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Bhojpur भरत तिवारी एनकाउंटर: गोली चलाने वाला आरोपी STF जवान पुलिस की गिरफ्त में, जांच ने पकड़ी रफ्तार

Bhojpur भरत तिवारी एनकाउंटर: गोली चलाने वाला आरोपी STF जवान पुलिस की गिरफ्त में, जांच ने पकड़ी रफ्तार

Bhojpur जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच एजेंसियों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मामले की जांच के दौरान पहली गोली चलाने के आरोपों का सामना कर रहे स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई को पूरे मामले में अब तक की सबसे अहम प्रगति माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से आरोपी जवान जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर था।

तकनीकी निगरानी के बाद हुई गिरफ्तारी
सूत्रों के अनुसार, आरोपी जवान को गुरुवार देर रात तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल सर्विलांस के आधार पर ट्रैक किया गया। बताया जा रहा है कि निलंबन के बाद से वह लगातार फरार था और जांच में सहयोग भी नहीं कर रहा था। आखिरकार पटना एसटीएफ की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। भोजपुर पुलिस ने भी गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

परिवार को न्याय के लिए मिली नई उम्मीद
भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने पिछले दिनों राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने परिवार को भरोसा दिलाया था कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। आरोपी जवान की गिरफ्तारी के बाद परिवार ने इसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

पहले ही हो चुका था निलंबन, हथियार भी जब्त
जांच के शुरुआती चरण में ही आरोपी जवान के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया था। साथ ही उसकी सरकारी पिस्टल भी जब्त कर ली गई थी, ताकि फोरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी परीक्षण पूरे किए जा सकें। अधिकारियों का मानना है कि इन साक्ष्यों से घटना की वास्तविक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।

प्रत्यक्षदर्शी दावे ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
मृतक भरत भूषण तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने दावा किया है कि उन्होंने घटना के दौरान आरोपी जवान को सबसे पहले गोली चलाते हुए देखा था। इसी बयान को जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य माना जा रहा है। पुलिस अब प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, तकनीकी साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट को एक साथ जोड़कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।

मां की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा
इस पूरे मामले की शुरुआत मृतक की मां आशा देवी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी से हुई थी। उन्होंने शाहपुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए कई पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। प्राथमिकी में हत्या, आर्म्स एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि भरत भूषण तिवारी को घर से साथ ले जाने के बाद आत्मसमर्पण जैसी स्थिति में भी गोली मार दी गई।

आगे की जांच पर टिकी सभी की नजर
अब आरोपी जवान की गिरफ्तारी के बाद जांच नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। पुलिस और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है तथा सभी की निगाहें अब जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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