गणेश विसर्जन के साथ अनंत चतुर्दशी का पर्व भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवसर पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है और अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है। ऐसे में आज का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
गणेश विसर्जन के लिए आज 4 शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्या आर्या मणि के अनुसार, 25 सितंबर को गणपति विसर्जन के लिए दिनभर में कई शुभ समय उपलब्ध हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी एक मुहूर्त में बप्पा की विदाई कर सकते हैं।
सुबह 6:11 बजे से 10:42 बजे तक विसर्जन के लिए चर, लाभ और अमृत के शुभ चौघड़िया रहेंगे।
इसके बाद दोपहर 12:13 बजे से 1:44 बजे तक शुभ चौघड़िया रहेगा।
शाम 4:45 बजे से 6:15 बजे तक चर चौघड़िया में गणेश विसर्जन किया जा सकता है।
वहीं, रात 9:14 बजे से 10:44 बजे तक लाभ चौघड़िया रहेगा।
विसर्जन से पहले ऐसे करें बप्पा की पूजा
गणपति विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा करना शुभ माना जाता है। सबसे पहले पूजा स्थल और आसपास की जगह को साफ करें। इसके बाद गणेश जी को फूल, दूर्वा, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
पूजा के दौरान गणपति जी की आरती करें और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करें। भक्त इस समय बप्पा से जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा भी मांग सकते हैं। पूजा पूरी होने के बाद ही विसर्जन की प्रक्रिया शुरू करें।
बप्पा की विदाई में इन बातों का रखें ध्यान
गणेश विसर्जन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच भावनात्मक विदाई का अवसर भी होता है। इसलिए विसर्जन के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय श्रद्धा और शांति बनाए रखना चाहिए।
मान्यता के अनुसार, प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले उसे उसके स्थान से थोड़ा हिलाकर विदाई की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसके बाद बप्पा को भोग लगाया जाता है। कुछ श्रद्धालु गणेश जी के साथ उनकी प्रिय वस्तुओं की एक छोटी पोटली भी रखते हैं और उसे प्रतिमा के साथ विसर्जित करते हैं। अंत में पूरे परिवार के साथ गणपति बप्पा की आरती और जयकारे लगाते हुए उन्हें विदा किया जाता है। विसर्जन के दौरान पर्यावरण और स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करना भी जरूरी है।

